भारत और रूस की बढ़ती नज़दीकियां, कहीं अमेरिकी चौधराहट की समाप्ति के संकेत तो नहीं हैं?

भारत और रूस की बढ़ती नज़दीकियां, कहीं अमेरिकी चौधराहट की समाप्ति के संकेत तो नहीं हैं?

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि भारत, रूस के साथ अपने संबंधों को विशेष महत्व देता है। उन्होंने कहा कि रूस का स्थान हमारी विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण स्तंभ की तरह है।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज रूस के दो दिवसीय दौरे पर हैं, इस दौरान भारत और रूस ने वर्ष 2025 तक 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय निवेश का लक्ष्य तय किया है। भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरीसोव से मिलकर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति को लेकर भी समीक्षा की है। दोनों देशों के नेताओं के बीच व्यापार एवं निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति और आपसी हितों के मुद्दों पर आपसी तालमेल को बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की गई।

भारतीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़, भारत और रूस के दोनों नेताओं ने 23वें भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (प्रौद्योगिकी एवं आर्थिक तालमेल) की सह-अध्यक्षता की। भारत और रूस ने साल 2025 तक 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय निवेश का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव के बीच मास्को में शुक्रवार को हुई बैठक के दौरान तय किया गया, जिसमें विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों और क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई। सुषमा स्वराज ने बोरिसोव के साथ 23वें भारत-रूस अंतरसरकारी तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग आयोग (आईजीआईजीसी-टीईसी) बैठक की सह-अध्यक्षता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में भारत और रूस के बीच का व्यापार 10.17 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

उल्लेखनीय है कि आईआरआईजीसी-टीईसी एक कार्यकारी निकाय है, जिसकी सालाना बैठक होती है, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग को लेकर चल रही गतिविधियों की समीक्षा भी की जाती है। यह आयोग विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए संबंधित क्षेत्र के लिए नीतिगत सिफ़ारिश और निर्देश तैयार करता है।

इस बीच रूस और भारत के बीच संबंधों के मामलों के जानकारों का मानना है कि हालिया दिनों में जिस प्रकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प अपनी ग़लत नीतियों को भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों पर थोपने का प्रयास कर रहे हैं ऐसी स्थिति में भारत जिसके रूस के साथ पारंपरिक संबंध रहे हैं एक बार फिर वॉशिंग्टन से दूरी बनाते हुए मास्को के क़रीब हो रहा है। टीकाकारों के अनुसार भारत की रूस के साथ बढ़ती नज़दीकियां यह भी दर्शा रही हैं कि अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की चौधराहट धीमे-धीमे समाप्त हो रही है।


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