अमेरिका और ब्रिटेन जानते हैं, बहरैन जनांदोलन सफल हुआ तो फार्स की खाड़ी से निकलना पड़ेगा।

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  • Source : विलायत पोर्टल
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अमेरिका और ब्रिटेन अच्छी तरह जानते हैं बहरैन क्रांति के बाद उन्हें अपनी साम्राज्यवादी गतिविधियों के साथ फार्स की खाड़ी से निकलना पड़ेगा यही कारण है कि बहरैन में हो रहे अत्याचारों और मानवाधिकार हनन पर यह देश मूक दर्शक बने हुए है ।

जर्मनी में रह रहे बहरैनी मानवाधिकार कार्यकर्ता युसूफ अल्हौरी ने कहा कि बहरैन जनांदोलन ने इन ६ वर्षों में बहुत बलिदान दिया है । सैंकड़ों राजनीतिक विरोधियों को जेल, कुछ की नागरिकता खत्म हो जाना तथा हज़ारों शहीद और सैंकड़ो को निर्वासन तथा अलविफाक़ पार्टी को भंग किया जाना कुछ ऐसे मामले हैं जो इन ६ वर्षों में होते रहे हैं।
हालिया प्रदर्शनों में बहरैन वासियों ने आले खलीफा शासन के खात्मे की अपनी मांगों को जोर शोर से उठाया है। युसूफ ने आशा जताई कि आने वाले सालों में बहरैन का जनांदोलन अपने उद्देश्यों को पाने में सफल रहेगा। उन्होंने शैख़ ईसा क़ासिम के घर के बाहर धरने पर बैठे लोगों के बारे में बात करते हुए कहा कि शैख़ ईसा क़ासिम लोगों में बहुत लोकप्रिय हैं उनके आचरण ने उन्हें बहरैन का आध्यात्मिक पेशवा बना दिया है उनकी ताक़त बहरैनी जनता है तथा जिसकी ताक़त उसकी अपनी जनता हो वह सदैव विजयी रहता है।
सब जानते हैं कि कुछ सप्ताह पहले ही ख़लीफाई सैनिकों ने उनके घर पर हमला किया था लेकिन अपार जनसमूह के कारण वह अपने उद्देश्य में असफल रहे शैख़ क़ासिम को इन लोगों के होते हुए कोई सत्ता हानि नहीं पहुंचा सकती। उनके अनुसार बहरैन राजशाही आयतुल्लाह शैख़ क़ासिम से अपनी दुश्मनी निकाल रही है ज्ञात रहे कि शैख़ क़ासिम जनांदोलन से पहले भी बादशाह की गलत नीतियों का विरोध करते रहे हैं । उन्होंने बहरैन में हो रहे अत्याचारों पर अमेरिका और ब्रिटेन समेत विश्व समुदाय कि चुप्पी पर कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन अच्छी तरह जानते हैं बहरैन क्रांति के बाद उन्हें अपनी साम्राज्यवादी गतिविधियों के साथ फार्स की खाड़ी से निकलना पड़ेगा यही कारण है कि बहरैन में हो रहे अत्याचारों और मानवाधिकार हनन पर यह देश मूक दर्शक बने हुए है ।


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