कौन किसको बेवक़ूफ़ बनाएगा और कौन किस पर हंसेगा ट्रम्प या ऊन? दोनों नेताओं की पुनः मुलाक़ात की बातें क्यों हो रही हैं?

कौन किसको बेवक़ूफ़ बनाएगा और कौन किस पर हंसेगा ट्रम्प या ऊन? दोनों नेताओं की पुनः मुलाक़ात की बातें क्यों हो रही हैं?

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग ऊन से रविवार को मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात में यह तय पाया कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और उत्तरी कोरिया के नेता किम जोंग ऊन की मुलाक़ात होगी औज्ञ इस मुलाक़ात में द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने और उत्तरी कोरिया के परमाणु निशस्त्रीकरण के बारे में वार्ता होगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों नेताओं की जून महीने की मुलाक़ात के बाद जिसके लिए बड़े पैमाने पर मीडिया हंगामा हुआ था और कहा गया था कि उत्तरी कोरिया अपना परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम ख़त्म करने पर तैयार हो गया है, किसी भी समझौते पर कोई भी प्रगति नहीं हुई है। स्थिति यह हो गई कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने उत्तरी कोरिया के साथ हर प्रकार का संपर्क रोक देने का आदेश दिया।

हमें यह नहीं पता कि ट्रम्प और ऊन में कौन किस पर हंसेगा उत्तरी कोरिया के नेता या अमरीकी राष्ट्रपति? मगर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जो पर्दे के पीछे से यह पूरा खेल कंट्रोल कर रहे हैं, वह सब पर हंसेंगे। इसलिए कि यह संभव ही नहीं है कि चीन और अमरीका के बीच व्यापारिक और आर्थिक युद्ध छिड़ा हुआ है तो इन हालात में उत्तरी कोरिया और अमरीका के बीच परमाणु निशस्त्रीकरण पर कोई प्रगति हो।

ट्रम्प प्रशासन ने चीन से अमरीका को निर्यात किए जाने वाले 200 अरब डालर के सामानों पर टैक्स लगा दिया और दूसरे चरण के टैक्स की तैयारी भी हो रही है। चीन ने जवाबी कार्यवाही करते हुए अमरीका से चीन को निर्यात किए जाने वाले 50 अरब डालर के सामन पर टैक्स लगा दिया। चीन ने यह घोषणा भी कर दी है कि वह अलग अलग देशों से प्रतिदिन 8 से 9 मिलियन बैरल तेल ख़रीदता है और यह खरीदारी अब पेट्रो डालर के बजाए पेट्रो युवान के आधार पर होगी। इस तरह चीन अपने उस नुक़सान की भरपाई करेगा जो अमरीकी टैक्स के कारण उसे पहुंच रहा है।

हमें इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि किम जोंग ऊन जिन्हें चीन का समर्थन हासिल है, अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के जज़्बात से खेल रहे हैं। इस तरह उन्हें कुछ समय मिल जा रहा है और उनका देश एकांत की स्थिति से किसी हद तक खुद को बाहर भी निकाल रहा है। बहुत से विशलेषकों का यह कहना है कि इस व्यक्ति के पास गहरी राजनैतिक व सामरिक महारत है जो उनके भोले चेहरे पर कभी नज़र नहीं आती। यह सोचा भी नहीं जा सकता कि वह निकट भविष्य में परमाणु कार्यक्रम छोड़ देंगे।

सितम्बर महीने में ट्रम्प ने उत्तरी कोरिया के नेता के लिए कहा कि किम को चाहते हैं और वह शक्तिशाली इंसान हैं। ट्रम्प ने किम के पत्र की तारीफ़ की जो उन्हें मिला था हालांकि मुहब्बत के इस इज़हार से पहले दोनों पक्षों के बीच एसी बयानबाज़ी हुई जो कूटनैतिक मर्यादाओं की सारी सीमाएं पार कर गई। ट्रम्प ने किम को लिटिल मिसाइल मैन कहा था और यह भी कहा था कि अमरीका का परमाणु बटन कोरिया के परमाणु बटन से बड़ा है।

आजकल ट्रम्प दुनिया के राष्ट्राध्यक्षों पर बड़ी मुहब्बत लुटा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सऊदी अरब के नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ पर इसी तरह मुहब्बत लुटाई। मगर इस मुहब्बत के साथ ही उन्होंने उनका मज़ाक़ उड़ाया। सऊदी अरब की दौलत का मज़ाक़ उड़ाया और साफ़ साफ़ कहा कि सऊदी अरब को तेल की आमदनी का बड़ा भाग अमरीका को देना चाहिए। यह मामला इतना आगे बढ़ गया कि सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान को ब्लूमबर्ग से इंटरव्यू में यह बयान देना पड़ा कि उनके देश को अमरीका की मदद की ज़रूरत नहीं है और सऊदी अरब अमरीका से जो भी हथियार लेता है उसकी क़ीमत अदा करता है। साथ ही उन्होंने भी ट्रम्प के लिए अपनी मुहब्बत का इज़हार किया और कहा कि वह ट्रम्प के साथ काम करना पसंद करते हैं।

मगर उत्तरी कोरिया के नेता से ट्रम्प को जो मुहब्बत है वह सऊदी नरेश से उनकी मुहब्बत से पूर्णतः भिन्न है क्योंकि कोरिया के पास परमाणु हथियार हैं और इन हथियारों को अपने निशाने पर ले जाने वाले मिसाइल हैं साथ ही उसे चीन का भरपूर समर्थन भी हासिल है मगर सऊदी अरब का मामला यह है कि उसके पास दौलत तो है लेकिन अमरीका ने उसे कई युद्धों में फंसा दिया है। सऊदी अरब के नरेश से ट्रम्प की मुहब्बत जानलेवा है।

अंतर पूर्णतः स्पष्ट है। अमरीका और सभी पश्चिमी देश केवल ताक़त की ज़बान ही समझते हैं एसी ताक़त जिसमें मिसाइल भंडार शामिल है और परमाणु हथियार भी मौजूद हों। यह चीज़ अरब देशों के पास नहीं है।


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