ईदे ग़दीरः

ग़दीर पर रसूले इस्लाम (स.अ.) का विशेष ध्यान

  • News Code : 360251
  • Source : विलायत डाट इन
हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम को भी ग़दीर का उतना ही ख़्याल था जितना की अल्लाह को, और उस साल बहुत सारी क़ौमें और क़बीलें हज के सफ़र पर निकले थे।

1. रसूले इस्लाम (स.अ.) का ग़दीर के दिन उतरने वाली आयतों का प्रचार करनाहज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम को भी ग़दीर का उतना ही ख़्याल था जितना की अल्लाह को, और उस साल बहुत सारी क़ौमें और क़बीलें हज के सफ़र पर निकले थे।और वह सब गुट-गुट रसूले इस्लाम (स.अ.) के साथ होते जा रहे थे। रसूले इस्लाम को मालूम था कि इस सफ़र के अंत में उन्हें एक महान काम को अंजाम देना है जिस पर दीन की इमारत तय्यार होगी और उस इमारत के ख़म्भे उँचे होंगे कि जिससे आपकी उम्मत सारी उम्मतों की सरदार बनेगी, पूरब और पश्चिम में उसकी हुकूमत होगी मगर इसकी शर्त यह है कि वह सब अपने सुधरने के बारे में सोच-विचार करें और अपने हिदायत के रास्ते को देख लें, लेकिन अफ़सोस कि ऐसा नहीं हो सका।पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ.) ऐलान के लिए उठ खड़े हुए जबकि अलग-अलग शहरों से लोगों के गुट गुट आपके पास जमा हो चुके थे जो आगे बढ़ गए थे उन्हें पीछे बुलाया, जो आ रहे थे उन्हें उसी जगह रोका गया, और सबको यहर बात बताई और याद कराई गई और यह कहा गया कि जो यहाँ हैं वह उन लोगों को बता देगें जो यहाँ नहीं हैं। ताकि यह सब के सब ग़दीर की हदीस के रावी (हदीस बयान करने वाले) हों जिनकी संख्या एक लाख से अधिक थी।हाफ़िज़ अबू जाफ़र मोहम्मद इब्ने जुरैर तबरी “अलविलायतो फी तुरक़े हदीसे ग़दीर” नामक किताब में ज़ैद इब्ने अरक़मः से बयान करते हैं कि नबी-ए-अकरम ने अपने आख़री हज से वापसी पर कि जब आप ग़दीरे ख़ुम के स्थान पर पहुँचे हैं तो दोपहर का समय था, गर्मी बहुत तेज़ थी, आपके हुक्म से पेड़ों के नीचे की ज़मीनों को साफ़ किया गया, जमाअत से नमाज़ पढ़ने का ऐलान किया गया, हम सब जमा हुए तो रसूले इस्लाम (स.अ) ने एक ख़ुत्बे के बाद इरशाद फ़रमायाः ख़ुदा ने मुझ पर यह आयत उतारी है कि जो हुक्म आपको दिया गया है उसे लोगों तक पहुँचा दो अगर तुमने ऐसा नहीं किया तो रिसालत का कोई काम अंजाम नहीं दिया और अल्लाह आपको दुश्मनों से बचाएगा।जिबरईल (अ.) अल्लाह की तरफ़ से यह हुक्म लाए हैं कि मैं इस स्थान पर रुक कर हर एक को यह बता दूँ कि अली इब्ने अबी तालिब (अ.) मेरे भाई और मेरे बाद मेरे जानशीन (उत्तराधिकारी) और इमाम हैं। मैंने जिबरईल से कहा कि अल्लाह से मेरे लिए बख़्शिश (माफ़ी) की गारंटी लें क्योंकि मुझे मालूम है कि अच्छे लोग बहुत कम हैं और तकलीफ़ पहुँचाने वाले बहुत ज़यादा हैं। और ऐसे बहुत से लोग हैं जो अली (अ.) के साथ रहने के कारण मुझे बुरा भला कहते हैं यहाँ तक कि उन्होंने मुझे “ उज़ुन ” (यानी कान के कच्चे) तक कह दिया।अल्लाह तआला क़ुर्आन में इरशाद फ़रमाता हैः उनमें से कुछ लोग नबी को तकलीफ़ पहुँचाते हैं और कहते हैं कि वह कान के कच्चे हैं, उनसे कह दीजिए मैं उनका नाम और निशानियाँ बता सकता था लेकिन मैंने उस पर पर्दा डाल दिया है इसलिए अली (अ.) के बारे में जो हुक्म अल्लाह ने दिया है उसको पहुँचाए बिना अल्लाह राज़ी नहीं होगा।