अगले चार दिन बहुत महत्वपूर्ण... क्या इदलिब विश्व युद्ध का आरंभ हो सकता है ?

अगले चार दिन बहुत महत्वपूर्ण... क्या इदलिब विश्व युद्ध का आरंभ हो सकता है ?

सीरिया में जो कुछ हो रहा है वह अपने गंतव्य तक पहुंच रहा है, सब कुछ खत्म होने वाला है, शांतिपूर्ण रूप से या फिर युद्ध से... सीरियाई सेना इदलिब पर धावा बोलने की तैयारी कर रही है उसे, ईरान और रूस का सहयोग हासिल है इसके साथ ही हिज़्बुल्लाह भी उसकी मदद के लिए तैयार है। भूमध्य सागर में रूस के 25 से अधिक युद्धपोत पहुंच चुके हैं जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह सीरिया में आतंकवादियों के अंतिम ठिकाने पर सीरियाई सेना की कार्यवाही को रोकने के लिए अमरीका की ओर से संभावित क़दम पर मुक़ाबला करने के लिए हैं।

 जिस तरह से भूमध्य सागर और फार्स की खाड़ी में अमरीका और रूस के युद्धपोतों की संख्या बढ़ रही है उससे साफ महसूस हो रहा है कि विश्व की यह दोनों बड़ी ताक़तें क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय टकराव के लिए युद्धपोतों की संख्या बढ़ रही है उससे साफ महसूस हो रहा है कि विश्व की यह दोनों बड़ी ताक़तें क्षेत्रीय या अंतरराषयार हो रही हैं

     रूस ने चीन के साथ मिल कर भूमध्य सागर में इतना बड़ा सैनिक अभ्यास किया जिसका उदाहरण गत 40 वर्षों के दौरान नहीं मिलता और इसी वजह से यह कहा जा रहा है कि अमरीका से उसका टकराव संभव है। दर अस्ल रूसी नेतृत्व ने हालात को समझ लिया है और वह सीरिया में अपनी सफलताओं की बलि चढ़ाने पर कदापि तैयार नहीं है।


अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस संदर्भ में ट्विट करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति बश्शार असद को इदलिब पर हमला नहीं करना चाहिए और अगर इस मावनीय त्रासदी में रूसी और ईरानियों ने भाग लिया तो बहुत बड़ी गलती होगी क्योंकि इसमें लाखों लोग मारे जा सकते हैं।

     अमरीकी राष्ट्रपति के  इस ट्विट से युद्ध की आहट सुनायी दे रही है विशेषकर इस लिए भी कि इस ट्विट का जवाब रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने दिया और  धमकियों  का अस्वीकारीय बताते हुए बल दयाक  इदलिब में सशस्त्र लोगों की उपस्थिति की वजह से सीरिया में शांति स्थापना की राह में बाधा उत्पन्न हो रही है और वह इदिलब को रूस के खिलाफ हमलों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

    ट्रम्प ने गूता और दरआ की स्वतंत्रता के लिए सीरियाई सेना की कार्यवाही के समय इस प्रकार की धमकी नहीं दी थी बल्कि उनकी सरकार ने चुप्पी साध पर एक प्रकार से इस पर सहमति ही प्रकट की थी। तो फिर इस बार ट्रम्प ने क्यों इस तरह से धमकी दी?

    इस सवाल का जवाब दो विश्लेषकों ने दिया है जिनमें से एक अमरीकी और दूसरा ब्रिटिश है।  उन दोनों ने ही एक ही बात कही और वह यह कि इस्राईल और सऊदी अरब ने ट्रम्प को इस प्रकार का रुख अपनाने पर प्रोत्साहित किया है क्योंकि वह दोनों यह नहीं चाहते कि रूस, ईरान और सीरिया के गठबंधन को विजय मिले।  

इस्राईल, सीरिया से ईरान को बाहर निकालने में विफल रहा है और रूस पर दबाव डालने की उसकी मांग भी प्रभावी नहीं रही है इस लिए उसे यह महसूस हो रहा है कि इदलिब को लेकर अमरीकी हमला उसके लिए अंतिम अवसर है और हमें तो लगता है कि इस बारे में जान बोल्टन की हालिया इस्राईल यात्रा के दौरान बात चीत हुई होगी।

    इसका एक चिन्ह इस्राईली युद्ध मंत्री का धमकी है जिसमें उन्होंने ईरानी ठिकानों को सीरिया से बाहर भी निशाना बनाए जाने की बात की है। मज़्ज़ा हवाई अड्डे पर हालिया हमला भी इस्राईल की इसी पीड़ा को दर्शाता है।

     आने वाले चार दिन बहुत महत्वपूर्ण होंगे, अगर राजनीतिक स्तर पर कोई सहमति नहीं हो पायी तो निश्चित रूप से युद्ध होगा जो बहुत बड़ा भी हो सकता है

     शुक्रवार को तेहरान में रूस तुर्की और ईरान की बैठक, युद्ध की बैठक भी हो सकती है क्योंकि खबरों में बताया जा रहा है कि शनिवार से सीरियाई सेना इदलिब पर कार्यवाही आरंभ कर सकती है।

     हमारी प्रार्थना है कि कोई राजनीतिक समाधान निकल आए हम दिल पर हाथ रख कर हालात का इंतेज़ार कर रहे है। आने वाले दिन सीरिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं इन्ही अगले कुछ दिनों में मध्य पूर्व के भविष्य का निर्धारण भी हो सकता है।


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