वाशिंग्टन रियाज़ पारम्परिक डील का अंत, ट्रम्प का नया फ़ार्मूलाः सुरक्षित रहना है तो तेल की क़ीमत कम करो!

वाशिंग्टन रियाज़ पारम्परिक डील का अंत, ट्रम्प का नया फ़ार्मूलाः सुरक्षित रहना है तो तेल की क़ीमत कम करो!

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने धीरे धीरे यह बात पूरी तरह साफ़ कर दी है कि वह सऊदी अरब की आले सऊदी सरकार का संरक्षण करेंगे तो इसके बदले में उससे क्या क़ीमत वसूल करेंगे।

यह क़ीमत अरबों डालर है, इतना ही नहीं ट्रम्प यह भी चाहते हैं कि सऊदी अरब के तेल व गैस उत्पादन की मात्रा तय करने और उसकी क़ीमतें निर्धारित करने में भी वाइट हाउस की मर्ज़ी चलनी चाहिए।

पूर्वी वर्जीनिया राज्य में भाषण देते हुए ट्रम्प ने जो कुछ कहा वह इस बात की साफ़ घोषणा है कि अमरीका अब पेट्रो डालर के बदले आले सऊद की सुरक्षा जारी नहीं रखेगा बल्कि इस शर्त पर इस सरकार को सत्ता में बाक़ी रहने देगा कि तेल और गैस का हर फ़ैसला वाइट हाउस की इच्छा के अनुसार हो।

इससे पहले सऊदी अरब और अमरीका का पारम्परिक समझौता था तेल के मुक़ाबले में सुरक्षा। यह समझौता फ़्रैंकलिन रोज़वेल्ट और नरेश अब्दुल अज़ीज़ के बीच वर्ष 1945 में अमरीका के क्वेन्सी नामक समुद्री जहाज़ पर हुआ था और इसी समझौते के आधार पर अमरीका ब्रिटिश साम्राज्य को हथिया कर फ़ार्स खाड़ी के देशों में मनमानी करने में कामयाब हो गया था अलबत्ता उसने आले सऊद शासन को यह आश्वासन दिया था कि उसकी तानाशाही सरकार की रक्षा करता रहेगा।

यह पारम्परिक समझौता अमरीका के राष्ट्रपति बाराक ओबामा के शासन काल में डांवाडोल होने लगा था क्योंकि आले सऊद शासन क्षेत्र में अपने युद्ध अमरीका से लड़वाने की योजना में काफ़ी आगे तक पहुंच गया था। सऊदी सरकार ने सीरिया, इराक़ और यमन में अमरीका को प्रयोग करने का प्रयास किया। मगर ओबामा का मानना था कि सऊदी शासन ख़ुद अपने देश के भीतर अनेक विरोधाभासों से जूझ रहा है और उसके रवैए के यह विरोधाभास उसके अस्तित्व के लिए ख़तरा हैं।

ट्रम्प ने सत्ता संभालने के बाद समीकरणों में और भी उलट पलट कर दिया। ट्रम्प ने साफ़ साफ़ कह दिया कि सऊदी अरब ने अमरीका तथा अन्य पश्चिमी देशों से जो हथियार ख़रीदे हैं वह इस देश की रक्षा के लिए काफ़ी नहीं हैं। ट्रम्प ने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है कि सऊदी अरब अमरीका को पैसा दे और ख़ुद को सुरक्षित बना ले बल्कि सऊदी अरब को इस के साथ साथ यह भी करना होगा कि तेल व गैस के उत्पादन में भी वाशिंग्टन की इच्छा के अनुसार काम करे। ट्रम्प ने ओपेक संगठन को भी ध्वस्त कर देने की कोशिश की।

सऊदी अरब से अमरीका जो क़ीमत वसूल कर रहा है उससे सऊदी अरब का आंतरिक आर्थिक संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। वर्ष 2018 में सऊदी अरब का बजट घाटा 60 अरब डालर से अधिक हो चुका है। क्राउन प्रिंस ने इस स्थिति से निपटने के लिए सरकारी ख़र्चे में लगभग 30 अरब डालर की कटौती की और राष्ट्रीय तेल व गैस कंपनी आरामको का 5 प्रतिशत शेयर बेचकर 30 अरब डालर की रक़म हासिल करने की योजना बनाई मगर इससे देश के भीतर असंतोष बढ़ गया।

ट्रम्प का दबाव है कि सऊदी अरब की 2 हज़ार अरब डालर क़ीमत की आरामको कंपनी न्यूयार्क के शेयर मार्केट में बिक जाए ताकि सऊदी अरब की तेल व गैस की दौलत के बारे में फ़ैसला करने का अधिकार अमरीका के हाथ में आ जाए। मगर यह भी तय है कि बड़ी बड़ी क़ीमतें वसूल करने के बावजूद ट्रम्प सऊदी अरब के लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं हैं।


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