हम अपनी नासमझी से इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी की शान में कैसी ग़लती कर रहे हैः आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी

हम अपनी नासमझी से इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी की शान में कैसी ग़लती कर रहे हैः आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी

ईरान के वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी में प्रचलित कुछ रस्म व रवाज को ग़लत बताते हुए इसे रोकने की मांग की है।

आयतुल्लाह नासरिक मकारिम शीराज़ी का संदेशः

प्रिय भाइयो, बहनों और जवानो! हमे अपने कान आंख बंद करके हर रस्म आदत और रवाज को नहीं अपनाना चाहिए। इन दिनों कुछ बुरी चीज़ें लोगों के बीच रवाज पा रही है। ऐसे हालात में समझदार आदमी को क्या करना चाहिए। बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए। इन बुरी चीज़ों को छोड़ना चाहिए और अच्छी चीज़ को अपना लेना चाहिए। यह न कहें कि यह तो रस्म है, आदत है, लोग ऐसा कहते हैं। लोगों को पसंद है। हमारे बाप दादाओं ने किया है। ये सब झूठ है। बुद्धि इस्तेमाल करें। जो कुछ हो रहा है उनमें यह है कि कुछ लोग इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शोकसभा में ग़लत चीज़ों को रवाज दे रहे हैं। शोकसभा में नौहा पढ़ने वालों में कुछ जवान हैं। मैं अनुभवी नौहाख़ानों से निवेदन करता हूं कि वे जवान नौहाख़ानों का मार्गदर्शन करें। इनमें से कुछ नौहा पढ़ने वाले उछल कूद करते हैं। यह अपमान है!!! क्या ये इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी है? इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी को सभ्य व गंभीर होना चाहिए। यह कैसी रस्म व रवाज है जिसे कुछ लोगों ने शुरु किया। साफ़ शब्दों में कह रहा हूं कि इन लोगों को रोका जाए। खड़े होकर मातम करना चाहते हैं करें। जुलूस निकालना चाहते हैं निकालें लेकिन उछल फांद का क्या तुक है। यह इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शोकसभा का अनादर है।


अपना कमेंट भेजें

आपका ईमेल शो नहीं किया जायेगा. आवश्यक फ़ील्ड पर * का निशान लगा है

*

Arba'een
आशूरा: सृष्टि का राज़
सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश
We are All Zakzaky