रमज़ानुल मुबारक-२

  • News Code : 439967
  • Source : विलायत डाट इन
Brief

रोज़े के बहुत ज़्यादा शारीरिक और आध्यात्मिक फ़ायदे हैं। इस्लाम की महान हस्तियों ने रोज़े को जिस्म को सेहत देने वाला, रूह को मज़बूत करने वाला, हैवानी इच्छाओं को कंट्रोल करने वाला, रूह को शुद्ध करने वाला और बेरंग ज़िंदगी में तब्दीली लाने वाला मानते हैं जो समाज को स्वस्थ रखने की भूमिका अदा करता है।

रोज़े के बहुत ज़्यादा शारीरिक और आध्यात्मिक फ़ायदे हैं। इस्लाम की महान हस्तियों ने रोज़े को जिस्म को सेहत देने वाला, रूह को मज़बूत करने वाला, हैवानी इच्छाओं को कंट्रोल करने वाला, रूह को शुद्ध करने वाला और बेरंग ज़िंदगी में तब्दीली लाने वाला मानते हैं जो समाज को स्वस्थ रखने की भूमिका अदा करता है। रोज़े के उपचारिक फ़ायदे, जिनकी गिनती उसके शारीरिक तथा भौतिक फ़ायदों में होती है बहुत ज़्यादा और ध्यान देने योग्य हैं। इस्लामी शिक्षाओं में रोज़े के शारीरिक फ़ायदों का भी उल्लेख किया गया है। इस सिलसिले में पैग़म्बरे इस्लाम (स) फ़रमाते हैः रोज़ा रखो ताकि स्वस्थ्य रहो।मेडिकल साइंस के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए रोज़ा बहुत फ़ायदेमंद है। यहां तक कि उन देशों में भी जहां रोज़े आदि में विश्वास नहीं किया जाता वहां पर भी डाक्टर कुछ बीमारों के इलाज के लिए बीमारों को कुछ घण्टों या एक निर्धारित समय के लिए खाना न देने की शैली अपनाते हैं। रोज़ा वास्तव में जिस्म के लिए पूरा आराम और पूरे जिस्म की सफ़ाई-सुथराई के मानी में है। जिस तरह से इंसान का दिल कुछ देर काम करता है और फिर एक क्षण आराम करता है उसी तरह इंसान के जिस्म को भी ग्यारह महीने तक लगातार काम करने के बाद एक महीने के आराम की ज़रूरत होती है।जिस्म के बहुत ज़्यादा काम करने वाले अंगों में से एक, डेजिस्टिव सिस्टम ख़ास कर मेदा है। सामान्य रूप से लोग दिन में तीन बार खाना खाते हैं इसलिए डेजिस्टिव सिस्टम लगभग हर समय खाने के पाचन, खाद्य पदार्थों का अवशोषण करने और अतिरिक्त पदार्थों को निकालने जैसे कामों में व्यस्त रहता है। रोज़ा इस बात का कारण बनता है कि जिस्म का यह महत्वपूर्ण अंग एक ओर तो आराम कर सके और बीमारियों से बचा रहे तथा दूसरी ओर नई ताक़त लेकर जिस्म में जमा हुई वसा को, जिसके बहुत नुक़सान हैं, घुला कर कम कर दे। इस्लामी महान हस्तियों के दूसरे कथनों में मिलता है कि इंसान का डेजिस्टिव सिस्टम बीमारियों का घर है और खाने से बचना उसका इलाज है।आज साइंस ने यह साबित कर दिया है कि रोज़ा रखने से जिस्म की अतिरिक्त वसा घुल जाती है, इससे हानिकारक और कंट्रोल से बाहर मोटापा कम होता है। कमर और उसके नीचे के हिस्सों पर दबाव कम हो जाता है तथा डेजिस्टिव सिस्टम, दिल और दिल से संबन्धित तंत्र संतुलित हो जाते हैं। इसी तरह से रोज़ा जिस्म की प्रतिरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करता है और उसे होशियार रखता है। इस तरह कहा जा सकता है कि रोज़ा सम्पूर्ण जिस्म की शुद्धता का कारण बनता है और यह इंसान को बहुत सी बीमारियों और ख़तरों से निबटने के लिए तैयार करता है।


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सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश
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