परमाणु समझौते को बाकी रखने के बारे में एशिया और यूरोप का दृष्टिकोण समान हैः मोगरीनी

परमाणु समझौते को बाकी रखने के बारे में एशिया और यूरोप का दृष्टिकोण समान हैः मोगरीनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु समझौते के दूसरे पक्षों का आह्वान किया था कि वे भी उनका अनुसरण करें परंतु जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति के आह्वान का पालन नहीं किया बल्कि रूस और चीन ने ट्रंप के इस कदम की तीव्र आलोचना की

यद्यपि ईरान और गुट पांच धन के बीच जुलाई 2015 में जो परमाणु समझौता हुआ था अमेरिका उसका एक सदस्य था परंतु अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सदैव परमाणु समझौते के खिलाफ दृष्टिकोण अपनाया है और उसे बदतरीन समझौते की संज्ञा दी है।

ट्रंप अंततः आठ मई 2018 को ईरान पर निराधार आरोप लगाकर इस समझौते से निकल गये और साथ ही घोषणा की है कि अगस्त और नवंबर में ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिये जायेंगे।

यही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु समझौते के दूसरे पक्षों का आह्वान किया था कि वे भी उनका अनुसरण करें परंतु जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति के आह्वान का पालन नहीं किया बल्कि रूस और चीन ने ट्रंप के इस कदम की तीव्र आलोचना की और वे परमाणु समझौते की रक्षा पर बल दे रहे हैं।

साथ ही विश्व समुदाय भी परमाणु समझौते को बाकी रखने पर बल दे रहा है।

शुक्रवार को एशियाई और यूरोपीय संघ के नेताओं की जो बैठक पेरिस में हुई थी उसमें परमाणु समझौते को विश्व की शांति व सुरक्षा के लिए लाभदायक बताया गया था और साथ ही परमाणु समझौते के प्रति कटिबद्ध रहने और उसे बाकी रखने पर बल दिया गया था।

यूरोपीय और एशियाई देशों के अधिकारियों ने बहुत अधिक सुरक्षा कारणों से इस समझौते के क्रियान्वयन पर बल दिया। यूरोपीय संघ की विदेश नीति आयुक्त फेड्रीका मोगरीनी ने कहा कि परमाणु समझौते को बाकी रखने के बारे में एशिया और यूरोप का दृष्टिकोण समान है।

यूरोपीय संघ और परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले दूसरे पक्षों ने अमेरिकी राष्ट्रपति की एकपक्षीय व मनमानी वाली कार्यवाही का विरोध किया और वे परमाणु समझौते को बाकी रखने के लिए प्रयास भी कर रहे हैं।

साथ ही यूरोपीय देशों का मानना है कि परमाणु समझौते के खत्म हो जाने से उनकी डिप्लोमैसी पर प्रश्न चिन्ह लग जायेगा। ये वे कुछ बातें हैं जिनकी वजह से यूरोपीय देश भी परमाणु समझौते के बाकी रखने पर बल दे रहे हैं।                                                                    

बहरहाल गुरूवार को एशिया- यूरोप मीटींग(अस्म) की 12वीं बैठक में जो इस बात की घोषणा की गयी कि परमाणु समझौते के संबंध में यूरोपीय संघ और एशियाई देशों का समान दृष्टिकोण है वह निश्चित रूप से ट्रंप सरकार के लिए एक और झटका है और सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और इस्राईल के अलावा इस संबंध में उनका कोई समर्थक नहीं है। 


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