जमाल ख़ाशुक़जी के संबंध में जांच परिणामों को संचार माध्यमों के हवाले कर दिया जायेगाः चाऊश ओग़लू

जमाल ख़ाशुक़जी के संबंध में जांच परिणामों को संचार माध्यमों के हवाले कर दिया जायेगाः चाऊश ओग़लू

अमेरिकी सिनेट में विदेशी मामलों की समिति के अध्यक्ष बॉब कॉरकर ने सऊदी पत्रकार की हत्या के संबंध में वाइट हाउस के रवइये की आलोचना करते हुए कहा कि जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के संबंध में सऊदी अधिकारियों के दृष्टिकोण में परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है।


तुर्की के विदेशमंत्री मौलूद चाऊश ओग़लू ने कहा है कि लापता सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी के संबंध में किये जाने वाले जांच परिणामों को पारदर्शी तरीके से संचार माध्यमों के हवाले कर दिया जायेगा।

इसी प्रकार उन्होंने कहा है कि तुर्की की सरकार के पास लापता सऊदी पत्रकार के बारे में ठोस जानकारी है और इस संबंध में जानकारी के पूरा होते ही जांच- परिणामों को संचार- माध्यमों और विश्व जनमत के समक्ष पेश किया जायेगा।

तुर्की के विदेशमंत्री के बयान को सऊदी अरब की तानाशाही सरकार पर डाले जा रहे दबाव के एक भाग के रूप में देखा जा सकता है। इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान ने भी सऊदी अरब के खिलाफ इसी प्रकार का बयान दिया था।

प्रतीत यह हो रहा है कि तुर्क अधिकारी सऊदी अरब से अधिक विशिष्टता लेने की चेष्टा में हैं ताकि पिछले दो वर्ष के दौरान रियाज़ ने अंकारा के खिलाफ जो कुछ बयान दिया है उसकी भरपाई हो जाये और साथ क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुर्की को जिन कमियों का सामना है उनकी भी भरपाई जायेगी।

इस बीच सऊदी अरब की तानाशाही सरकार का सबसे बड़ा समर्थक अमेरिका है। इस समय उसे भी समस्याओं का सामना है। कुछ अमेरिकी सिनेटरों ने अमेरिकी सरकार का आह्वान किया है कि वह सऊदी सरकार की आलोचना करने वाले सऊदी पत्रकार की हत्या के संबंध में गम्भीर प्रतिक्रिया दिखाये।

अमेरिकी सिनेट में विदेशी मामलों की समिति के अध्यक्ष बॉब कॉरकर ने सऊदी पत्रकार की हत्या के संबंध में वाइट हाउस के रवइये की आलोचना करते हुए कहा कि जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के संबंध में सऊदी अधिकारियों के दृष्टिकोण में परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है।

अमेरिका के डेमोक्रेटिक सिनेटर Tim Kaine ने भी कहा है कि जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के बारे में सऊदी अरब का स्पष्टीकरण अपमान है और इस पाश्विकता पर विराम लगना चाहिये।

इस स्थिति में इस बात में कोई संदेह नहीं है कि तुर्की सऊदी अरब की राजशाही सरकार से जहां विशिष्टता लेने के प्रयास में है वहीं अमेरिका ने भी आवश्यक विशिष्टता हासिल कर ली है। अमेरिकी पादरी को रिहा करने के बाद तुर्की अमेरिका से अपनी मांगों को पूरा नहीं करा सका इसलिए इस समय वह अमेरिका और सऊदी अरब दोनों पर एक साथ दबाव डालने के प्रयास में है।


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