ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के बाेर में निराधार दावे

ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के बाेर में निराधार दावे

अमरीकी राष्ट्रपति आरंभ से परमाणु समझौते को एक बुरा समझौता कहते आए हैं। ट्रम्प ने यह बात अपने चुनावी अभियान के दौरान भी कही और अमरीका का राष्ट्रपति बनने के बाद इसे कई बार दोहराया अंततः 8 मई 2018 को वे एकपक्षीय रूप में जेसीपीओए से निकल गए।

परमाणु समझौते या जेसीपीओए से निकलने की दलील पेश करते हुए ट्रम्प ने कहा था कि यह समझौता, अमरीका के हितों की पूर्ति नहीं करता।  ट्रम्प यह बात नहीं कह सके कि ईरान, परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध नहीं रहा है।  इसका कारण यह है कि यह सर्वविदित है कि तेहरान, परमाणु समझौते के प्रति आरंभ से ही कटिबद्ध रहा है।

हालांकि अमरीका को भलीभांति पता है कि ईरान ने जेसीपीओए के संबन्ध में पूरी तरह से सहकारिता की है इसीलिए उसने अब ईरान के विरुद्ध निराधार आरोपों का सहारा लेना शुरू किया है।  इसी संबन्ध में अमरीकी विदेशमंत्री पोम्पियो ने ट्वीट किया है कि जेसीपीओए टूट चुका है जिसे छोड़ देना चाहिए।  उन्होंने कहा कि इसका कारण यह है कि यह समझौता, उन्हीं के कथनानुसार, ईरान के परमाणु हथियारों तक पहुंच के सारे रास्तों को बंद नहीं कर सका।  अमरीकी विदेशमंत्री का यह बयान एेसी स्थिति में आया है कि जब ईरान बारंबार एलान कर चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूर्ण रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी आईएईए अपनी 12 रिपोर्टों में इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है।  आईएईए के महानिदेशक यूकियो अमानो भी कह चुके हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लेशमात्र भी अपने मार्ग से दिगभ्रमित नहीं हुआ है।  आईएईए के महानिदेशक की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण होने की पुष्टि के बावजूद अमरीका के साथ इस्राईल भी पुराना राग अलाप रहे हैं।  नेतनयाहू दावा कर चुके हैं कि ईरान ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर के बाद बहुत सी परमाणु फाइलों को छिपाने का प्रयास किया है।  इस बात से नेतनयाहू का उद्देश्य यह था कि वह दुनिया को यह विश्वास दिलवाएं कि ईरान के पास कोई गोपनीय परमाणु कार्यक्रम है।

हालांकि ट्रम्प ने तो नेतनयाहू के दावे का स्वागत किया किंतु अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी जैसी वैश्विक संस्था ने इस दावे को कोई महत्व ही नहीं दिया।  अब अमरीकी विदेशमंत्री पोम्पियो ने फिर उसी घिसी-पिटी बात को दोहराया है जो आरंभ से निराधारा साबित हुई है।


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