यूरोप में इस्लाम से लगातार बढ़ती दुश्मनी।

यूरोप में इस्लाम से लगातार बढ़ती दुश्मनी।

ब्रिटेन के इंडिपेन्डेन्ट अख़बार ने एक लेख छापा है जिसका शीर्षक है यूरोप ने अपने क़ानूनों में इस्लाम की दुशमनी की जड़ें मज़बूत करना शुरू कर दिया है और इतिहास साक्षी है कि इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा।

ब्रिटेन के इंडिपेन्डेन्ट अख़बार ने एक लेख छापा है जिसका शीर्षक है यूरोप ने अपने क़ानूनों में इस्लाम की दुशमनी की जड़ें मज़बूत करना शुरू कर दिया है और इतिहास साक्षी है कि इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा।
लेखक ने यूरोपीय संघ की उच्च न्यायालय के उस फ़ैसले पर चर्चा की है जिसमें यूरोपीय कंपनियों को यह अधिकार दिया गया है कि यदि वह चाहें तो अपने यहां काम करने वालों को हेजाब और स्कार्फ़ के प्रयोग से रोक सकती हैं। कुछ लोग यह भी कहेंगे कि यह धर्म निरपेक्षता की जीत है लेकिन इतिहास बताता है कि इस प्रकार के रवैए का अंजाम कभी भी अच्छ नहीं होता। क्योंकि इस प्रकार के रवैए के बाद कुछ एसी गतिविधियों की भूमि प्रशस्त होती है जिससे संकट उत्पन्न होता है। यूरोपीय अदालत के फ़ैसले से समाज में महिलाओं की साझेदारी सीमित होगी क्योंकि इस क़ानून की चपेट में आकर बहुत सी महिलाएं कठिनाई में पड़ जाएंगी।
एसा लगता है कि यूरोप में इस्लाम से दुशमनी लगातार बढ़ती जा रही है। फ़ैसले के समर्थकों का कहना है कि यह महिला को आज़ादी दिलाने वाला फ़ैसला है लेकिन सच्चाई यह है कि यह फ़ैसला महिला पर अत्याचार के समान है क्योंकि इस तरह महिला से उसकी आज़ादी छीनी जा रही है और उसे बताया जा रहा है कि वह क्या पहने और क्या न पहने।
एक ज़माने में यूरोप में यहूदियों के साथ इसी प्रकार का बर्ताव किया गया था जिसका अफ़सोस आज तक पूरे पश्चिमी जगत को है और इस समय इस्लाम के बारे में उसी प्रकार का रवैया अपनाया जा रहा है।


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