ईरान के विरूध्द ट्रम्प और नेतन्याहू के रच रहे हैं साझा षड़यंत्र।

  • News Code : 811968
  • Source : विलायत पोर्टल
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ज़ायोनी शासन ने ४ सप्ताह पहले फिलिस्तीनी भूमि में ६ हज़ार आवासीय इकाईयां तथा एक कालोनी बनाने का ऐलान किया था जिसकी विश्व समुदाय ने कड़े शब्दों में निंदा की थी भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने भी इसे शांति के लिए खतरा बताया था ।

कल दुनिया बहुत बदल चुकी होगी और यह अत्यंत क़रीब है। यह बोल है ज़ायोनी प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू के। जब उसने पेरिस में हुए शांति सम्मेलन को कोई महत्व न देते हुए ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह को ही विशेष महत्व दिया था।
नया विश्व जिसके निर्माण का सपना ट्रम्प और नेतन्याहू देख रहे है ओबामा कार्यकाल के खंडरों पर खड़ा होगा जिसमे इस्राईल और अमेरिका के सम्बन्ध पहले से अधिक गहरे होंगे। ओबामा ने व्हाइट हाउस छोड़ते समय अमेरिका की इस्राईल को यथासम्भव सहायता एंव संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को वीटो करने की परम्परा को तोड़ दिया था। जिससे ज़ायोनी प्रधानमंत्री ने क्रोधित होकर बयान दिया था कि वह ट्रम्प के सत्ता सम्भालने से प्रसन्न हैं तथा अपनी कैबिनेट में बयान दिया कि हम एक दूसरे को बहुत समय से जानते है लेकिन यह पहला अवसर है जब हम एक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के रूप में भेंट करेंगे।
ईरान परमाणु समझौता, अमेरिकी दूतावास का बैतुलमुक़द्दस स्थान्तरण ट्रम्प और नेतन्याहू की इस भेंट के स्वभाविक मुद्दे होंगे। नेतन्याहू ने ईरान परमाणु समझौते का विरोध करते हुए संयुक्त राष्ट्र में कहा कि यह समझौता ईरान को परमाणु बम बनाने में सहायक होगा। उसने अमेरिकी कांग्रेस में भी ओबामा से बिना कोई तालमेल बनाये ईरान विरोधी बयान दिया तथा ईरान को इस्राईल के लिए खतरा बताते हुए कहा कि ईरान का उद्देश्य इस्राईल को नष्ट करना है। नेतन्याहू को आशा है कि ईरान पर नए प्रतिबन्ध लगाने वाला ट्रम्प ईरान के विरुद्ध अच्छा सहयोगी साबित होगा।
ज़ायोनी शासन ने ४ सप्ताह पहले फिलिस्तीनी भूमि में ६ हज़ार आवासीय इकाईयां तथा एक कालोनी बनाने का ऐलान किया था जिसकी विश्व समुदाय ने कड़े शब्दों में निंदा की थी।
भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने भी इसे शांति के लिए खतरा बताया था। संयुक्त राष्ट ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन बताते हुए असंवैधानिक कहा था। वीटो पावर अमेरिका ने भी इस मुद्दे पर हुई वोटिंग में भाग नहीं लिया था जिसके बाद ज़ायोनी शासन ने अमेरिका और ओबामा को विश्वासघाती कहा था। लेकिन ट्रम्प ने अवैध निर्माण के समर्थक डेविड फ्रेडमैन को इस्राईल में अपना राजदूत नियुक्त करते हुए एक इस्राईली पेपर को दिए साक्षात्कार में कहा कि में उन लोगों में नहीं हूँ जो यह सोचते हैं के अवैध निर्माण शांति की राह में बाधा हैं।
विश्व समुदाय फिलिस्तीन संकट का समाधान दो सत्ता केंद्र को समझता है जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति भी मानते आये है लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इस्राईल का अवैध निर्माण इस शांति प्रक्रिया के आडे आ रहा है। नेतन्याहू ने सुलह की प्रक्रिया का काम अपने दामाद के हवाले किया है जिसको विदेश नीति का तनिक भी ज्ञान नहीं है। कट्टरवादी ज़ायोनी पार्टियों का पश्चिमी तट को हथियाने का षड्यन्त्र इस संकट के समाधान में बाधा तथा फिलिस्तीनियों में आशंकाओं को जन्म देता है।
ज़ायोनी नेता ने कहा था कि अमेरिका समेत दूसरे देशों को बैतुल मुकद्दस में अपने दूतावासों को स्थान्तरित कर देना चाहिए बैतुलमुक़द्दस में दूतावास अर्थात उसे ज़ायोनी राजधानी के रूप में मान्यता देना जबकि संयुक्त राष्ट्र कह चुका है कि पूर्वी यरूशलम फिलिस्तीन राष्ट्र की राजधानी है। ज्ञात रहे ट्रम्प ने अपने चुनाव अभियान में वादा किया था कि वह अमेरिकी दूतावास को तिल अवीव से यरूशलम स्थान्तरित करेंगे। ट्रम्प इस्राईल और उन अरब देश प्रमुखों में बहुत लोकप्रिय है जिन्हें लगता था कि ओबामा ने उन्हें किनारे लगा दिया है। इन राष्ट्र प्रमुखों ने ट्रम्प से निवेदन किया है कि वह कोई ऐसा निर्णय लेने से बचे जिस से अरब जगत उनके विरुद्ध सड़कों पर उतर आये ।


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