म्यांमार में मुसलमानों के नरसंहार के विरूद्ध अहलेबैत (अ) वर्ल्ड असेम्बली की कड़ी प्रतिक्रिया।

  • News Code : 852831
  • Source : abna
Brief

बर्मा में मुसलमानों के नरसंहार के नए दौर और हिंसा के खिलाफ प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अहलेबैत (अ) वर्ल़्ड असेम्बली ने एक बयान जारी किया है जिसमें इन अत्याचारों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मानविधिकार की अंतर-राष्ट्रीय संस्थाओं से हिंसक कार्रवाईयों को रुकवाने की मांग की

अहलेबैत (अ) समाचार एजेंसी अबनाः बर्मा में मुसलमानों के नरसंहार के नए दौर और हिंसा के खिलाफ प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अहलेबैत (अ) वर्ल़्ड असेम्बली ने एक बयान जारी किया है जिसमें इन अत्याचारों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मानविधिकार की अंतर-राष्ट्रीय संस्थाओं से हिंसक कार्रवाईयों को रुकवाने की मांग की।
इस बयान में आया है कि रोहिंगया मुसलमान केवल '' बरमाई '' न होने के अपराध में वर्षों से हिंसा की आग में झुलस रहे हैं। यह हिंसा जो चरमपंथी बुद्धिस्टों और सेना के हाथों बर्मा सरकार के ग्रीन सिग्नल से की जा रही है उनमें पीड़ित मुसलमानों का नरसंमहार किया जा रहा है, उनके घर जलाए जा रहे हैं, उनकी मस्जिदें और दुकानें नष्ट की जा रही है, और बहुत बेरहमी से उन्हें उनके घरों व आशियानों से भगाया जा रहा है।
इस बयान में चरमपंथी वहाबियों की गतिविधियों को बर्मा में जारी संकट का मुख्य कारण बताते हुए कहा गया है कि अतिवादी बुद्धिस्टों के अलावा, इस हिंसा में तकफीरियों और वहाबियों की भूमिका की भी अनदेखी नहीं की जा सकती है। इस टोले ने अरब के तेल डॉलरों के समर्थन से दुनिया में इस्लाम के प्रति नफरत और दुश्मनी का बीज बोया है और मुसलमानों, ईसाइयों, बुद्धिस्टों और किसी भी धर्म के मानने वालों पर रहम नहीं खाया और उनकी बर्बर कार्यवाईयां इस समय जायोनिस्ट के खेल मैदान में बुद्धिस्टों के लिए बहाना बन रहे हैं जिनकी वजह से बुद्धिस्ट और मुसलमानों में हिंसा की आग की लौ इतनी तेजी से भड़क उठी हैं।
अहलेबैत (अ) वर्ल्ड असेम्बली के बयान का पूरा अनुवाद निम्नानुसार है:
बिस्म्ल्लाहे क़ासिमिल जब्बारीन
बर्मा राज्य ''राखीन'' के रोहिंगया मुसलमानों पर हिंसक हमलों का दूसरा दौर ऐसे हाल में शुरू हुआ है कि पश्चिमी सरकारों और विश्व साम्राज्यवाद से जुड़ी वैश्विक संस्थानों में मौत का सन्नाटा छाया हुआ है।
यह मज़लूम क़ौम, केवल ''बरमाई '' न होने के अपराध में वर्षों से हिंसा का निशाना बन रही है।  यह हिंसा जो चरमपंथी बुद्धिस्टों और सेना के हाथों बर्मा सरकार के ग्रीन सिग्नल से की जा रही है उनमें पीड़ित मुसलमानों का नरसंमहार किया जा रहा है, उनके घर जलाए जा रहे हैं, उनकी मस्जिदें और दुकानें नष्ट की जा रही है, और बहुत बेरहमी से उन्हें उनके घरों व आशियानों से भगाया जा रहा है।
ताज़ा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल पिछले एक सप्ताह के दौरान 400 मुसलमानों को मौत की नींद सुला दिया गया है। यह ऐसी स्थिति में है कि पिछले पांच वर्षों के समय में लाखों लोगों को या मार दिया गया या पलायन करने के लिए मजबूर कर समुद्र में डिबो दिया गया। जबकि बर्मा से भागे हुए मुसलमानों की संख्या लाखों में है।
अहलेबैत (अ) वर्ल्ड असेम्बली एक ऐसी संस्था होने के नाते जिसमें पूरी दुनिया की सैकड़ों महान और प्रसिद्ध हस्तियां सदस्य हैं विश्व समुदाय का ध्यान निम्नलिखित बिंदुओं की ओर आकर्षित कराना चाहती है:
1) सभी धर्मों की आधारशिला ''तौहीद'', ''नैतिकता'', ''प्रेम'' और दूसरे इंसानों के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिताने पर रखी गई है। इसलिए जो भी टोला या सरकार दूसरे इंसानों की हत्याओं के लिए किसी प्रकार की भी कोई कार्यवाई करती है वह जिस धर्म की भी दावेदार हो, झूठी है।
2) एक देश से जुड़े लोगों के नागरिक अधिकार, हर देश के लोगों के प्रारंभिक अधिकार हैं जिन पर वैश्विक समझौते भी बल देते हैं।
3) अगर कोई सरकार किसी समूह को उस ज़मीन का नागरिक होने की परमिट नहीं देती है तब भी उसे अधिकार नहीं है कि वह उसे मारे, जलाए या उसे भागने के लिए मजबूर करे।

