ट्रंप अब दूसरे समझौतों से भी निकलने की चेष्टा में हैं

ट्रंप अब दूसरे समझौतों से भी निकलने की चेष्टा में हैं

अमेरिका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने दावा किया है कि वाशिंग्टन ईरान के साथ होने वाले एमिटी समझौते से निकल जायेगा

डोनाल्ड ट्रंप जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तब से उन्होंने बहुपक्षीय समझौतों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों व कानूनों की उपेक्षा की नीति अपना रखी है।

ट्रंप सरकार के पेरिस जलवायु समझौते, परमाणु समझौते और यूनिस्को एवं राष्ट्रसंघ की मानवाधिकार परिषद से निकलने के कदम को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

ज्ञात रहे कि इन कार्यवाहियों के कारण अमेरिका की बड़े पैमाने पर आलोचना हुई थी यहां तक अमेरिका के यूरोपीय घटकों ने भी उसकी आलोचना की थी।

अब अमेरिका वर्ष 1961 में हुए वियना कंवेन्शन और वर्ष 1955 में ईरान और अमेरिका के बीच हुए एमिटी समझौते से निकलने के प्रयास में है। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 1961 में होने वाले वियना कंवेन्शन से निकलने का निर्णय किया है।

जानकार सूत्रों का मानना है कि इस विषय का संबंध फिलिस्तीनियों की हालिया उस शिकायत से है जिसमें उन्होंने तेलअवीव से अमेरिका के दूतावास को कुद्स स्थानांतरित करने के संबंध में किया है।

जान बोल्टन ने कहा है कि हमारी इस कार्यवाही का संबंध फिलिस्तीनी प्रशासन द्वारा की जाने वाली शिकायत से है।

इसी प्रकार अमेरिका वर्ष 1955 में ईरान के साथ होने वाले एमिटी समझौते से निकलने के प्रयास में है। अमेरिका के इस कदम का संबंध हेग के अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के तीन अक्तूबर के फैसले से है।

हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने अपनी योग्यता की पुष्टि करते हुए वाशिगटन को ईरान के विरुद्ध लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए बाध्य किया है और कहा है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद हों और यह मतभेद, कूटनीतिक मार्ग से हल न हो सकें तो एसे वे अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। 

अमेरिका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने दावा किया है कि वाशिंग्टन ईरान के साथ होने वाले एमिटी समझौते से निकल जायेगा क्योंकि ईरान ने अमेरिका पर हमले के लिए इस समझौते का दुरुपयोग किया है।

हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने अमेरिकी सरकार का आह्वान किया है कि वह अपने अंतिम आदेश में उन चीज़ों से प्रतिबंध हटा दे जिससे ईरानी नागरिकों की जान खतरे में पड़ गयी है।

इसी तरह हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने एलान किया है कि ईरान ने अमेरिका की जो शिकायत की है उसके अंदर उसकी पैरवी करने की योग्यता है।

बहरहाल हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेश को अमेरिका की एक बड़ी पराजय समझा जा रहा है और उसका ईरान के हित में फैसला ट्रंप सरकार की नकारात्मक प्रतिक्रिया और क्रोध का कारण बना है।


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