वेस्ट का इस्लामो फ़ोबिया और मुस्लिम मुल्कों का रिऐक्शन

  • News Code : 395904
  • Source : विलायत डाट इन
आज दुनिया का नक़्शा कुछ इस तरह़ का है कि लगभग 57 मुसलमान मुल्क हैं लगभग 25 ईसाई मुल्क हैं और केवल एक यहूदी मुल्क है। इसके अलावा चीन और जापान, श्रीलंका, थाईलैण्ड समेत लगभग 10 बुद्धिस्ट मुल्क हैं.........

1. आज दुनिया का नक़्शा कुछ इस तरह़ का है कि लगभग 57 मुसलमान मुल्क हैं लगभग 25 ईसाई मुल्क हैं और केवल एक यहूदी मुल्क है। इसके अलावा चीन और जापान, श्रीलंका, थाईलैण्ड समेत लगभग 10 बुद्धिस्ट मुल्क हैं। रुस की अधिकांश आबादी बहेरह़ाल ईसाई ही है। इसके अलावा और बहुत से छोटे छोटे ग़ैर अहेम मुल्क हैं। हालाँकि 193 मुल्क यू.एन.ओ के मिम्बर हैं, लेकिन केवल 5 मुल्कों को वीटो का ह़क़ ह़ासिल है और अगर ध्यान से देखा जाये तो दीन के हिसाब से 4 ईसाई मुल्कों और 1 बुद्धिस्ट मुल्क को वीटो का ह़क़ ह़ासिल है और यही 5 मुल्क यू.एन.ओ में दुनिया के सारे मामलों का आख़री फ़ैसला करते हैं। यह भी इतिहास है कि यू. एन. ओ. के या इन्टरनेशनल एटमिक इनर्जी एजेन्सी के अब तक के सभी सेक्रेटरी उसी मुल्क के निवासी होते हैं, जिनकी ह़ुकूमतें अमरीका के इशारे पर चलती हैं। ह़ाल के यू. एन. ओ. के जनरल सेक्रेटरी बान. की. मून अमरीका के साथी मुल्क साउथ कोरिया से और इन्टरनेशनल एटामिक इनर्जी एजेन्सी के हालिया जनरल सेक्रेटरी अमानो अमरीका के साथी मुल्क जापान के हैं और जब बराक एच ओबामा ने मुसलमानों को एतिहासिक सलाम ठोंका था तो वह भी मिस्र की राजधानी से जहाँ हुस्नी मुबारक जैसे अमेरिकी एजेन्ट्स की हुकूमत थी।2. जब रसूलुलल्लाह (स.अ.) इस्लाम लाये तो अरब में पहले से 04 ताक़तें मौजूद थीं। इन ताक़तों में पहली ताक़त लातो मनातो उज़्ज़ा के मानने वाली थी, दूसरी ताक़त यहूदी थे और तीसरी ताक़त ईसाई थे। इसके अलावा चौथी ताक़त वह अल्प संख़्यक थे जो जनाबे इब्राहीम (अ.स) को अपना क़ौमी हीरो समझते थे और उनकी रीति पर चलते थे और इन तीनों पहले बयान की गयी ताक़तों ने कभी खुलेआम कभी पीठ पीछे इस्लाम का ज़बरदस्त विरोध किया, मगर नाकामी हाथ आई। लेकिन यह तीनों ताक़तें इस्लाम के मुक़ाबले में अपनी हार को कभी दिल से स्वीकार नहीं कर पायी। इसलिये उनकी इस्लाम दुश्मनी समझ में आती है। लेकिन इतिहास इस बात का भी गवाह है कि जहाँ इन ताक़तों से इस्लाम का मुक़ाबला हुआ वहीं बुद्धिस्ट ब्लाक से कभी मुसलमानों का डायरेक्ट मतभेद नहीं हुआ। लेकिन तालिबानी जेहालत की आँधी ने बामियान में सैकड़ो साल पुरानी बुद्ध की मूर्तियों को तोड़ कर इस बुद्धिस्ट ब्लाक को भी बिला वजह मुसलमानों का दुश्मन बना लिया।