वाशिंग्टन पोस्ट ने रविवार की सुबह अपनी रिपोर्ट में लिखा कि अमरीकी अधिकारी, परमाणु क्षेत्र में ईरान पर पुनः प्रतिबंध लगाए जाने के

वाशिंग्टन पोस्ट ने रविवार की सुबह अपनी रिपोर्ट में लिखा कि अमरीकी अधिकारी, परमाणु क्षेत्र में ईरान पर पुनः प्रतिबंध लगाए जाने के

प्रख्यात अरबी समाचारपत्र ने अपने संपादकीय में लिखा है कि अमरीका, ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंध लगा कर क्षेत्र में अपने घटकों को नुक़सान पहुंचा रहा है और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में निराज की स्थिति पैदा कर रहा है।

रायुल यौम के प्रधान संपादक अब्दुल बारी अतवान ने लिखा है कि ईरान के तेल के निर्यात पर प्रतिबंध से वैश्विक मंडियों में तेल की क़ीमत में भारी वृद्धि हो जाएगी और तेल आयात करने वाले देशों विशेष कर यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जिन्हें शीत ऋतु के आगमन के कारण तेल की अधिक ज़रूरत है। ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों का दूसरा पैकेज ट्रम्प प्रशासन के लिए सबसे बड़ा इम्तेहान है और अब तक जो चिन्ह दिखाई दे रहे हैं उनके हिसाब से इन प्रतिबंधों की विफलता की संभावना उनकी सफलता से बहुत कम है।

 

अतवान ने लिखा है कि जब अमरीकी सरकार यह घोषणा करती है कि आठ देशों को इन प्रतिबंधों से छूट हासिल है तो उसका अर्थ यही है कि ईरान के तेल निर्यात को शून्य तक पहुंचाने की ट्रम्प की धमकी मानसिक युद्ध के लिए केवल एक आवाज़ के बम समान थी और ईरान का तेल निर्यात पहले से कुछ कम मात्रा में जारी रहेगा। यह प्रतिबंधों की पराजय का पहला अहम चिन्ह है। ईरान के ख़िलाफ़ तेल के प्रतिबंधों से जिन देशो। को छूट दी गई है वे वही हैं जिन्होंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे इन प्रतिबंधों का पालन नहीं करेंगे। चीन, भारत, तुर्की और यूरोपीय संघ ईरान के तेल के सबसे बड़े ग्राहकों में से हैं और जैसा कि अभी से स्पष्ट है, इस टकराव में ट्रम्प को मात हो गई है और वे इन देशों की धमकियों से सहमे हुए हैं।

 

अरबी समाचारपत्र रायुल यौम के प्रधान संपादक अब्दुल बारी अतवान ने लिखा है कि अमरीका की धमकियां बड़ी तेज़ी से अपना प्रभाव खोती जा रही हैं। इन्हीं प्रतिबंधों के कारण क्षेत्र और उससे बाहर के बड़े देश जैसे रूस,चीन, भारत, यूरोपीय संघ और तुर्की वैश्विक अर्थव्यवस्था में डाॅलर के प्रभुत्व के मुक़ाबले में मोर्चा खोल चुके हैं और वे रुब्ल, युवान, यूरो, रुपया और येन इत्यादि जैसी राष्ट्रीय मुद्राओं में लेन-देन कर रहे हैं। रूस ने एक अहम फ़ैसले के अंतर्गत कहा है कि वह माॅस्को द्वारा निर्यात किए जाने वाले हथियारों की क़ीमत अपनी करेंसी में लेगा। इस शैली का उसका हालिया समझौता भारत के साथ था जिसमें उसने इस देश को एस-400 मीज़ाइल सिस्टम बेचने पर सहमति जताई है। चीन भी डाॅलर के अलावा अन्य मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन शुरू कर चुका है जबकि यूरोपीय संघ एक नई व्यवस्था पर काम कर रहा है जिसके अंतर्गत यूरो में लेन-देन किया जा सके।

 

अतवान ने आगे लिखा है कि यह ठीक है कि ट्रम्प ने ईरान के तेल पर प्रतिबंध से तेल के निर्यात में होने वाली कमी की भरपाई के लिए सऊदी अरब से आशा लगा रखी है लेकिन उनकी यह आशा ठोस नहीं है क्योंकि सऊदी अरब फ़ौरन इस कमी की भरपाई की क्षमता नहीं रखता जबकि सर्दियों में रूस का तेल उत्पादन भी पांच लाख बैरल प्रति दिन कम हो जाता है। वास्तविकता यह है कि ईरान पिछले चालीस साल से विभिन्न प्रतिबंधों के साथ जीवन बिताता आया है और उसने इन प्रतिबंधों को अवसरों में बदल कर आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है और एक क्षेत्रीय सुपर पाॅवर बन चुका है। इस बार भी उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंध सफल नहीं रहेंगे और वह इन्हें अपने हित में इस्तेमाल करेगा जबकि मध्यपूर्व और संसार में अमरीका के कुछ दुश्मन पैदा हो जाएंगे। अमरीका व उसके घटक एक अंधेरी सुरंग में घुस गए हैं जिसमें से वे अत्यंधिक घाव उठा कर और पराजित हो कर ही बाहर निकलेंगे। इस पराजय में इस्राईल व उसके घटक भी शामिल होंगे।


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