हे सुन्नी मुसलमानों अगर तुम्हें हुसैन के ग़म में रोने पर आश्चर्य है तो मुझे तुम्हारे सुन्नी होने पर ताज्जुब है, क़ादरी

हे सुन्नी मुसलमानों अगर तुम्हें हुसैन के ग़म में रोने पर आश्चर्य है तो मुझे तुम्हारे सुन्नी होने पर ताज्जुब है, क़ादरी

सुन्नी मुसलमानों के प्रसिद्ध विद्वान एवं धर्मगुरू ताहिरुल क़ादरी ने इमाम हुसैन (अ) के ग़म में रोने पर बल दिया है।

अल्लामा क़ादरी ने उन लोगों की आलोचना की है, जो इमाम हुसैन (अ) और कर्बला में शहीद होने वाले उनके साथियों के ग़म में रोने वालों पर सवाल खड़े करते हैं।

पाकिस्तान की अवामी तहरीक पार्टी के प्रमुख को एक वीडियो में कहते हुए सुना जा सकता है कि कछ लोग ज्ञाम कम होने के कारण या नादानी में कहते पूछते हैं कि हुसैन के ग़म में रोना कहां लिखा है? कर्बला के शहीदों के ग़म में रोना और रुलाना कहां लिखा है?

इस सवाल के जवाब में मैं कहूंगा कि पैग़म्बरे इस्लाम मोहम्मद मुस्तफ़ा (स) हुसैन के ग़म में रोए थे, इसलिए मैं रोता हूं। मैं क़मस खाकर कहता हूं कि अगर पैग़म्बरे इस्लाम नहीं रोए होते तो मैं कभी नहीं रोता। हमारी सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक किताबों में पैग़म्बरे इस्लाम की पत्नी उम्मे सलमा के हवाले से दर्ज है कि घर में एक दिन इमाम हुसैन अपने नाना पैग़म्बरे

पैग़म्बरे इस्लाम ने जवाब दिया, उम्मे सलमा अभी ईश्वर के संदेशवाहक फ़रिश्ते ने मुझे बताया है कि एक दिन ऐसा आएगा कि लोग आपके इस चहीते नवासे को कर्बला नामक जगह पर शहीद कर देंगे। जिबरईल ने उस जगह की एक मुट्ठी मिट्टी लाकर मुझे दी है, जहां मेरे हुसैन को शहीद कर दिया जाएगा।

उसके बाद ताहिरुल क़ादरी सुन्नी मुसलमानों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे सुन्नी मुसलमानों अगर तुम्हें हुसैन के ग़म में रोने पर आश्चर्य है तो मुझे तुम्हारे सुन्नी मुसलमान होने पर ताज्जुब है।

की गोद में बैठे हुए थे और पैग़म्बर की आंखों से आंसू जारी थे, मैंने पूछा कि हे ईश्वर के दूत आप क्यों रो रहे हैं?


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