4) ऐसी स्थिति में कि जब एक तरफ दुनिया के बहुत सारे देश, युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भागने वाले प्रवासियों और शरणार्थियों को अपने देशों में जगह दे रहे हैं, अत्यंत आश्चर्यजमक स्थिति में बर्मा सरकार अपने ही लोगों को जो दसियों साल से इस देश में जीवन गुज़ार रहे हैं उन्हें बरमाई न होने के बहाने से उनके साथ खराब व्यवहार कर उनके खून की नदियां बहा रही है।
5) इस बीच, चरमपंथी बुद्धिस्टों के अलावा, इस हिंसा में तकफीरियों और वहाबियों की भूमिका की भी अनदेखी नहीं की जा सकती है। इस टोले ने अरब के तेल डॉलरों के समर्थन से दुनिया में इस्लाम के प्रति नफरत और दुश्मनी का बीज बोया है और मुसलमानों, ईसाइयों, बुद्धिस्टों और किसी भी धर्म के मानने वालों पर रहम नहीं खाया और उनकी बर्बर कार्यवाईयां इस समय जायोनिस्ट के खेल मैदान में बुद्धिस्टों के लिए बहाना बन रहे हैं जिनकी वजह से बुद्धिस्ट और मुसलमानों में हिंसा की आग की लौ इतनी तेजी से भड़क उठी हैं।

