मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता अमेरिका हैः ईरान

मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता अमेरिका हैः ईरान

26 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में ईरान के बारे में सुरक्षा परिषद की बैठक होने वाली है।

संयुक्त राष्ट्रसंघ में ईरानी दूतावास ने एक विज्ञप्ति जारी करके घोषणा की है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता है और अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वह एकपक्षीय रूप से सुरक्षा परिषद का दुरुपयोग कर रहा है।

राष्ट्रसंघ में ईरानी दूतावास ने बुधवार को राष्ट्रसंघ में अमेरिकी राजदूत निकी हिली के बयान की प्रतिक्रिया में कहा कि अमेरिका सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता का दुरुपयोग करता है और इस समय वह इस परिषद का अध्यक्ष होने के नाते अपने एकपक्षीय फैसलों को इस परिषद पर थोपने की चेष्टा में है और इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ज़ोर- ज़बरदस्ती समझा जाता है।

26 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में ईरान के बारे में सुरक्षा परिषद की बैठक होने वाली है।

इस बात का फैसला उस समय किया गया है जब ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाने के बाद ईरान से अमेरिका की शत्रुता और अधिक हो गयी है।

ट्रंप हर अवसर का लाभ उठाकर ईरान को पश्चिम एशिया में संकट उत्पन्न करने और अस्थिरता फैलाने का ज़िम्मेदार बताने का प्रयास करते हैं और ईरानोफोबिया की नीति को हवा देकर वह अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की चेष्टा में हैं।

ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते से अमेरिका का एक पक्षीय रूप से निकल जाना और क्षेत्र में ईरान की रचनात्मक भूमिका को परिवर्तित करने के लिए प्रयास ट्रंप और उनके घटकों के संयुक्त लक्ष्य हैं। अमेरिकी राजनेता हर कुछ समय पर ईरान के खिलाफ निराधार दावे करते हैं।

इस प्रकार वे जायोनी शासन द्वारा फिलिस्तीन की अतिग्रहित भूमियों से जनमत का ध्यान हटाना चाहते हैं ताकि ग़ैर कानूनी जायोनी शासन और अरब देशों के मध्य सहकारिता कराके इस ग़ैर कानूनी शासन की सुरक्षा को सुनिश्चित बना सकें।

इसके अतिरिक्त अमेरिका ईरान से सहकारिता खत्म कर लेने हेतु विभिन्न देशों को डरा रहा है। उसका यह एकपक्षीय रवइया विश्व की शांति व सुरक्षा के लिए गम्भीर ख़तरा है।

ट्रंप सरकार ईरान पर जो दबाव डाल रही है वह तेहरान से वाशिंग्टन की शत्रुता को दर्शाता है। ईरान से अमेरिका की शत्रुता का एक मुख्य कारण यह है कि ईरान एक स्वतंत्र व स्वाधीन देश के रूप में अमेरिका की वर्चस्ववादी नीतियों के मार्ग की सबसे बड़ी रुकावट बन गया है।

ईरान कई हज़ार वर्षों पुरानी सभ्यता का स्वामी और विश्व में शांतिप्रेमी देश है और उसकी रचनात्मक भूमिका को बदलने के लिए किये जाने वाले प्रयासों का लक्ष्य शत्रुता के अलावा कुछ और नहीं है जो ट्रंप के शासन काल में अपने चरम पर पहुंच गयी है।

इस समय ट्रंप सरकार तेहरान के खिलाफ जो कुछ कर रही है वह दुश्मनी और ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के अलावा कुछ नहीं है किन्तु इन सबके बावजूद इस्लामी गणतंत्र ईरान गत चालिस वर्षों से अमेरिका के मुकाबले में एक कदम भी पीछे नहीं हटा और दिन- प्रतिदिन क्षेत्रीय स्तर पर उसकी शक्ति व प्रभाव में वृद्धि होती गयी। 


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