कर्बला से ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डट कर मुक़ाबले की सीख मिलती है...

कर्बला से ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डट कर मुक़ाबले की सीख मिलती है...

कर्बला से ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डट जाने का सबक़ मिलता है, ज़ुल्म और अत्याचार की बुनियाद पर हुकूमत का सिस्टम बनाने का ख़ात्मा इमाम हुसैन अ.स. का मिशन था, शहीदों की क़ुर्बानियां अंधेरे रास्तों के लिए बेहतरीन उजाला हैं,

कर्बला ऐसा मकतब है जिसकी अज़मत के आगे हर क़ौम और मज़हब का इंसान अक़ीदत से अपने सर को झुकाए हुए है, हर वह दिल जिसमें इंसानियत ज़िंदा है, हक़ परस्ती का जज़्बा है और साथ ही बातिल से नफ़रत बाक़ी है वह कर्बला से बहुत सारी सीख हासिल करता है, इसी बात की तरफ़ पाकिस्तान के दारुल उलूम जामिया नईमिया के नाज़िमे आला डॉ. राग़िब हुसैन नईमी इशारा करते हुए कहा कि कर्बला से ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डट जाने का सबक़ मिलता है, ज़ुल्म और अत्याचार की बुनियाद पर हुकूमत का सिस्टम बनाने का ख़ात्मा इमाम हुसैन अ.स. का मिशन था, शहीदों की क़ुर्बानियां अंधेरे रास्तों के लिए बेहतरीन उजाला हैं, पैग़म्बर स.अ. के नवासे शहीदे आज़म इमाम हुसैन अ.स. द्वारा दीन की ख़िदमत और क़ुर्बानी का दायरा बहुत बड़ा है, इमाम हुसैन अ.स. की शहादत के फ़लसफ़े को समझने की ज़रूरत है, इस दुनिया की पैदाइश से लेकर क़यामत तक सच और झूठ के बीच जंग जारी रहेगी और जीत हमेशा हक़ की ही होगी, उन्होंने कहा कि कर्बला एक मकतब है जो ज़ुल्म से टकराने की सीख देती है, इमाम हुसैन अ.स. अपने नाना के चहीते नवासे थे, आपने कर्बला के मैदान में अपने परिवार समेत अपनी जान भी अल्लाह की राह में क़ुर्बान कर दी लेकिन बातिल के आगे सर न झुका कर क़यामत तक की इंसानियत को हक़ पर डटे रहने का सबक़ दिया है।
ज़ुल्म की बुनियाद पर खड़ी की गई हुकूमत को ख़त्म करना इमाम हुसैन अ.स. का मिशन था, उनके विचार यह थे कि मेरी और मेरे परिवार की जान जाती हो तो चली जाए लेकिन अल्लाह के क़ानून की हुकूमत बाक़ी रह जाए और सबको एक निगाह से देखा जाए। 
इसी तरह पाकिस्तान के कराची शहर के अहले सुन्नत के एक बड़े सेंटर में सय्येदुश-शोहदा (अ.स.) कांफ़्रेंस में पाकिस्तान सुन्नी तहरीक के प्रमुख सरवत ऐजाज़ क़ादरी ने कहा कि इमाम हुसैन अ.स. ने कर्बला में पूरी इंसानियत को बचाने और ज़ुल्म के अंधेरों को ख़त्म करने के लिए अज़ीम क़ुर्बानी दी, इमाम हुसैन अ.स. ने ज़ुल्म के सामने डट जाने और मज़लूमों के हुक़ूक़ को बचाने का पैग़ाम दिया है। 
सुन्नी तहरीक के प्रमुख ने कहा कि इमाम हुसैन अ.स. की क़ुर्बानी मुकम्मल, सच्चे और बाक़ी रहने वाले ईमान को सबसे बड़ी श्रद्धांजली है, इमाम हुसैन अ.स. ने हमेशा याद की जाने वाली क़ुर्बानी दे कर ज़ालिमों से टकराने और तानाशाहों का सर कुचलने का हौसला दिया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम के ख़िलाफ़ उंगली उठाने वाले आतंकवादी यज़ीद की पैरवी करने वाले हैं, और हमको चाहिए कि आतंकवाद का मुक़ाबला हुसैनी जज़्बे के साथ करें इसलिए कि बातिल कितना भी सर उठा ले लेकिन हक़ हमेशा बातिल के सामने डट जाता है और जीत भी हमेशा हक़ की होती है।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि 65 हज़ार पाकिस्तानियों को आतंकवाद का ईंधन बनाने वाले यज़ीद की पैरवी करने वाले हमें मार तो सकते हैं लेकिन हम सुन्नियों के दिलों से अहलेबैत अ.स. की मोहब्बत को नहीं निकाल सकते। सरवत ऐजाज़ क़ादरी ने कहा इमाम हुसैन अ.स. सब्र और सहनशीलता की मिसाल थे, ज़ालिम के सामने डट जाने के लिए हुसैनी फ़िक्र को ज़िंदा करने की ज़रूरत है, हज़रत इमाम हुसैन अ.स. ने कर्बला में पूरी इंसानियत को बचाने और ज़ुल्म के अंधेरों को ख़त्म करने के लिए अज़ीम क़ुर्बानी दी। 
उन्होंने कहा कि ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ न उठाने वालों को भी ज़ालिमों की लिस्ट में शामिल समझा जाता है और सांप्रदायिकता फैलाने वाले देश इस्लाम के दुश्मन हैं ऐसे देशों और लोगों की कड़े शब्दों में आलोचना होनी चाहिए।

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