परमाणु समझौते में अमरीका अलग थलग, यूरोप ईरान के साथ

परमाणु समझौते में अमरीका अलग थलग, यूरोप ईरान के साथ

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि अमरीका जिस प्रकार परमाणु समझौते से बुरी तरह अलग थलग पड़ गया उस तरह किसी दूसरे क्षेत्र में नहीं पड़ा।

श्री जवाद ज़रीफ़ ने ईरान के टीवी चैनल टू से बात करते हुए कहा कि एेसा प्रतीत होता है कि यूरोप केवल ईरान की वजह से परमाणु समझौते का समर्थन नहीं करता बल्कि वह इस परिणाम पर पहुंचा है कि एेसा नहीं हो सकता कि एक व्यक्ति अपने व्यक्तिगत हितों के आधार पर पूरी दुनिया के लिए फ़ैसला करे।

ईरान के विदेशमंत्री ने इसी के साथ यह भी कहा कि परमाणु समझौते की रक्षा के लिए यूरोप की ओर से की जाने वाली कार्यवाहियां सकारात्मक हैं किन्तु पर्याप्त नहीं हैं, यूरोप को चाहिए कि वह अमरीकी प्रतिबंधों के मुक़ाबले में अपनी कंपनियों का समर्थन करें और आवश्यक ख़र्च देकर व्यवाहरिक कार्यवाही करें।

परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद, इस अंतर्राष्ट्रीय समझौते की रक्षा के लिए यूरोप की वचनबद्धता काफ़ी है किन्तु व्यवाहरिक रूप से यूरोप की कार्यवाहियां संतोषजनक नहीं हैं। ईरान के साथ सहयोग जारी रखने वाली कंपनियों की शंकाओं को दूर करना,बैंकिंग संबंधों की स्थापना तथा ईरान के तेल की बिक्री, वह तीन कार्यवाहियां है जिसने परमाणु समझौते में यूरोप को ज़िंदा रखा है।

परमाणु समझौते की रक्षा, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूरोप की स्वाधीनता का विषय भी है। दुनिया की कूटनीति के लिए परमाणु समझौते का बाक़ी रहना इतना अधिक महत्वपूर्ण है कि रूस के राष्ट्रपति विलादीमीर पुतीन ने पिछले रविवार को राष्ट्रपति रूहानी से मुलाक़ात में कहा परमाणु समझौते को महत्वपूर्ण और अंतर्राष्ट्रीय समझौता क़रार देते हुए कहा कि परमाणु समझौते से अमरीका के एकपक्षीय रूप से निकल जाने के बाद समस्त पक्षों के लिए ज़रूरी है कि वह इसकी रक्षा करें और इसको मज़बूत बनाएं।


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