3. हम अगर पिछली 30- 40 सालों की हिस्ट्री पर निगाह डालें तो हमें दिखाई देगा कि ईसाई ताक़तों ने मुसलमानों के विरूद्ध लगातार शत्रुतापूर्ण कार्रवाईयाँ की हैं, इनमें सबसे पहले तेल बम के इस्तेमाल के बादशाह फ़ैसल का उन्हीं के भतीजे द्वारा क़त्ल करवाना, एटमी रिएक्टर का फ़्रांस से समझौता करने के बाद ज़ुल्फ़ेक़ार अली भुट्टो का ज़ियाउल ह़क़ द्वारा क़त्ल, क़बरसा को तुर्की से तोड़कर अलग ईसाई रियासत बनाने की कोशिश, बोस्निया में मुसलमानों का जनसंहार, ईस्ट तिमोर को इन्डोनेशिया से कथित रिफ़्रेंन्डम द्वारा अलग करवा कर ईसाई रियासत की स्थापना, चेचनया में मुसलमानों का नरसंहार, अमरीका का सद्दाम ह़ुसैन द्वारा ईरान और कुवैत पर ह़मला करवाना, ताकि इन ताक़तों को इलाक़े में अपनी फ़ौजें रखने का बहाना मिले, अल्जीरिया में इस्लामी पार्टी का इलेक्शन जीतने के बाद सत्ता से दूर रखना, अफ़गानिस्तान पर 9-11 के आरोप के बाद ह़मला और लगातार नॉटो फ़ौजों की अफ़ग़ानिस्तान में मौजूदगी इराक़ के एटमी प्लान्ट पर इज़राईल का ह़मला यही नहीं बल्कि इराक़ पर भारी बरबादी के हथियार रखने का झूठा आरोप और लम्बी सेंक्शनस लगाने के बाद हमला और अतिग्रहण फ़ौजों के निकलने के बावजूद उसे फ़िलह़ाल कुर्द और ग़ैर कुर्द इलाकों में बाँट देना और अभी भी 15000 (पन्द्रह हज़ार) लोगों का दुनिया में सबसे बड़ा राजनयिक स्टाफ़ इराक़ में बाक़ी रखना, सोमालिया पर ईथोपियाई ईसाई मुल्क का हमला और आज तक जारी बरबादी, फ़िलिस्तीन में यासिर अराफ़ात को बेवकूफ़ बनाकर फ़िलिस्तीनी पंचायत का अगुवा बनाना औऱ इसके बाद इस्लामवादी हमास को इलेक्शन जीतने के बाद आतंकवाद का आरोप लगाकर अपने एजेन्ट मह़मूद अब्बास द्वारा इस फ़िलिस्तीनी पंचायत को भी गज़्ज़ा और रमल्ला के दो टुकड़ो में बाँट देना, लेबनान और ग़ज़्ज़ा पर इज़राईल का हमला, सूडान को कथित रिफ़्रेंन्डम द्वारा दो टुकड़ों में बाँट कर साउथ सूडान में ईसाई राज्य की स्थापना, लीबिया पर सेंकशन लगाने के बाद उसकी प्रापर्टीज़ का ज़ब्त करना, उसके बाद नाटो का हमला और ज़ब्त की गयी प्रापर्टीज़ का हुकूमत की तब्दीली के बाद भी पूरी तरह़ अभी तक वापस न करना, पाकिस्तान जो कि एक न्युक्लियर ताक़त है, की संप्रभुता को रौंदते हुए आये दिन ड्रोन हमलों में बेगुनाह मुसलमानों का क़त्ल, मिस्र में इंक़ेलाब के बाद कापटिक ईसाईयों को भड़का कर उन्हें अलग करने के रूजह़ानात को हवा देना, सीरिया के एटमी प्लान्ट पर इज़राईल का हमला, यही नहीं सीरिया में भाड़े के लड़ाकों द्वारा बग़ावत करवा कर इस बहाने से सेंक्शन लगवाना और उसकी इंटर-नेशनल प्रापर्टीज़ को ज़ब्त कर लेना, सीरिया पर लीबिया की तरह़ हमला करने के लिए यू. एन. ओ. की सिक्योरिटी काउन्सिल में रेजुलेशन लाना जो रूस और चीन के वीटो की वजह से नाकाम हो सका।