सुरक्षा परिषद में ट्रम्प फिर अकेले पड़े, बैठक छोड़ कर चले गए

सुरक्षा परिषद में ट्रम्प फिर अकेले पड़े, बैठक छोड़ कर चले गए

अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने ईरान और गुट पांच धन एक के बीच हुए परमाणु समझौते जेसीपीओए के संबंध में कि जिससे अमरीका निकल चुका है, बुधवार को ईरान के ख़िलाफ़ अपने पुराने इल्ज़ाम को फिर दोहराया।

ट्रम्प ने एक बार फिर ईरान पर देश से बाहर हिंसा व अराजकता फैलाने, आतंकवाद का समर्थन करने और परमाणु हथियार के निर्माण के लिए गोपनीय कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का इल्ज़ाम लगाया। ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों से अमरीका का साथ देने की अपील की लेकिन ट्रम्प की अपेक्षा के विपरीत सुरक्षा परिषद के स्थायी और ग़ैर स्थायी सदस्यों ने जेसीपीओए के संबंध में ट्रम्प के दृष्टिकोण के ख़िलाफ़ दृष्टिकोण अपनाया और कमोबेश सभी सदस्य इस समझौते के बाक़ी रहने के इच्छुक हैं जिससे अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा की सेवा हो रही है। यह वॉशिंग्टन की बहुत बड़ी हार समझी जा रही है कि सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य देशों ने जिनमें योरोपीय देश भी हैं जो अमरीका के भागीदार समझे जाते हैं और चीन व रूस जैसे देशों ने जो अमरीका के प्रतिस्पर्धी समझे जात हैं, ईरान के ख़िलाफ़ ट्रम्प के दावे के विरुद्ध दृष्टिकोण अपनाया और उनकी इच्छा के विपरीत जेसीपीओए के अंतर्राष्ट्रीय सहमति के प्रतीक के रूप में बाक़ी रहने पर बल दिया।

सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देश फ़्रांस के राष्ट्रपति ने ईरान की ओर से जेसीपीओए की पाबंदी किए जाने की ओर इशारा करते हुए कहा कि फ़्रांस जेसीपीओए के संबंध में अमरीका के व्यवहार के ख़िलाफ़ है। यहां तक कि ब्रिटेन ने जिसे अमरीका का रणनैतिक भागीदार समझा जाता है, ट्रम्प की अपेक्षा के विपरीत दृष्टिकोण अपनाया। ब्रितानी प्रधान मंत्री टेरीज़ा मे ने ईरान की ओर से परमाणु समझौते की पाबंदी होने की पुष्टि करते हुए कहा कि हम उस अंतर्राष्ट्रीय फ़्रेमवर्क को नहीं छोड़ सकते जिससे हमारी सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

वास्तव में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक अमरीका के एक बार फिर अलग थलग पड़ने और उसकी एकपक्षीय नीतियों की विफलता की सूचक थी। जो कुछ ट्रम्प ने सुरक्षा परिषद के स्थायी व ग़ैर स्थायी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों की ज़बानी सुना वह उनकी अपेक्षा के विपरीत था, शायद यही वजह है कि वह सुरक्षा परिषद की बैठक ख़त्म होने से पहले उसे छोड़ कर चले गए और उसकी अध्यक्षता यूएन में अपने देश की दूत निकी हेली को सुपुर्द करते गए।

अस्ल में ट्रम्प अपने दृष्टिकोण के विरुद्ध दृष्टिकोण बर्दाश्त नहीं कर पाते और यही चीज़ उनके साम्राज्यवादी मेज़ाज को दर्शाता है।


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