पश्चिमी समाज मे औरत का शोषण (3)

  • News Code : 393220
  • Source : विलायत डाट इन
पश्चिमी माहौल के मुक़ाबले में जब हम पूर्बी समाजी माहौल की जांच पड़ताल करते हैं तो आम तौर पर दो तरह के लोग दिखाई देते हैं

पिछले हिस्से में बताए गए पश्चिमी माहौल के मुक़ाबले में जब हम पूर्बी समाजी माहौल की जांच पड़ताल करते हैं तो आम तौर पर दो तरह के लोग दिखाई देते हैं, एक वह जो पश्चिमी लाईफ़ स्टाईल से अलग तो हैं लेकिन कई एंगिल से निन्दनीय कार्य शैली अपना रखी है, और ऐसे लोगों का ग्रुप उभर चुका है जो पच्छिम के बढ़ते हुए सियासी व इकोनॉमिक प्रभाव के तहत हर चीज़ मे पश्चिमी समाज की नक़ल करते हैं, जबकि यह डायरेक्टली अपनी अख़लाक़ी (moral) व तहज़ीबी (cultural) विरासत मे भरोसे की कमी, (पूरब के) इकनामिक सिस्टम की नाकामी, और कमज़ोर सियासी प्रैक्टिकल स्किल के परिणाम हैं, जिसने यहां गुटीय, वर्णीय व धार्मिक पछपात एवं शक या सन्देह ने सर उठा रखा है। ज़्यादातर पूर्बी क़ौमों के अन्दर शादी ब्याह की रस्मों मे बहुत ज़्यादा फ़ुज़ूलख़र्ची (अत्याधिक ख़र्च) का प्रदर्शन होता है, कभी-कभी इस तरह के आयोजन को समाजी या सियासी दबदबा दिखाने मे इस्तेमाल किया जाता है, अनेक गुटों एवं क्षेत्रों मे ज्योतिष (नुजूमी) से सम्बन्धित असर के डर एवं वहेम से लोगों के कामों को सीमित या बाधित कर दिया जाता है, जिससे सम्बन्धित लोगों के अन्दर क़ुदरत से मिली हुई शक्तियों के सही व पाज़ेटिव इस्तेमाल की दिशा व कोशिश सर्द पड़ जाती है, इससे उनकी पॉज़ेटिव सोच और किसी चीज़ को बनाने वाली भावना कमज़ोर हो जाती है, पूरब मे आमतौर से लोग ज़ातपात, गुटबन्दी, भाषाई गुटों, एवं राष्ट्रीय गुटों मे बटे हुए हैं। विभिन्न धार्मिक गुटों के बीच मेल मिलाप की असली व आन्त्रिक भावना नही पाई जाती है, बल्कि नफ़रत, आपस मे मेलमिलाप का न होना और पारिवारिक व क़बाएली दबदबे की निगेटिव सोच पाई जाती है, कभी वह एक दूसरे को समय की मांग के अनुसार सहेन कर लेते हैं, यह ऐसी कमज़ोर स्थिति है जो कभी और किसी समय भी टूट सकती है और पश्चिमी साम्राज्यवाद इस से फ़ाएदा उठा सकता है और उठाता है।


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सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश
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