अमरीकी विदेश मंत्री से क्यों नहीं मिलना चाहते डाक्टर ज़रीफ़?

अमरीकी विदेश मंत्री से क्यों नहीं मिलना चाहते डाक्टर ज़रीफ़?

ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ इस समय सिंगापुर की यात्रा पर हैं। इस यात्रा में उन्होंने आसेआन के साथ फ़्रेन्डशिप ट्रीटी पर हस्ताक्षर किए।

दूसरी ओर अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो भी सिंगापुर की यात्रा पर हैं। इस बीच यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि जब अमरीका और ईरान के विदेश मंत्री एक ही समय पर सिंगापुर की यत्रा कर रहे हैं तो क्या दोनों के बीच कोई बातचीत भी हो सकती है।

जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि अमरीका के विदेश मंत्री से मुलाक़ात की कोई योजना नहीं है। जवाद ज़रीफ़ का कहना था कि अमरीकी अधिकारियों से हमारी मुलाक़ातें बहुत हो चुकी हैं। दो साल से अधिक समय तक अमरीकियों से हमारी लगातार बातचीत और मुलाक़ातें होती रहीं मगर वर्तमान अमरीकी सरकार ने साबित कर दिया कि वह अपनी प्रतिबद्धताओं का भी पालन नहीं करता अतः इस स्थिति में अमरीकी अधिकारियों से मुलाक़ात अर्थहीन है।

अमरीका ने ईरान को धमकियां दीं और परमाणु समझौते से बाहर निकल कर ईरान पर प्रतिबंध लगाने की बात कही। इसका सऊदी अरब जैसे कुछ देशों ने बहुत स्वागत किया मगर इन देशों को तब गहरा झटका लगा जब अमरीका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने अचानक यह बयान दे दिया कि वह ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी तथा अन्य अधिकारियों से मुलाक़ात के लिए तैयार हैं और इस मुलाक़ात की कोई शर्त भी नहीं है।

ईरान की धमकियां देने की नतीजे में अमरीका ने सऊदी अरब और इमारात जैसे देशों से पैसा वसूला और साथ ही लगातार इन देशों का यह कह कर अपमान किया कि वह दूध देने वाली गाय हैं। ट्रम्प ने कहा कि यदि अमरीका का समर्थन न रहे तो यह सरकारें एक हफ़्ता भी नहीं टिक पाएंगी और अरब शासकों को इकानोमी क्लास में बैठकर भागना पड़ेगा।

इस तरह यदि देखा जाए तो अमरीका ने ईरान के संबंध में अपनी नीतियों को अरब देशों का दोहन करने के लिए इस्तेमाल किया लेकिन साथ ही साथ ईरान ही नहीं सारी दुनिया के लिए यह साबित कर दिया कि अमरीका पर हरगिज़ भरोसा नहीं किया जा सकता।

इस्लामी गणतंत्र ईरान शुरू से ही जानता है कि अमरीका भरोसे के लायक़ नहीं है और उसकी तरफ़ से हमेशा होशियार रहना चाहिए। ईरान का मानना है कि अमरीका से निपटने का यही तरीक़ा है कि उस पर किसी भी तरह से निर्भर न रहा जाए बल्कि अपने पांव पर खड़े होने की कोशिश की जाए।

रक्षा, विज्ञान, और आर्थिक क्षेत्रों सहित समस्त क्षेत्र में ईरान अपने पांव पर खड़ा है और अपने संसाधनों से विकास कर रहा है यही कारण है कि अमरीका तथा उसके घटक लाख कोशिश करने के बाद भी ईरान का विकास नहीं रोक सके हैं।

अमरीकी अधिकारियों के बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया से ईरानी अधिकारियों ने यह दर्शा दिया है कि तेहरान को कोई झांस नहीं दे सकता।
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