ईरान की शक्ति केवल एक नारा नहीं बल्कि एक वास्तविकता हैः वरिष्ठ नेता

ईरान की शक्ति केवल एक नारा नहीं बल्कि एक वास्तविकता हैः वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्लामी लोकतंत्र की शक्ति के बारे में कहा कि ईरान की शक्ति यही है कि उसने देश को अमरीका और ब्रिटेन के वर्चस्व से निकाल दिया।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने तेहरान के आज़ादी स्टेडियम में स्वयं सेवी बलों के एक लाख से अधिक लोगों के भव्य समूह को संबोधित किया।

वरिष्ठ नेता ने तेहरान के आज़ादी स्टेडियम में स्वयं सेवी बल बसीज के एक लाख से अधिक जवानों व कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान की शक्ति केवल एक नारा नहीं बल्कि एक वास्तविकता है और दुनिया का हर न्यायप्रिय व्यक्ति, ईरानी राष्ट्र की महानता को स्वीकार करता है जबकि दुश्मन ईरान की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में प्रगति से बहुत अधिक परेशान व चिंतित हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि तेहरान ने इराक द्वारा ईरान पर थोपे गये आठ वर्षीय युद्ध में बड़ी शक्तियों को विफलता और पराजय का कटु स्वाद चखाया है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज हमारे भाषण का संक्षेप यह है कि पहले ईरान की महानता है, दूसरे इस्लामी गणतंत्र ईरान की शक्ति और तीसरा ईरानी राष्ट्र का अजेय होना है।

उनका कहना था कि यह कोई अतिश्योक्ति नहीं है, यह केवल कोई नारा नहीं है, यह कोई खोखला या बेकारा का दावा नहीं है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्लामी लोकतंत्र की शक्ति के बारे में कहा कि ईरान की शक्ति यही है कि उसने देश को अमरीका और ब्रिटेन के वर्चस्व से निकाल दिया, उस वर्चस्व से निकाल दिया जो 19वीं शताब्दी के आरंभ से शुरु हुआ था और देश के समस्त मामलों पर निर्दयी विदेशी छाए हुए थे।

इस्लामी गणतंत्र की यही शक्ति है कि उसने देश को अत्याचारी वर्चस्व से मुक्ति दिला दी।

ईरानी राष्ट्र के शत्रुओं ने ईरान को घुटने टेक देने के लिए गत चार दशकों के दौरान हर रास्ते का परीक्षण कर लिया परंतु उन्हें किसी भी रास्ते में सफलता नहीं मिली और विफलता ही उनके हाथ लगी।

इस समय ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

बहरहाल ईरान की इस्लामी व्यवस्था को गत चालिस वर्षों से दुश्मनों की ओर से खड़ी की जा रही विभिन्न प्रकार की समस्याओं व बाधाओं का सामना रहा है पर वह इन समस्याओं का सामना करते हुए हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है और इस समय ईरानी राष्ट्र एसे स्थान पर पहुंच चुका है कि शत्रु उस पर हमला करने का दुस्साहस नहीं कर सकते और क्षेत्र एवं विश्व के राष्ट्रों के मध्य ईरान को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्रसंघ की महासभा के वार्षिक अधिवेशन के अवसर पर ईरानी राष्ट्र और परमाणु समझौते के संबंध में विभिन्न देशों के राजनेताओं के बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।


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