इमाम हुसैन (अ) का रास्ता इज़्ज़त व सम्मान का रास्ता है: आयतुल्लाह नूरी हमदानी

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आयतुल्लाह नूरी हमदानी ने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का नारा "हैहात मिन्नज़ ज़िल्ला" अर्थात अपमान को स्वीकार नहीं करेंगे चाहे जान ही देनी पड़े।

अबनाः आयतुल्लाह नूरी हमदानी ने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का नारा "हैहात मिन्नज़ ज़िल्ला" अर्थात अपमान को स्वीकार नहीं करेंगे चाहे जान ही देनी पड़े। मकतब है और मौजूदा समय में दुनिया में शिया हुकूमतों को छोड़ अन्य इस्लामी सरकारों के लिये यह विचारधारा स्वीकार्य नहीं है।
शियों के मरजा-ए-तक़लीद आयतुल्लाह नूरी हमदानी ने 16 मई को दागिस्तान निवासी दो शिया प्रचारकों से मुलाकात के दौरान कहा कि जो व्यक्ति अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम की शिक्षाओं के प्रचार के लिए संघर्ष कर रहे हैं अल्लाह के निकट उनका बहुत अधिक सम्मान हैं।
उन्होंने उन्होंने यह भी कहा है कि शिया पीड़ित हैं, तो दूसरे देशों में शियों को इस तरह धर्म और संस्कऋति का प्रचार करना चाहिए कि सरकारें नाराज न हों और आपके लिए कोई कठिनाई पैदा नहीं।
आयतुल्लाह नूरी हमदानी ने गैर शिया देशों में शिया संस्कृति को स्वीकार न करने के कारण की ओर इशारा करते हुए कहा है कि शिया संस्कृति में अत्याचार के विरूद्ध विरोध करने की विचारधारा है जिसके कारण उन्हें मुश्किल का सामना करना पड़ता है और शियों को बहुत भी ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
शियों के मरजा तक़लीद  नेआख़िर में कहा  कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का नारा "हैहात मिन्नज़ ज़िल्ला" अर्थात अपमान को स्वीकार नहीं करेंगे चाहे जान ही देनी पड़े। मकतब है और मौजूदा समय में दुनिया में शिया हुकूमतों को छोड़ अन्य इस्लामी सरकारों के लिये यह विचारधारा स्वीकार्य नहीं है।


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