ख़ाशुक़जी की हत्या के सऊदी वर्णन को पश्चिम मानने के लिए तय्यार नहीं

ख़ाशुक़जी की हत्या के सऊदी वर्णन को पश्चिम मानने के लिए तय्यार नहीं

सऊदी शासन द्वारा मानवाधिकार के उल्लंघन की अभूतपूर्व घटनाओं में से एक इस्तांबोल में 2 अक्तूबर को सऊदी वाणिज्य दूतावास में इस देश की आलोचना करने वाले इसी देश के मशहूर पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या की घटना है।

उनकी नृशंस हत्या की कि जिसे अंततः सऊदी शासन ने स्वीकार कर लिया है, विश्व स्तर पर कड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और अंततः योरोपीय अधिकारियों ने भी इस घटना की आलोचना की है।

एक बड़ा सवाल यह उठता है कि सऊदी शासन ने शुरु में ख़ाशुक़जी की स्थिति के बारे में किसी तरह की जानकारी होने का इंकार किया और अब यह कह रहे हैं कि वह इस्तांबोल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में हुए झगड़े के दौरान मारे गए। अगर सऊदियों के इस दावे को मान भी लिया जाए तो सवाल यह उठता है कि उनका शव कहा है और उनके शव के साथ क्या हुआ?

ऐसा लगता है कि इस समय सऊदियों के सामने ख़ाशुक़जी के शव के क्षत विक्षत होने का मामला सबसे बड़ी मुश्किल बन गया है और उनका शव मिलते ही कि कहा जा रहा है कि इस्तांबोल के आस-पास के जंगल में दफ़्न हुआ है, सऊदी शासन के सामने नई मुसीबत खड़ी होगी कि जिससे निकलने का उनके पास कोई रास्ता नहीं है।

एक अहम बात जिस पर योरोपीय संघ और इस संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेड्रीका मोग्रीनी ने भी बल दिया है वह यह कि जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या वियना वाणिज्यिक संबंध संधि के अनुच्छेद 55 का उल्लंघन है। इस अनुच्छेद में मेज़बान सरकार से क़ानून का सम्मान करने पर बल दिया गया है। मोहम्मद बिन सलमान ने डेथ स्कवाएड को इस्तांबोल भेज कर अपने देश के वाणिज्य दूतावास में ख़ाशुक़जी की हत्या करवाकर यह दर्शा दिया कि अंतर्राष्ट्रीय क़ानून व संधियों की उनकी नज़र में कोई अहमियत नहीं है।

इस बीच पश्चमी देशों ख़ास तौर पर योरोपीय अधिकारियों की प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि उन्हें ख़ाशुक़जी की हत्या के बारे में रियाज़ के वर्णन पर विश्वास नहीं है। जैसा कि जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा कि जमाल ख़ाशुक़जी की मौत के बारे में रियाज़ के वर्णन पर उन्हें भरोसा नहीं है।

अब योरोपीय अधिकारियों की ओर से सऊदी शासन पर पाबंदी लगाने की मांग उठ रही है। जैसा कि ऑस्ट्रिया की संसद में विदेश नीति आयोग के प्रमुख आंद्रेयस शायडर ने योरोपीय संघ से मांग की है कि जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले में सऊदी शासन के ख़िलाफ़ पाबंदी लगाए। इसलिए इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि पश्चिम अपनी ज़ाहरी छवि की ख़ातिर सऊदी अरब के कुछ अधिकारियों के ख़िलाफ़ पाबंदी लगाएगा।


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