4. ईरान के लगातार इंकार के बावजूद कि उसका इरादा एटमी बम बनाने का नहीं है, फ़िर भी इस बात का राग अलापना के हमें शक है कि ईरान ऐसा कर रहा है, जबकि इज़राईल और नार्थ कोरिया के विरूद्ध कोई कार्यवाई न करना, जो पहले ही न्यूक्लियर बम बना चुके हैं। क्योंकि इज़राईल को अमेरिका की और नार्थ कोरिया को चीन का सपोर्ट ह़ासिल है। यहीं नहीं बल्कि इन्टरनेशनल एटमिक इनर्जी एजेन्सी में अपने एजेन्टों द्वारा झूठी रिपोर्ट बनावाकर ईरान पर आये दिन यू. एन. ओ. द्वारा और ईसाई मुल्कों द्वारा नई पाबन्दियाँ लगाना और उसकी इंटर-नेशनल प्रापर्टीज़ को ज़ब्त कर लेना। उसके 5 एटमी वैज्ञानिकों का इज़राईल द्वारा क़त्ल करवाने के बावजूद उसी पर आतंकवाद का आरोप लगाना और उसके आसमानों पर हज़ारों मील की ऊँचाई पर जासूसी, जहाज़ो की नाजाएज़ उड़ाने, उसके तेल के आयात पर पाबन्दी लगाना व उसे सारी दुनिया में अलग- थलग करने की कोशिश करना। उसके ईरान- पाकिस्तान- इण्डिया गैस पाइपलाइन प्राजेक्ट में रोड़े अटकाना, पाकिस्तान के बलोच इलाके में बग़ावत करने की कोशिश करना, क्योंकि इसी इलाक़े से इस पाइप लाइन को होकर गुज़रना है और हर दिन ईरान को हमला करने की धमकियाँ देना।5. इसके अलावा ईसाई मुल्कों में लगातार रसूले इस्लाम (स.अ.) के कार्टून छापे जा रहे हैं। इस सिलसिले में ख़ुद पोप का रसूले इस्लाम (स.अ.) के बारे में अपमानजनक बयान आ चुका है।6. लगातार यूरोप में मुस्लिम औरतों के स्कार्फ़ पहनने पर पाबन्दियाँ लगाई जा रही हैं। क़ुर्आन को जलाने की कार्यवाहियाँ की जा रही हैं। इन्टरनेशनल साज़िश के तह़त एशिया में मुसलमानों में यह रुजहानात आम किये जा रहे हैं कि क़ुर्आन की बे समझे तिलावत करो, समझ कर न पढ़ो, वरना गुमराह हो जाओगे। जबकि क़ुर्आन पूरी की पूरी हिदायत और मार्ग दर्शन की किताब है। यह भी इंटर-नेशनल साज़िश है, जिसके तहत मुस्लिम नौजवानों की ब्रेन वाशिंग करने उन्हें आत्मघाती आतंकी हमलों की ओर यह धोखा देकर बेमौत मरवाया जा रहा है कि यह शहादत है, और इससे रसूलुल्लाह (स.अ.) के साथ जन्नत में जगह मिलेगी। यह भी ख़ुद रसूलुल्लाह (स.अ.) के विरूद्ध इंटर-नेशनल साज़िश है कि उनके ही नवासे के क़ातिल यज़ीद को उनके ही उम्मतियों में सम्मानित और रज़िअल्लाहो बनाकर पेश किया जाये।7. यह सब क्यों किया जा रहा है। इसका एक ही मक़सद है कि मुसलमानों की इमेज को सारी


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सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश
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