इस्राईल के इतिहास की सबसे कठिन परिस्थितियां उत्पन्न हो चुकी हैं, इस्राईली नेताओं को भविष्य में अंधेरे के अलावा कुछ नहीं दिखाई दे

इस्राईल के इतिहास की सबसे कठिन परिस्थितियां उत्पन्न हो चुकी हैं, इस्राईली नेताओं को भविष्य में अंधेरे के अलावा कुछ नहीं दिखाई दे

इस्राईल और हिज़्बुल्लाह के बीच शक्ति के संतुलन में बुनियादी बदलाव के बारे में आए दिन ख़बरें आती हैं और यह ख़बरें आम तौर पर इस्राईल के सैनिक सूत्रों या सामरिक मामलों के विशेषज्ञों की ओर से जो पूर्व सैन्य अधिकारी होते हैं सामने आती हैं।

रोचक बात यह है कि कभी भी लेबनान के शक्तिशाली संगठन हिज़्बुल्लाह की ओर अपनी शक्ति के बारे में इस प्रकार का कोई बयान नहीं आता अलबत्ता जब जब इस्राईल से उसका मुक़ाबला हुआ है उस समय इस संगठन ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करके इस्राईल ही नहीं सारी दुनिया के रणनीतिकारों को हतप्रभ कर दिया है।

वर्ष 2006 के 33 दिवसीय युद्ध के दौरान इस्राईली युद्धक नौका ने लेबनानी क्षेत्रों पर हमला किया और जवाब में हिज़्बुल्लाह ने मिसाइल हमला करके युद्धक नौका को ध्वस्त कर दिया तब इस्राईल और दुनिया को पता चला कि हिज़्बुल्लाह ने सतह से समुद्र में मार करने वाले मिसाइल भी डेवलप कर लिए हैं।

इस समय इस्राईली मीडिया में हिज़्बुल्लाह के डेढ़ लाख मिसाइलों की बात बहुत हो रही है। तेल अबीब के सुरक्षा सूत्रों के हवाले से इस्राईल समाचार एजेंसी एमएकेओ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें बताया गया है कि सबकी नज़रें वैसे तो ग़ज़्ज़ा के इलाक़े पर टिकी हुई हैं मगर ग़ज़्ज़ा की लड़ाई तो हिज़्बुल्लाह से इस्राईल की बड़ी लड़ाई की भूमिका मात्र होगी। सूत्रों का कहना है कि इस बार हिज़्बुल्लाह से युद्ध हुआ तो यह युद्ध वर्ष 2006 जैसा नहीं होगा। इस्राईली सेना के कमांडर युआल स्ट्रिक ने कहा कि लेबनान से युद्ध हुआ तो यह बहुत कठिन युद्ध होगा। इस्राईल कम से कम तीन गुना ताक़त का प्रयोग करेगा जबकि हिज़्बुल्लाह ने भी अपनी शक्ति बहुत अधिक बढ़ा ली है।

इस्राईली इंटेलीजेन्स का अनुमान है कि हिज़्बुल्लाह के पास अलग अलग रेंज के डेढ़ लाख से अधिक मिसाइल हैं और वह रोज़ाना सैकड़ों मिसाइल इस्राईली क्षेत्रों पर बरसाने में सक्षम है।

इस्राईल के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सीरिया में जारी संकट अपने अंत के क़रीब पहुंच चुका है  और जैसे ही सीरियाई में जारी गृह युद्ध पूरी तरह समाप्त हुआ इस्राईल की चिंता कई गुना बढ़ जाएगी। जब तक यह संकट चल रहा था इस्राईल को काफ़ी संतुष्टि थी। यही कारण है कि इस्राईल ने सीरिया में लड़ने वाले चरमपंथी संगठनों की भरपूर मदद की मगर यह संगठन ज़्यादा दिन टिक नहीं पाए और सीरियाई सेना ने घटक फ़ोर्सेज़ के साथ मिलकर पूरे देश में उन्हें पराजित किया केवल दस प्रतिशत क्षेत्र ही अब इन आतंकियों के कंट्रोल में रह गए हैं और यह बाक़ी बचे इलाक़े भी कभी भी उनके क़ब्ज़े से निकल सकते हैं। इस स्थिति को देखते हुए इस्राईल ने सीरियाई चरमपंथी संगठनों की मदद भी रोक दी है। इस्राईली सेना के प्रवक्ता एविख़ाय अदरई ने गत गुरुवार को अपने ट्वीटर एकाउंट पर लिखा कि दो साल तक बड़े पैमाने पर सीरियाई नागरिकों की मदद करने के बाद अब यह कार्यक्रम रोक दिया गया है। इस्राईली सेना के प्रवक्ता ने सीरियाई नागरिकों की मदद की बात कही है लेकिन यह सीरियाई नागरिक नहीं बल्कि चरमपंथी संगठनों के पांच हज़ारों आतंकी थे जिनका इस्राईल में इलाज किया गया और जिनकी इस्राईल ने सामरिक मदद की।

इसका मतलब यह है कि सीरिया से मिलने वाला इस्राईल का बार्डर भी अब इस्राईल को सुरक्षित नज़र नहीं आता। ग़ज़्ज़ा पट्टी की हालत यह है कि वहां इस्राईल के ख़िलाफ़ लगातर विरोध आंदोलन चल रहा है और ग़ज़्ज़ा में बसे शरणार्थी अपने उन गावों और शहरों की ओर लौटना चाहते हैं जिन पर इस्राईल ने क़ब्ज़ा कर रखा है और जिन्हें उसने अपना भाग बना लिया है।

ख़ुद पश्चिमी तट के इलाक़े के हालात एसे हैं कि विशलेषक इसे ज्वालामुखी के रूप में देख रह हैं जो कभी भी लावा उगलना शुरू कर देगा।

पूरे पश्चिमी एशिया के इलाक़े के हालात जिस दिशा में जा रहे हैं उसे देखते हुए इस्राईल को अपना भविष्य बहुत चुनौती पूर्ण दिखाई दे रहा है।

नेतनयाहू सरकार ने सऊदी अरब और इमारात की सरकारों से संबंध स्थापित करने और सहयोग बढ़ाने मे सफलता हासिल की है। सऊदी अरब ने इस्राईल जाने वाले विमानों के लिए अपनी वायु सीमा खोल दी और कई स्थानों पर इस्राईल और सऊदी अरब के बीच सहयोग भी हो रहा है लेकिन इस्राईल को अच्छी तरह पता है कि उसने इमारत सऊदी अरब यहां तक कि मिस्र और जार्डन की सरकारों से भी अपने संबंध तो स्थापित कर लिए हैं लेकिन इन देशों की जनता इस्राईल को हरगिज़ स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। पूरे इलाक़े को लोग इस्राईल को ग़ैर क़ानूनी शासन के रूप में देख रहे हैं जिसने फ़िलिस्तीन की धरती हड़प कर अपने अस्तित्व की घोषणा कर दी है।

इस तरह इस्राईल और इस्राईली नेताओं को भविष्य में अंधेरे के अलावा कुछ नहीं दिखाई दे रहा है।


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