अगर हिज़्बुल्लाह न होती तो इस्राइल बहुत पहले ही लेबनॉन क़ब्ज़ा कर चुका होताः पूर्व लेबनानी राष्ट्रपति

अगर हिज़्बुल्लाह न होती तो इस्राइल बहुत पहले ही लेबनॉन क़ब्ज़ा कर चुका होताः  पूर्व लेबनानी राष्ट्रपति

लेबनान को खुद को बचाने की ज़रूरत है, क्योंकि इस्राइल की लगातार यही कोशिश है कि वह लेबनान में गृह युद्ध और सांप्रदायिक्ता को बढ़ावा दे। पूर्व राष्ट्रपति ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा कि सअद हरीरी के लेबनान लौटने और उनकी बात सुनने से पहले उनके इस्तीफे को कबूल नहीं किया जा सकता।

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना : अलमयादीन की रिपोर्ट के अनुसार लैबनान के पूर्व राष्ट्रपति अमील जमील लहूद ने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर हिज्बुल्लाही जवानों की फ़िदाकारियाँ न होती तो इस्राइल अब तक पूरे लेबनॉन को अपने क़ब्ज़े में ले चुका होता। और उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सऊदी अरब में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह ईरान पर हमला कर सके। लैबनान के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि लेबनान के हालात पहले से बेहतर हुए हैं।उन्होंने कहा कि मुझे ज़रूद के इरसाल शहर में आतंकवादियों की हार के बाद ही से इस्राइल के निगेटिव प्रोपगंडों की आशंका होने लगी थी। लेबनान को खुद को बचाने की ज़रूरत है, क्योंकि इस्राइल की लगातार यही कोशिश है कि वह लेबनान में गृह युद्ध और सांप्रदायिक्ता को बढ़ावा दे। पूर्व राष्ट्रपति ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा कि सअद हरीरी के लेबनान लौटने और उनकी बात सुनने से पहले उनके इस्तीफे को कबूल नहीं किया जा सकता। और जो कुछ आजकल सऊदी अरब के अंदर हो रहा है वह बहुत बड़े फ़ित्ने को दर्शा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हिज़बुल्लाह के जवानों की फ़िदाकारियाँ एवं क़ुर्बानियां न होती तो इस्राईल लैबनान पर कब्जा जमा चुका होता। क्योंकि इस्राईल तो हर हाल में सऊदी अरब से ताक़तवर है लेकिन हिज़बुल्लाह के सामने उसके भी घुटने टिक गए हैं। सऊदी अरब तो बहुत कमज़ोर देश है वह अपनी परेशानियों में इतना उलझ चुका है कि उसका बाहर आना मुश्किल लग रहा है। उसे अपनी फ़िक्र करनी चाहिए, ईरान पर हमला करना कोई मामूली काम नहीं है।



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