ईरान ने अहवाज़ हमले के शहीदों का इंतेक़ाम दाइश से क्यों लिया?

ईरान ने अहवाज़ हमले के शहीदों का इंतेक़ाम दाइश से क्यों लिया?

गत 22 सितम्बर की सुबह जब पूरे ईरान में सशस्त्र बलों की परेड का कार्यक्रम चल रहा था अचानक मीडिया में ख़बर आई कि अहवाज़ नगर में होने वाली परेड पर सैनिकों के भेस में आए पांच आतंकियों ने हमला कर दिया।

इस हमले में लगभग 100 सैनिक और आम नागरिक शहीद और घायल हो गए। वहां मौजूद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्यवाही में पांचों आतंकियों को ढेर कर दिया।

इस हमले के बाद क्षेत्र के आतंकी संगठनों विशेष रूप से अलअहवाज़िया नामक संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की। संगठन के प्रवक्ता याक़ूब हुर अत्तुसतरी ने रोयटर्ज़ तथा अन्य संचार मध्यमों से संपर्क करके कहा कि यह हमला उसके संगठन ने अंजाम दिया है। जब ईरानी सशस्त्र बलों ने अपने बयानों में कहा कि हमले का इंतेक़ाम लिया जाएगा तो अलअहवाज़िया संगठन के कुछ तत्वों ने आतंकी हमले में अपना हाथ होने का इंकार करना शुरू कर दिया।

मगर कुछ घंटों के बाद आमाक़ नामक वेबसाइट ने जिसे दाइश से संबंधित माना जाता है अपने टेलीग्राम चैनल पर एक सुरक्षा सूत्र के हवाले से रिपोर्ट दी कि दाइश की विशेष फ़ोर्स ने दक्षिण पश्चिमी ईरान के अहवाज़ नगर का हमला अंजाम दिया है।

यहां यह देखना ज़रूरी था कि इस हमले की ज़िम्मेदारी कभी अलअहवाज़िया और कभी दाइश द्वारा स्वीकार किए जाने के इस पूरे प्रकरण के पीछे कौन लोग हैं? क्या अलअहवाज़िया संगठन के पास इतनी ताक़त है कि ईरान में इस प्रकार का हमला अंजाम दे सके या नहीं? सशस्त्र फ़ोर्सेज़ की संयुक्त कमान के वरिष्ठ अधिकारी जनरल अबुल फ़ज़्ल शिकारी ने इस सवाल के जवाब में कहा कि अलअहवाज़िया संगठन के पास इतनी ताक़त नहीं है कि ईरान के ख़िलाफ़ इस प्रकार का हमला अंजाम दे सके।

यह आतंकी संगठन इस इलाक़े में वैसे तो टुकड़ों में बंटे हुए हैं लेकिन इस्राईल और अमरीका के हितों की रक्षा करना और उनके हितों को नुक़सान पहुंचाने वाले प्रतिरोधक मोर्चे को निशाना बनाना उनका संयुक्त लक्ष्य है। इसी प्रकार इनमें एक समानता यह भी है कि सऊदी अरब और इमारात सहित क्षेत्र के रूढ़िवादी अरब देशों से उनकी आर्थिक और सामरिक मदद होती है। इन संगठनों का प्रतीक दाइश है।

अहवाज़ का हमला हुआ तो ईरान की फ़ोर्सेज़ ने और सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने यह कहा कि आतंकियों के कान एंठें जाएंगे और उन्हें दंडित किया जाएगा। अब सवाल यह था कि ईरान के सशस्त्र बल अहवाज़ के शहीदों का इंतेक़ाम किस आतंकी संगठन से लेंगे? अलअहवाज़िया से या दाइश से? यह बात साफ़ है कि दाइश से इंतेक़ाम लेना सभी आतंकी संगठनों से इंतेक़ाम लेने के समान है और आतंकवाद के प्रतीक दाइश की कमर तोड़ना अन्य संगठनों की भी कमर तोड़ देने के समान है।

सोमवार को तड़के पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स आईआरजीसी के वायु व अंतरिक्ष विभाग के मिसाइल युनिट ने सतह से सतह पर मार करने वाले छह बैलिस्टिक मिसाइल सीरिया में फ़ुरात नदी के पूर्वी भाग में स्थित आतंकी ठिकानों पर फ़ायर किए और अहवाज़ नगर की जनता की इंतेक़ाम की मांग पूरी की।

आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि 22 सितम्बर की आतंकी घटना के बाद जिसमें 25 लोग शहीद और 69 घायल हुए थे आईआरजीसी ने ईश्वर की मदद से ईरानी जनता और शहीदों के प्रतिनिधित्व में तथा सुप्रीम कमांडर के निर्देश का पालन करते हुए सीरिया में अमरीका तथा क्षेत्र के धनकुबेरों द्वारा समर्थित आतंकियों के ठिकानों पर मिसाइल हमला किया।

इस हमले में पांच सौ से अधिक मिलोमीटर दूरी तय करके मिसाइलों ने अपने लक्ष्य को ध्वस्त किया है तथा ड्रोन विमानों ने ऊपर से आग बरसाई है। यह आतंकियों के साथ साथ उनके समर्थकों के लिए भी गंभीर संदेश है कि ईरान की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की कोशिश न करें।


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