इस्राईल को सता रहा है ईरान की बढ़ती ताक़त का ख़ौफ़, इस्राईली जनरल ने दिया यह सुझाव

इस्राईल को सता रहा है ईरान की बढ़ती ताक़त का ख़ौफ़, इस्राईली जनरल ने दिया यह सुझाव

इस्राईल के एक पूर्व जनरल ने कहा है कि इस्राईल को ग़ज़्ज़ा पट्टी को लेकर अधिक चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती सीरिया में ईरान की बढ़ती ताक़त है।

इस्राईली जनरल जैकब एमीडरोर ने कहा कि सीरिया में ईरान की लगातार बढ़ती ताक़त तेल अबीब के सामने सबसे बड़ी चुनौती और चिंता का सबसे प्रमुख मुद्दा है।

इस्राईली वेबसाइट जेडीएन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस्राईली राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख रह चुके जैकब एमिडरोर का कहना है कि इस्राईल ने हालिया दिनों हमास के साथ संघर्ष विराम की कोशिश तो की है लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इससे न तो हमास की बढ़ती ताक़त को सीमित किया जा सकेगा और ईरान ईरान की शक्ति को सीमित करने कोई रास्ता निकाला जा सकेगा।

इस्राईली जनरल का यह भी मानना है कि ग़ज़्जा पर क़ब्ज़ा कर लेने का सुझाव भी कुछ इस्राईली अधिकारी दे रहे हैं लेकिन यह खुली हुई मूर्खता होगी। यदि एसा किया गया तो इस्राईल के लिए समस्याएं बढ़ जाएंगी।

टीकाकार यह मानते हैं कि इस्राईल ने शुरू से हिंसा और ग़ैर क़ानूनी क़ब्ज़े के ज़रिए अपना अस्तित्व बाक़ी रखा है और आज भी उसकी यही नीति जारी है  लेकिन इस समय हालात में बहुत तेज़ी से बदलाव आ रहा है। बदलाव की शुरुआत उस समय हुई जब ईरान में वर्ष 1979 में इस्लामी क्रान्ति आई। ईरान में इस्लामी क्रान्ति आने के साथ ही धीरे धीरे पूरे इलाक़े में वह धड़े, संगठन और गलियारे मज़बूत होने लगे जो इस्राईल को अतिग्रहणकारी शासन मानते हैं और इस्राईली क़ब्ज़े को समाप्त करके फ़िलिस्तीन को आज़ाद कराए जाने के पक्षधर हैं।

लेबनान में हिज़्बुल्लाह आदोंलन आज इतना ताक़तवर हो गया है कि उसकी शक्ति इस्राईल की थल सेना से अधिक बताई जाती है। हिज़्बुल्लाह ने सीरिया गृह युद्ध के दौरान जिस कौशल का प्रदर्शन किया है उसे देखते हुए इस्राईल में चिंता की लहर दौड़ गई है।

दूसरी ओर सीरिया में राष्ट्रपति बश्शार असद का तख़्ता उलटने की साज़िश का नाकाम होना भी इस्राईल के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन गया है। इस्राईल ने कुछ क्षेत्रीय तथा पश्चिमी देशों के साथ मिलकर यह योजना बनाई थी कि सीरिया में बश्शार असद की सरकार का तख़्ता उलट दिया जाए और फिर सीरिया की सत्ता एसे संगठनों को दी जाए जो न केवल यह कि इस्राईल को कोई नुक़सान न पहुंचाएं बल्कि इस्राईल की विस्तारवादी नीतियों में मदद करें यहां तक कि गोलान हाइट्स का जो इलाक़ा इस्राईल के ग़ैर क़ानूनी क़ब्ज़े में है उसे भी इस्राईल के हवाले करने पर तैयार हो जाएं।

बश्शार असद की सरकार का तख़्ता उलटने की साज़िश नाकाम हुई तो एक तरफ़ वह सारे सपने चकनाचूर हो गए जो इस्राईल ने देखे थे और दूसरी तरफ़ इस्राईल की चिंता इस बात से बढ़ गई कि सीरिया संकट के दौरान हिज्बुल्लाह और ईरान की ताक़त जिस तरह सामने आई है कि उसे देखकर वह सभी ताक़तें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो गई हैं जो ईरान को हमेशा निशाना बनाने की कोशिश में रहती थीं।

ईरान की ताक़त बढ़ने के साथ ही हिज्बुल्लाह और हमास की ताक़त भी बढ़ रही है। फ़िलिस्तीनी संगठनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान ने मिसाइल शक्ति हासिल करने में उनकी मदद की है और अब फ़िलिस्तीनी संगठनों के मिसाइलों के कारण इस्राईल ख़ुद को पूरी तरह असुरक्षित समझ रहा है। हालिया दिनों की बात है कि इस्राईल ने ग़ज़्जा पट्टी पर हमला किया तो जवाब में फ़िलिस्तीनियों ने 100 से अधिक मिसाइल इस्राईली ठिकानों पर फ़ायर कर दिए।

मिसाइलों की इस बारिश ने इस्राईल के आयरन डोम नामक मिसाइल ढाल सिस्टम को नाकारा साबित कर दिया क्योंकि 100 से अधिक मिसाइलों में से 10 से कुछ अधिक मिसाइलों को ही यह सिस्टम लक्ष्य पर लगने से पहले ध्वस्त कर पाया।

आने वाले महीने और साल इस्राईल की चिंता और बढ़ाएंगे क्योंकि पश्चिमी एशिया का पूरा इलाक़ा इस्राईल के लिए लगातार अशांत और असुरक्षित होता जा रहा है।

इस्राईली जनरल ने इसी ज़मीनी सच्चाई का भय ज़ाहिर किया है।


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