ज़ी हिंदुस्तान के खिलाफ FIR दर्ज, साम्प्रदायिकता फैलाने का आरोप।

ज़ी हिंदुस्तान के खिलाफ FIR दर्ज, साम्प्रदायिकता फैलाने का आरोप।

हार अररिया उपचुनाव में भाजपा को हार झेलनी पड़ी थी. इस चुनाव में जीतने वाली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कथित समर्थकों द्वारा देश-विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा...

अबनाः बिहार अररिया उपचुनाव में भाजपा को हार झेलनी पड़ी थी. इस चुनाव में जीतने वाली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कथित समर्थकों द्वारा देश-विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में राजद सांसद सरफ़राज़ आलम की जीत का कथित रूप से जश्न मना रहे कुछ लोग पर ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने आरोप लगा। इस वीडियो के आधार पर मीडिया में भारत विरोधी नारे लगाने पर डिबेट का आयोजन किया गया।
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार इस वीडियो में मौजूद लोगों के परिजनों द्वारा इस वीडियो की प्रमाणिकता पर सवाल उठाया गया। इन लोगों के परिजनों का कहना है कि या तो ये नारे बैकग्राउंड में हैं या इन्हें ऊपर से डाला गया है। पुलिस ने भी जांच पूरी हो जाने तक मीडिया को कयास न लगाने की सलाह दी।
हलाकि मीडिया में भाजपा की हार से ज्यादा वायरल वीडियो को तरजीह दी गई। रिपोर्ट के अनुसार 16 मार्च को ज़ी समूह के समाचार चैनल ज़ी हिंदुस्तान ने ‘जीता मुसलमान… अब अररिया आतंकिस्तान’ नाम से कार्यक्रम चलाया। इस कार्यक्रम के दौरान एंकर ने कई बार कहा कि चैनल इस वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इस बात का पैनल में बैठे लोगो पर कोई असर नहीं पड़ा और वह तरह तरह के कयास लगाने लगे। सवाल यह उठता है कि चैनल ने बिना वीडियो की विश्वसनीयता के अररिया के ‘आतंकिस्तान’ बनने का निष्कर्ष कैसे निकाल लिया? यह शब्द उन्होंने अपनी टैग लाइन में उपयोग किया था।
द वायर की रिपोर्ट के अनुसार सच्चर कमेटी के पूर्व नोडल ऑफिसर आशीष जोशी ने एक दोस्त द्वारा न्यूज़ चैनल के इस कार्यक्रम का वीडियो स्क्रीनशॉट मिलने के बाद न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (एनबीएसए) में चैनल के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई है। बता दे एनबीएसए एक स्व-नियामक शिकायत निवारण इकाई है, जो निजी टीवी समाचार चैनलों का प्रतिनिधित्व करती है। वेबसाइट से बात करते हुए आशीष ने बताया, ‘मैं इस कार्यक्रम के कट्टर सांप्रदायिक कैप्शन को देखकर हैरान था। ये भारतीय संविधान के खिलाफ भी है. यह आईपीसी की कई धाराओं का स्पष्ट उल्लंघन है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘यह एक बेहद खतरनाक ट्रेंड है क्योंकि मीडिया खबरों और जानकारियों को लोगों तक पहुंचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह लोगों को भ्रमित कर रहा है, साथ ही इससे समाज पर गलत असर हो रहा है। अल्पसंख्यकों पर हमलों के कितने ही मामले सामने आ चुके हैं।’ आशीष ने बताया, ‘एनबीएसए और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग जैसी कानून लागू करने वाली संस्थाओं का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सुस्त रवैये से दुख होता है। सच्चर कमेटी का नोडल अधिकारी और अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री के 15 बिंदु कार्यक्रम के हिस्सा रहे होने के कारण मुझे हमारे किए काम का ये हश्र देखकर मुझे और बुरा लगता है। किसी भी देश में सरकार के कामकाज में अल्पसंख्यकों का निष्पक्ष भरोसा सरकार के लिए इम्तिहान के जैसा होता है।’


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