वापसी मार्च, क़ुद्स इंतेफ़ाज़ा मार्च हो गया, ज़ायोनियों की नीदें हराम

वापसी मार्च, क़ुद्स इंतेफ़ाज़ा मार्च हो गया, ज़ायोनियों की नीदें हराम

वापसी मार्च और ग़ज़्ज़ा का परिवेष्टन तोड़ने के उद्देश्य से होने वाले साप्ताहिक प्रदर्शन की प्रबंधक समिति की अपील पर ग़ज़्ज़ा में क़ुद्स इंतेफ़ाज़ा के नाम से प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

फ़िलिस्तीनी इन्फ़ामेश्न सेन्टर की रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन का प्रबंधन करने वाली सुप्रिम कमेटी ने ग़ज़्ज़ा का परिवेष्टन तोड़ने और सेन्चुरी डील की नापाक अमरीकी योजना के विरुद्ध फ़िलिस्तीनी जनता से पूर्वी ग़ज़्ज़ा से मिलने वाली अवैध अधिकृत सीमाओं की ओर मार्च की अपीली की थी जिसका भरपूर प्रभाव देखने में आया।

पिछले सप्ताह की भांति हज़ारों फ़िलिस्तीनी नागरिक जिनमें महिलाएं, पुरुष, बच्चे और युवा सब ही शामिल थे, पूर्वी ग़ज़्ज़ा में एकत्रित हुए और उन्होंने क़ुद्स इंतेफ़ाज़ा के नाम से अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की सीमाओं की ओर मार्च किया।

शुक्रवार को होने वाले प्रदर्शनों का उद्देश्य, बैतुल मुक़द्दस और मस्जिदुल अक़सा की रक्षा के लिए आवाज़ उठाना और दुनिया वालों को अमरीका और इस्राईल के नापाक इरादों से अवगत करना है। ख़बरों में बताया गया है कि इस्राईली सैनिकों ने पूर्वोत्तरी ग़ज़्ज़ा की ओर से क़ुद्स इंतेफ़ाज़ा मार्च में भाग लेने वाले फ़िलिस्तीनियों पर आंसू गैस के गोले दाग़े और उसके बाद फ़ायरिंग की जिसमें दर्जनों फ़िलिस्तीनी घायल हो गये।

ज्ञात रहे कि 30 मार्च से शुरू हुई वापसी मार्च के नाम से फ़िलिस्तीनियों की शांतिपूर्ण रैली में अब तक ज़ायोनी सैनिकों की फ़ायरिंग में 195 से अधिक फ़िलिस्तीनी शहीद हो चुके हैं जबकि 21 हज़ार 600 से अधिक घायल हुए हैं। यह रैली हर शुक्रवार को ग़ज़्ज़ा और इस्राईल की सीमा पर निकाली जाती है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान समेत अधिकतर देशों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने ज़ायोनियों के इन अपराधों की निंदा की है। 30 मार्च 1976 को ज़ायोनी शासन द्वारा फ़िलिस्तीनियों की ज़मीनों को ज़ब्त करने की वर्षगांठ के अवसर पर हर साल रैलियां निकाली जाती हैं। इस साल फ़िलिस्तीनियों ने इस रैली को वापसी मार्च का नाम दिया है और कहा है कि जब उनकी ज़मीनें वापस नहीं दी जातीं वे हर सप्ताह शुक्रवार को रैली निकालते रहेंगे।


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