6) अमेरिकी सरकार और अन्य महाशक्तियां जो चरमपंथी मुसलमानों द्वारा सामने आने वाले मामूली उग्रवाद को लेकर इतना शोर मचाती हैं कि दुनिया के कान खा जाती हैं, बर्मा में जारी नरसंहार के बारे में रत्ती बराबर भी विरोध नहीं कर रही हैं और हमेशा की तरह बेअसर और दोगली बातें करने में व्यस्त हैं।
7) हम इस्लामी सहयोग संगठन और मुसलमान सरकारों से पुरजोर अपील करते हैं कि बर्मा की सरकार और मानवाधिकार संगठनों पर दबाव डालकर मुसलमान के नरसंहार पर रोक लगवाएं। जैसा कि हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने अपने हज संदेश में स्पष्ट किया है कि: ''म्यांमार के मज़लूमों जैसे मुस्लिम अल्पसंख्यकों के रक्षा की जिम्मेदारी इस्लामी राज्यों के प्रमुखों और इस्लामी दुनिया के राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक हस्तियों के काधों पर है ''।
8) हम बर्मा सरकार को उनके अपराध के सख़्त परिणाम को लेकर चेतावनी देते हुए दोनों ओर नैतिक मानकों के अनुसार और अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में रहते हुए इस संकट के समाधान के लिए बातचीत के लिए आमंत्रित करते हैं।
9) इसी तरह इच्छास्वातंत्र्यवादियों और दुनिया भर के मुसलमानों से मांग करते हैं कि दुनिया के हर कोने से विरोध करें कि शायद कोई अंतरात्मा जाग जाए और धर्म के नाम पर उत्पीड़न की भड़कती हुए आग पर पानी छिड़क दे।
الَّذينَ أُخرِجوا مِن دِيارِهِم بِغَيرِ حَقٍّ إِلّا أَن يَقولوا رَبُّنَا الله وَلَولا دَفعُ الله النّاسَ بَعضَهُم بِبَعضٍ لَهُدِّمَت صَوامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَواتٌ وَمَساجِدُ يُذكَرُ فيهَا اسمُ اللَّهِ كَثيرًا وَلَيَنصُرَنَّ الله مَن يَنصُرُهُ إِنَّ الله لَقَوِيٌّ عَزيز. ﴿سوره حج، آیه ۴۰﴾
वर्ल्ड अहलेबैत (अ) परिषद
5 सितंबर 2017

6) अमेरिकी सरकार और अन्य महाशक्तियां जो चरमपंथी मुसलमानों द्वारा सामने आने वाले मामूली उग्रवाद को लेकर इतना शोर मचाती हैं कि दुनिया के कान खा जाती हैं, बर्मा में जारी नरसंहार के बारे में रत्ती बराबर भी विरोध नहीं कर रही हैं और हमेशा की तरह बेअसर और दोगली बातें करने में व्यस्त हैं।
7) हम इस्लामी सहयोग संगठन और मुसलमान सरकारों से पुरजोर अपील करते हैं कि बर्मा की सरकार और मानवाधिकार संगठनों पर दबाव डालकर मुसलमान के नरसंहार पर रोक लगवाएं। जैसा कि हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने अपने हज संदेश में स्पष्ट किया है कि: ''म्यांमार के मज़लूमों जैसे मुस्लिम अल्पसंख्यकों के रक्षा की जिम्मेदारी इस्लामी राज्यों के प्रमुखों और इस्लामी दुनिया के राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक हस्तियों के काधों पर है ''।
8) हम बर्मा सरकार को उनके अपराध के सख़्त परिणाम को लेकर चेतावनी देते हुए दोनों ओर नैतिक मानकों के अनुसार और अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में रहते हुए इस संकट के समाधान के लिए बातचीत के लिए आमंत्रित करते हैं।
9) इसी तरह इच्छास्वातंत्र्यवादियों और दुनिया भर के मुसलमानों से मांग करते हैं कि दुनिया के हर कोने से विरोध करें कि शायद कोई अंतरात्मा जाग जाए और धर्म के नाम पर उत्पीड़न की भड़कती हुए आग पर पानी छिड़क दे।
الَّذينَ أُخرِجوا مِن دِيارِهِم بِغَيرِ حَقٍّ إِلّا أَن يَقولوا رَبُّنَا الله وَلَولا دَفعُ الله النّاسَ بَعضَهُم بِبَعضٍ لَهُدِّمَت صَوامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَواتٌ وَمَساجِدُ يُذكَرُ فيهَا اسمُ اللَّهِ كَثيرًا وَلَيَنصُرَنَّ الله مَن يَنصُرُهُ إِنَّ الله لَقَوِيٌّ عَزيز. ﴿سوره حج، آیه ۴۰﴾
वर्ल्ड अहलेबैत (अ) परिषद
5 सितंबर 2017

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