यूं कर रहा है सऊदी अरब खून को डालरों से साफ ... यूं बिखरते हैं सपने...

 यूं कर रहा है सऊदी अरब खून को डालरों से साफ ... यूं बिखरते हैं सपने...

सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में निवेशकों का बड़ा सम्मेलन आयोजित हो रहा है जिस से सऊदी अरब को बहुत आशाएं थीं और इसे मरुस्थल का दाओस का नाम दिया गया था हालांकि जमाल खाशुकजी की हत्या की वजह से सऊदी अरब की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

     वैसे यह भी एक विचित्र संयोग है कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रीट्ज़ कार्ल्टन होटल में हो रहा है जहां सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने इस देश के लगभग 350 व्यापारियों और निवेशकों को बंधक बना कर रखा था जिनमें 13 लोग शाही परिवार से संबंध रखते हैं जिनमें सब से महत्वपूर्ण नाम, विश्व प्रसिद्ध अरबपति वलीद बिन तलाल का  है। इन सब ने बताया कि क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने उन सब से लगभग 30 अरब डालर वसूले और फिर उन्हें रिहाई नसीब हुई। इन सब पर गलत तरीके के धन एकत्रित करने का आरोप  लगाया गया था।

 ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और हालैंड जैसे बहुत से देशों ने जमाल खाशुकजी की हत्या के कारण  इस सम्मेलन का बहिष्कार किया है लेकिन रोचक बात यह है कि अमरीका के वित्तमंत्री स्टीवन मुचिन बहिष्कार के एलान के बावजूद रियाज़ पहुंच गये और वहां उन्होंने क्राउन प्रिंस बिन सलमान से भेंट भी की जिसके दौरान, दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार करने की राहों पर चर्चा की गयी।

            अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प को यह डर है कि कहीं रूस और चीन, सऊदी अरब के साथ अरबों डालर के सौदे न कर लें और उनकी यह आशंका काफी हद तक सही भी नज़र आ रही है क्योंकि रूस और चीन ने इस सम्मेलन में भरपूर रूप से हिस्सा लिया है।

     क्राउन प्रिंस बिन सलमान से निकट समझे जाने वाले सऊदी लेखक तुर्की अद्दखील ने ट्विट किया था कि अगर अमरीका ने सऊदी अरब पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध लगाया तो उसके परिणाम में ( पश्च्मित्तोरी भाग)  तबूक में रूस की सैन्य छावना बनवा दी जाएगी और रूस से युद्ध विमान और मिसाइली खरीदे जाएंगे। हालांकि सऊदी सरकार ने इस ट्विट से दूरी बना ली थी।


     पाकिस्तान के नये प्रधानमंत्री इमरान खान खुद को निर्धनों का मददगार कहते हैं और उन्होंने पाकिस्तान की विदेश नीतियों में नये पन और ताज़गी की बातें खूब की थीं लेकिन अब रियाज़ सम्मेलन में शामिल होने की वजह बताते हुए कहा कि उन्हें खाशुक़जी की हत्या का अफसोस है लेकिन उनके देश को धन की ज़रूरत है और इसी लिए उन्होंने रियाज़ जाने का फैसला किया है। और उनकी बात सही थी क्योंकि सऊदी अरब ने आज एलान कर दिया है कि वह पाकिस्तान को तीन अरब डालर का कर्ज दे रहा है।  

            हम पहले भी  कह चुके हैं और फिर कह रहे हैं कि दौलत और सौदा, मानवाधिकार और उसके मूल्यों पर भारी है। यही वजह है कि बहुत से देश इस सम्मेलन की ओर दौड़ पडे क्योंकि पश्चिमी नेताओं और बैंकों की अनुस्पस्थिति में उन्हें लगता है कि काफी अच्छा सौदा मिलेगा और सऊदी डालरों से वह मालामाल हो जाएंगे।

 हमें इस बात का बिल्कुल पता नहीं है कि सऊदी अरब इतने डालर कहां से लाएगा जिससे रियाज़ सम्मेलन में भाग लेने वाले सारे लोग खुश हो जाएं क्योंकि सऊदी अरब का विदेशी मुद्रा भंडार को तीन चार साल पहले 750 अरब डालर था बड़ी तेज़ी से खत्म हो रहा है  क्योंकि सऊदी अरब  हथियार के उल्टे सीधे  सौदे कर रहा है और यमन के युद्ध पर हर महीने लगभग 9 अरब डालर का खर्चा आ रहा है।

      क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान सऊदी अरब को दुनिया का सब से बड़ा बाज़ार बनाने का ख्वाब देख रहे थे और इसके लिए उन्होंने आरामको को बेच कर धन जुटाने पर सारे सपने बुने थे लेकिन एसा हो न सका क्योंकि ट्रम्प इस पर क़ब्ज़ा करना चाहते थे और वह चाहते थे कि इस कंपनी को न्यूयार्क से कंट्रोल किया जाए लेकिन सऊदी अरब को भरोसा नहीं हुआ और यह मामला खत्म हो गया।  रियाज़ सम्मेलन में बिन सलमान की उपस्थिति से यह सिद्ध होता है कि फिलहाल सब कुछ उनके कंट्रोल में है और अर्दोगान ने जिस तरह बड़े बड़े दावे करके साधारण सा बयान दिया है उससे भी यह पता चलता है कि बिन सलमान, अर्दोगान को अपना साथ देने पर तैयार करने में सफल हो गये हैं और यही वजह है कि उन्होंने अपने भाषण  में अपने दावों के  विपरीत कोई भी एसा राज़ नहीं खोला जो दुनिया के लिए नया हो जिससे यह विचार उत्पन्न होता है कि कहीं अर्दोगान से भी डील तो नहीं हो गयी? भले यह डील अस्थायी हो।


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