है छह महीने का बच्चा मगर हुसैन का है.... अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस से बौखलाया साम्राज्यवाद

है छह महीने का बच्चा मगर हुसैन का है.... अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस से बौखलाया साम्राज्यवाद

कर्बला के सबसे छोटे शहीद की याद में अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस शुक्रवार को दुनिया के 41 से अधिक देशों में एक साथ मनाया जाएगा।

पिछले दुनिया के जिन 41 देशों में अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस मनाया गया था उनमें ब्रिटेन, जर्मनी और स्वीडन भी शामिल हैं। ईरान, सऊदी अरब, यमन, इराक़, तुर्की, भारत, पाकिस्तान, सिंगापूर और थाईलैंड सहित दुनिया के 41 देशों में अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस का कार्यक्रम एक साथ आरंभ होगा। पिछले वर्ष ईरान में 3 हज़ार 500 स्थानों पर अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस की शोक सभाएं आयोजित हुईं जिनमें एक करोड़ से अधिक महिलाओं ने अपने दूध पीते बच्चों के साथ भाग लिया।

ज्ञात रहे कि अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस हर वर्ष मुहर्रम के पहले शुक्रवार को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है और दुनिया के करोड़ों पुरुष और महिलाएं अपने दूध पीते बच्चों के साथ इस कार्यक्रम में भाग लेकर कर्बला के सबसे छोटे शहीद हज़रत अली असग़र को याद करती हैं।

सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ के इमाम मुहम्मद इब्ने सऊद इस्लामिक विश्वविद्यालय में "आशूरा के इतिहास में बदलाव" शीर्षक के अंतर्गत एक कांफ़्रेंस आयोजित हुई जिसमें शामिल लोगों ने एक बयान जारी करके कहा कि "डरो कि अली असग़र अंतर्राष्ट्रीय हो गया। इस कांफ़्रेंस में कहा गया कि अली असग़र (अ) का ध्यान रखना, यह घटना नुक़सान पहुंचाएगी।

फ़्रांस में एक कांफ़्रेंस आयोजित की गयी जिसका शीर्षक थाः जल्दी कीजिए, हमारे लक्ष्यों के विपरीत, एक लंबी और स्थायित्व पीढ़ी का मॉडल पेश किया जा रहा है।

हालैंड के शहर लाइडन (Leiden) में लाइडन विश्व विद्यालय में एक शोध संस्था की स्थापना की गयी जिसका नाम है, अली असग़र का व्यक्तित्व, इस शोध का लक्ष्य, आशूरा की संस्कृति के विस्तार से मुक़ाबला।

हालैंड में ही तीन इन्टरनेश्नल ट्रिब्यूनल्ज़ में अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस मनाने पर प्रतिबंध लगाने की याचिका दायर की गयी है जिसमें कहा गया है कि अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस के कार्यक्रम से यूरोपीय जनता की भावनाएं आहत हो रही हैं इसीलिए इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

इस्राईल ने हेब्रू और अरबी दोनों भाषाओं में विभिन्न पत्रिकाओं और वेबसाइटों पर इसके विरुद्ध संगठनात्मक ढंग से कम्पेन शुरु कर दिया है।

फ़्रांस की विभिन्न पत्रिकाओं में अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस के आयोजन के विरुद्ध 15 लेख, फ़्रांसीसी और अंग्रेज़ी भाषाओं में प्रकाशित हो चुके हैं । ब्रिटेन में एक शोध संस् ने अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस पर शोध किया और इस कार्यक्रम को उन धार्मिक कार्यक्रमों की सूची में शामिल किया जो मुसलमानों के दुश्मनों की आस्थाओं को रौंदने का कारण बन सकते हैं।

अमरीका में शैतान के पुजारियों ने 3 स्थानों पर रैलियां निकाली और अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस के आयोजन पर प्रतिबंध की मांग की। इटली के चर्चों ने भी अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस के आयोजन पर आपत्ति जताई।

अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस की स्थापना और लक्ष्यः

आज से 15 वर्ष पहले 2003 में इस्लामी गणतंत्र ईरान की राजधानी तेहरान में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस का आयोजन किया गया। इसके बाद वर्ष 2004 में अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस का आयोजन करने वाली समिति के अंतर्गत तेहरान, पवित्र नगर मशहद और क़ुम जबकि इराक़ के पवित्र नगरों कर्बला और नजफ़ तथा बहरैन के शहरों में कार्यक्रम आयोजित हुए।

अब सवाल यह है कि इस कार्यक्रम से साम्राज्यवादी और कठमुल्ले क्यों घबराए हुए हैं? यह वही भय है जो सन 61 हिजरी क़मरी में कर्बला के मैदान में यज़ीदी सेनापति उमरे साद को था। इमाम हुसैन के नन्हे सिपाही ने अपनी एक मुस्कुराहट से यज़ीदी सेना में कोहराम मचा दिया।


अंतर्राष्ट्रीय अली असग़र दिवस के स्ट्राटैजिक रिसर्च सेन्टर के प्रमुख सादिक़ रमज़ानी का कहना है कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का संदेश दुनिया के सभी स्वतंत्रताप्रेमियों के लिए है और इसी संदेश की वजह से आशूरा की शिक्षाएं दुनिया की विभिन्न जातियों और अन्य धर्मों के अनुयायियों तक पहुंच रही हैं। उनका कहन था कि अमरीकी और ज़ायोनी संस्थाएं आशूरा की शिक्षाओं और घटनाओं से हज़रत अली असग़र का नाम धीरे धीरे निकालने का प्रयास कर रही हैं।





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