ईरान की मिसाइल शक्ति पर बात करते हुए कांपने लगे इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मुसाद के निदेशक

ईरान की मिसाइल शक्ति पर बात करते हुए कांपने लगे इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मुसाद के निदेशक

इस्राईल में वैसे तो बहुत से विशेषज्ञ और टीकाकार इस्लामी गणतंत्र ईरान की मिसाइल शक्ति के बारे में बयान देते रहते हैं लेकिन जब इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मुसाद के निदेशक ने पिछली सारी परम्पराओं को तोड़ते हुए ईरान की मिसाइल शक्ति के बारे में बयान दिया तो इससे इस्राईल अर्थात अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में बसने वालों में एक नया भय फैल गया है।

मुसाद का प्रमुख इस्राईली प्रधानमंत्री के अधीन काम करता है और वह प्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री को ही जवाबदेह होता है। मुसाद के प्रमुख यूसी कोहेन को इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू के क़रीबियों में गिना जाता है और इसी लिए शायद उन्होंने अपनी दोस्ती का लाभ उठाते हुए मीडिया में आकर बयान दिया है। दूसरी वजह यह भी हो सकती है कि इस्राईली प्रधानमंत्री इस समय सारी दुनिया में ढिंढोरा पीट रहे हैं कि ईरान बहुत ख़तरनाक देश है और उससे पूरे इलाक़े को बहुत गंभीर ख़तरा है। यही प्रचार अमरीकी सरकार के अधिकारी भी कर रहे हैं। इस प्रचार के पीछे एक चाल यह है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस को कठोर सज़ा से बचाया जा सके। मामला यह है कि वरिष्ठ पत्रकार की हत्या के मामले में मुहम्मद बिन सलमान के क्राउन प्रिंस के पद से हटा दिए जाने की संभावना पैदा हो गई है और यह चीज़ ट्रम्प प्रशासन और नेतनयाहू की सरकार दोनों के लिए बड़े नुक़सान वाली बात होगी क्योंकि दोनों ही सरकारों ने मुहम्मद बिन सलमान को सऊदी अरब की राजगद्दी के क़रीब लाने में विशेष भूमिका अदा की है अब यदि उनसे पद छिन जाता है तो मुहम्मद बिन सलमान से अमरीकी प्रशासन और इस्राईली सरकार ने जो आशाएं लगा रखी थीं उन पर पानी फिर जाएगा।

इसी लक्ष्य के तहत ईरान के ख़तरे को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है और सऊदी अरब के बारे में यह प्रचार किया जा रहा है कि ईरान के ख़तरे को रोकने में सऊदी सरकार अमरीका की विश्वसनीय घटक है।

इसी मिशन को आगे बढ़ाते हुए मुसाद के प्रमुख ने ईरान की मिसाइल शक्ति के बारे में मीडिया में आकर बयान दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि ईरान क्षेत्र के हर भाग में पहुंचने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना था कि हिज़्बुल्लाह के माध्यम से ईरान इस समय लेबनानी सीमा पर मौजूद है, वह सीरिया में पूरी शक्ति के साथ मौजूद है, तथा इराक़ में राजनैतिक और सामरिक रूप से ईरान की पैठ बनती जा रही है। कोहेन ने कहा कि इस्राईल के ज़रूरी है कि वह ईरान को मध्यपूर्व से बाहर निकाले।

हालांकि असली मामला यह है कि इस्राईल ग़ैर क़ानूनी शासन है जिसे फ़िलिस्तीन की धरती पर ग़ैर क़ानूनी रूप से क़ब्ज़ा करके बनाया गया है। अब चूंकि इस्राईल और उसके समर्थकों के ख़िलाफ़ पूरे मध्यपूर्व के क्षेत्र में ज़बरदस्त प्रतिरोध चल रहा है इसलिए इस्राईली को अच्छी तरह समझ में आ गया है कि उसकी ग़ैर क़ानूनी क़ब्ज़ा धीरे धीरे ख़तरे में पड़ता जा रहा है अतः इस्राईल के सामने अनेक समस्याएं पैदा होने वाली हैं क्योंकि इस्राईल और अमरीका का विरोध करने वाली शक्तियां पूरे मध्यपूर्व में ईरान की वजह से मज़बूत हो रही हैं। यदि यह शक्तियां इसी तरह मज़बूत होती रहीं तो वह दिन दूर नहीं कि जब इस्राईल का अस्तित्व ही ख़तरे में पड़ जाएगा।

यही वजह है कि अमरीका इस्राईल और उनके घटक यह कोशिश कर रहे हैं कि सारी दुनिया को ईरान के ख़िलाफ़ उत्तेजित करें और ईरान को इलाक़े ही नहीं बल्कि सारी दुनिया के लिए ख़तरे के रूप में ज़ाहिर करें।

इस्लामी गणतंत्र ईरान की सैद्धांतिक नीति यह है कि पश्चिमी एशिया के इलाक़े में लंबे समय से पांव पसारे बैठी साम्राज्यवादी शक्तियों को इस इलाक़े से बाहर कर देना है क्योंकि यह शक्तियां हमेशा संकट खड़ा करती रहती हैं और क्षेत्र को देशों को उलझाए रखना चाहती हैं ताकि साम्राज्यवादी शक्तियों की अवैध गतिविधियों की ओर किसी का ध्यान केन्द्रित न होने पाए।

इस्लामी गणतंत्र ईरान अपनी नीति में कामयाब रहा ईरान ने क्षेत्र के अन्य देशों की जनता के मन में यह बात सफलता के साथ बिठा दी है  बाहरी शक्तियों के कारण समस्याएं बढ़ने के अलावा और कुछ हासिल होने वाला नहीं है।


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