सऊदी पत्रकार के हत्या से ट्रम्प को हुए कई फ़ायदेः रियाज़ सरकार तेल की क़ीमत घटाएगी, रूस से एस-400 का सौदा समाप्त करेगी और अमरीका

सऊदी पत्रकार के हत्या से ट्रम्प को हुए कई फ़ायदेः रियाज़ सरकार तेल की क़ीमत घटाएगी, रूस से एस-400 का सौदा समाप्त करेगी और अमरीका

वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी के लापता हो जाने और उनकी हत्या की अटकलों पर जहां विश्व स्तर पर हंगामा मचा हुआ है वहीं सऊदी सरकार बिल्कुल निश्चिंत दिखाई दे रही है क्योंकि उसे केवल अमरीका की प्रतिक्रिया की चिंता है और अमरीकी प्रशासन ने बड़े आश्चर्यजनक रूप से इस मामले में ख़ामोशी अख़तियार कर ली है।

59 वर्षीय पत्रकार की संभावित हत्या की ख़बरों से जहां दुनिया भर में सऊदी अरब की बदनामी हो रही है, न्यूयार्क टाइम्ज़ और वाशिंग्टन पोस्ट सहित सभी बड़े अंग्रेज़ी अख़बार तथा पूरा अरब मीडिया इस प्रकरण में सऊदी सरकार की नीयत पर गंभीर संदेह जता रहा है वहीं अमरीका के राष्ट्रपति ट्रम्प बिल्कुल ख़ामोश हैं उन्होंने एक भी ट्वीट नहीं किया है। निश्चित रूप से ट्रम्प अपनी इस ख़ामोशी की क़ीमत सऊदी अरब से वसूलने में लगे हुए हैं।

यदि ख़ाशुक़जी की हत्या की ख़बर की पुष्टि हो जाती है तो अमरीकी मीडिया में सऊदी सरकार को बड़ी गंभीर आलोचनाओं का सामना करना पड़ेगा। अमरीकी सेनेटरों और प्रतिनिधि सभा के सदस्यों के बयान भी आने लगे हैं कि यदि हत्या की ख़बर सही है तो अमरीका सऊदी अरब से अपने संबंधों पर पुनरविचार करे।

फ़्लोरीडा के रिपब्लिकन सेनेटर मार्को रूबियो ने ट्वीट किया कि यदि ख़ाशुक़जी की हत्या की ख़बर सही है तो अमरीका को चाहिए कि सऊदी अरब को कठोर जवाब दे। उन्होंने आगे लिखा कि यदि यह ख़बर सही है तो मैं सेनेट में सभी विकल्पों को पेश करूंगा।

सऊदी अरब को अच्छी तरह पता है कि ख़ाशुक़जी के मामले में ट्रम्प को ख़ामोश रखने की बड़ी क़ीमत अदा करनी पड़ेगी जो हाल ही में सऊदी अरब की कई बार बेइज़्ज़ती कर चुके हैं।

टीकाकारों का मानना है कि सऊदी अरब एक तो तेल की क़ीमत कम करने की कोशिश करेगा, दूसरे रूस से एस-400 मिसाइल व्यवस्था ख़रीदने का सौदा पूरी तरह रद्द कर देगा और अमरीका के ख़रीदे गए हथियारों की क़ीमत का तत्काल भुगतान करेगा ताकि वह ट्रम्प के ग़ुस्से से ख़ुद को बचा सके। अलबत्ता सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान को यह आशा भी होगी कि ट्रम्प जो मीडिया से अकसर नाराज़ रहते हैं और उसे फ़ेक न्यूज़ बताते नहीं थकते उन्हें ख़ाशुक़जी की हत्या पर  कुछ ज़्यादा दुख नहीं होगा मगर फिर भी वह इस मामले में भी सऊदी अरब के दोहन का प्रयास ज़रूर करेंगे।

इस बात की संभावना भी जताई जा रही है कि इस मामले में अमरीकी फ़ेडरल जांच एजेंसी एफ़बीआई भी जांच शुरू कर दे क्योंकि ख़ाशुक़जी अमरीका में पढ़ाई कर चुके हैं और अमरीका के विभिन्न हल्क़ों से उनके संबंध हैं।


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