ट्रंप के निर्णय के विरोध में शिया विद्वानों की तीखी प्रतिक्रिया

ट्रंप के निर्णय के विरोध में शिया विद्वानों की तीखी प्रतिक्रिया

ज्ञात रहे कि अभी कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यरूशलम शहर, मुसलमानों के क़िबलए अव्वल की अवैध राष्ट्र इस्राइल की राजधानी के तौर पर घोषणा करते हुए अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरूशलम शिफ्ट करने की बात कही थी, जिस कारण समस्त इस्लामी जगत में आक्रोश में है।

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना : प्राप्त सूत्रों के अनुसार शिया विद्वानों ने ट्रंप के मूर्खतापूर्ण निर्णय की आलोचना करते हुए इसकी निंदा की है। उन्होंने इस्लामी जगत को संबोधित करते हुए कहा कि सभी मुसलमानों को इस ग़लत फै़सले पर खामोश नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरी शक्ति के साथ ज़ायोनियों और उनके सहयोगियों के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा मार देना चाहिए।
आयतुल्लाह उलउज़मा नूरी हमदानी ने मरकज़ अम्रबिलमारुफ़ व नही अनिल मुनकर के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि अब इस्राइल का पतन समीप है और इंशाल्लाह इस्लामी जगत से यह कैंसर का फोड़ा हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
आयतुल्लाह उलउज़मा जवाद आमली ने भी अपने दर्से  इख़लाक़ में बहरैन एवं फ़िलिस्तीन के हालात की सख्त आलोचना की एवं इस्लामी जगत से फिलिस्तीनियों के अधिकारों के लिए उठ खड़े होने को जरूरी बताया।
 इसी तरह  आयतुल्लाह उलउज़मा शुबैरी ज़ंजानी के दफ्तर से जारी किए गए बयान में ट्रंप के द्वारा यरुशलम को इस्राइल की राजधानी बताए जाने की आलोचना की गई, और साथ ही अवैध राष्ट्र इस्राइल को उसकी हद में रहने की नसीहत की गई है।
क़ुम और नजफ़ अशरफ़ के हौज़िया में मौजूद शीया विद्वानों ने ट्रंप के इस निर्णय की आलोचना करते हुए इसे मूर्खतापूर्ण राजनीति बताया।
ज्ञात रहे कि अभी कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यरूशलम शहर, मुसलमानों के क़िबलए अव्वल की अवैध राष्ट्र इस्राइल की राजधानी के तौर पर घोषणा करते हुए अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरूशलम शिफ्ट करने की बात कही थी, जिस कारण समस्त इस्लामी जगत में आक्रोश में है।



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