इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की पांच नसीहतें।

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  • Source : विलायत डाट इन
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हमेशा सच बोलो और अमानत अदा करने में कोताही न करो चाहे वह अमानत मोमिन की हो या गुनहगार की। बेशक यह दो चीज़ें रिज़्क़ (Aliment) की कुंजियां हैं:

पहली नसीहतःहमेशा सच बोलो और अमानत अदा करने में कोताही न करो चाहे वह अमानत मोमिन की हो या गुनहगार की। बेशक यह दो चीज़ें रिज़्क़ (Aliment) की कुंजियां हैं:इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की पहली नसीहतइमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम के ज़माने के लोग इमाम अलैहिस्सलाम के ज्ञानात्मक और आध्यात्मिक स्थान से भलीभांति परिचित थे इसलिए जब भी उन्हें मुलाक़ात का सौभाग्य हासिल होता था तो आपसे नसीहत व उपदेश देने की मांग करते थे। इस्लाम के क़ीमती इल्मी खजानों से एक ख़ज़ाना इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की यही नसीहतें हैं जो आपने समय समय पर की हैं। जिनमें से कुछ तो दुर्घटनाओं की भेंट चढ़ गई लेकिन कुछ उल्मा की ज़हमतों से शियों की हदीस और रिवायतों की किताबों में सुरक्षित हैं। नीचे इमाम अलैहिस्सलाम की पांच क़ीमती नसीहतों का वर्णन किया जा रहा है:पहली नसीहतएक आदमी इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की सेवा में हाज़िर हुआ और कहने लगा ऐ रसूलुल्लाह के बेटे! मुझे कुछ नसीहत करें। इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:لا یَفْقِدُكَ اللَّهُ حَیْثُ أَمَرَكَ وَ لَا یَرَاكَ حَیْثُ نَهَاكَ۔जहां अल्लाह ने तुम्हें हाज़िर होने का हुक्म दिया हो वहाँ गायब न होना और जहां मना किया हो वहां उपस्थित न होना।इस छोटे और कीमती वाक्य का मतलब यह है कि इंसान वाजिब को अंजाम दे और हराम से परहेज करे। अगर ख़ुदा वन्दे आलम ने किसी चीज़ का हुक्म दिया है तो ऐसा न हो कि शैतान हमें उसके अंजाम देने से रोक दे और हम अल्लाह के अनुसरण और इबादत से वंचित हो जाएं। और अगर अल्लाह ने कुछ चीजों से मना किया है तो हरगिज शैतान के धोखे में आकर उसे अंजाम न दें बल्कि कोशिश यह हो कि अल्लाह हमें गुनाह की हालत में न देखे।इमाम अलैहिस्सलाम के इस उपदेश के बाद उस आदमी ने पूछा: मुझे इससे ज़्यादा नसीहत करें। इमाम (अ) ने फ़रमाया कि “لَا أَجِدُ”  अर्थात् इससे अधिक कोई बात मुझे नहीं कहना है जो मुझे कहना था वह एक जुमले में कह दिया अगर इंसान इस एक जुमले पर अमल कर ले तो मानो उसने दीन के सारे आदेशों  का पालन किया है। जारी.......


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