क्या अमेरिका प्रतिबंध लगाकार ईरान को झुका सकेगा?

क्या अमेरिका प्रतिबंध लगाकार ईरान को झुका सकेगा?

ईरान के खिलाफ प्रतिबंध, वह हथकंडा है जिसकी उपयोगिता समाप्त हो चुकी है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने अमेरिका के ताज़ा प्रतिबंधों की भर्त्सना की और उसे इस्लामी व्यवस्था को उखाड़ फेंकने की दिशा में अमेरिकी प्रयास बताया।

ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का दूसरा चरण 5 नवंबर से लागू हो गया जबकि अमेरिकी प्रतिबंधों का पहला चरण 6 अगस्त को लागू हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को दावा किया कि उन्होंने ईरान के ख़िलाफ सबसे कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है।

उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अब तक जो प्रतिबंध लगाये गये थे उनमें ये प्रतिबंध सबसे कड़ा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने इसी प्रकार कहा कि जबसे वह अमेरिका का राष्ट्रपति बने हैं तब से ईरान के व्यवहार परिवर्तित हो गये हैं।

वर्तमान समय में अमेरिका का मूल लक्ष्य पूरी तरह ईरान के तेल की बिक्री को रोकना, दूसरे देशों के साथ ईरान के व्यापारिक एवं बैकिंग लेन- देन को रोकना और अंततः ईरान की अर्थ व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है जबकि अमेरिका का असली लक्ष्य ईरान की इस्लामी व्यवस्था को उखाड़ फेकना है और अमेरिकी अधिकारी दावा करते हैं कि वे ईरान के व्यवहार को परिवर्तित करना चाहते हैं।

दूसरे शब्दों में अमेरिकी ईरान के व्यवहार को पूर्णरूप से अपनी इच्छानुसार करना चाहते हैं। इसी बीच अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने से अमेरिका का लक्ष्य इस देश के रवइये को बदलना है।

ईरान के खिलाफ प्रतिबंध, वह हथकंडा है जिसकी उपयोगिता समाप्त हो चुकी है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने अमेरिका के ताज़ा प्रतिबंधों की भर्त्सना की और उसे इस्लामी व्यवस्था को उखाड़ फेंकने की दिशा में अमेरिकी प्रयास बताया।

बहरहाल ट्रंप और उनके जैसी सोच रखने वाले इस बात को भूल गये हैं कि ईरान गत चालिस वर्षों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और विभिन्न प्रकार के प्रतिबंधों का सामना करते हुए उसने विभिन्न क्षेत्रों में ध्यान योग्य प्रगति की है जबकि इस बार के अमेरिकी प्रतिबंध में अमेरिका के निकटवर्ती घटक भी ट्रंप का साथ नहीं दे रहे हैं और इसका मूल कारण यह है कि अमेरिकी घटक इस बात को अच्छी तरह समझ गये हैं कि इन प्रतिबंधों से न तो ईरान पर कोई विशेष प्रभाव पड़ेगा और न ही उसे झुकाया जा सकता है। 


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