ऐ लोगो! इस संदेश को सुन लो, निःसंदेह अल्लाह ने अली (अ.) को तुम्हारे ऊपर वली और इमाम बनाया है। और उनकी इताअत (आज्ञापालन करना) सभी इंसानों पर वाजिब की है उनका हुक्म जारी है उनका विरोध करने वाले पर लानत और धिक्कार और जो उनको माने उस पर रहमत, यह सुन लो और इताअत करो।निःसंदेह अली (अ.) तुम लोगों के इमाम और मौला हैं उनके बाद इमामत मेरे बेटों में उन्हीं की नस्ल से होगी, हलाल वही है जिसको अल्लाह और उसके रसूल ने हलाल कर दिया, और हराम वही है जिसको अल्लाह और उसके रसूल ने हराम कर दिया। कोई ऐसा इल्म नहीं जिसको ख़ुदा ने मुझे नहीं दिया हो और मैंने अली तक न पहुँचाया हो, इसलिए अली का साथ न छोड़ना। वही हैं जो हक़ की तरफ़ हिदायत (मार्गदर्शन) करते हैं और ख़ुद भी उस पर अमल करते हैं, जो उसका इंकार करे ख़ुदा कदापि उसकी तौबा क़बूल नहीं करेगा और उसको माफ़ नहीं करेगा। अल्लाह को चाहिए कि वो ऐसा ही करे और ऐसे इंसान को अज़ाब का मज़ा चखाए। जब तक ज़मीन पर लोग ज़िन्दा हैं अली मेरे बाद सब लोगों से अफ़ज़ल (सर्वश्रेष्ठ) हैं। जो उनका विरोध करे उस पर लानत होगी, और मैं जो कुछ भी कह रहा हूँ वो सब जिबरईल, अल्लाह की तरफ़ से लेकर आए हैं। हर इंसान यह देख लेगा कि उसने आगे क्या भेजा है।क़ुर्आन को समझो और अंजान की इताअत ना करो, तुम्हारे लिए क़ुर्आन की तफ़सीर वही करेगा जिसका हाथ मैं पकड़ने वाला हूँ उसे बुलंद करके मैं तुम्हारे सामने ऐलान करने वाला हूँ कि जिसका मैं मौला हूँ उसके यह अली भी मौला हैं। और अली की विलायत का यह ऐलान अल्लाह की तरफ़ से है जिसको उसने मुझ पर उतारा है।ख़बरदार हो जाओ! मैंने अदा कर दिया।ख़बरदार हो जाओ! मैंने पहुँचा दिया।ख़बरदार हो जाओ! मैंने सुना दिया।ख़बरदार हो जाओ! मैंने विस्तार से बयान कर दिया।मेरे बाद अली के सिवा कोई भी मोमिनों का मालिक नहीं है, फ़िर आपने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को इतना उठाया कि मौला के पैर रसूले इस्लाम (स.अ.) के घुटनों तक पहुँच गए और फिर फ़रमायाःऐ लोगो ! यह मेरा भाई, मेरा जानशीन (उत्तराधिकारी), मेरे इल्म का वारिस, और जिसका मुझ पर और अल्लाह की किताब की तफ़सीर पर ईमान है उसके लिए यह अली मेरे बाद मेरा जानशीन (उत्तराधिकारी) है। ऐ अल्लाह! तू उसको दोस्त रखना जो अली को दोस्त रखे और उसे दुश्मन रखना जो उसको दुश्मन रखे और उस इंसान पर लानत कर जो उसको ना माने, और उस पर अज़ाब करना जो अली के हक़ का इन्कार करे।ऐ अल्लाह ! इस बात में कोई शंका नहीं है कि तू ने अली की ख़िलाफ़त के ऐलान के बाद यह आयत नाज़िल कीःआज मैंने दीन को अली की इमामत के माध्यम से मुकम्मल (पूरा) कर दिया।अब जो लोग अली और उनकी नस्ल से पैदा होने वाले मेरे बेटों को क़यामत तक इमाम न माने तो यही वह लोग होंगे जिनके सारे नेक आमाल बेकार हो जाएँगे और वो हमेशा जहन्नम में रहेंगे।इब्लीस ने जनाबे आदम को ईर्ष्या के कारण जन्नत से निकलवा दिया, इस लिए तुम लोग ईर्ष्या से बचो वरना तुम्हारे आमाल बरबाद हो जाएँगे और तुम्हारे क़दम लड़खड़ा जाएँगे, क़ुर्आन में सूरए वलअस्र अली ही की शान में उतरा है।ऐ लोगो ! ख़ुदा, उसके रसूल और वो नूर जो नबी के साथ उतरा उस पर ईमान ले आओ इस से पहले कि तुम्हारे चेहरे बिगाड़ दिए जाएँ, या उन्हें पीठ की तरफ़ मोड़ दिया जाए, या तुम पर हम ऐसी लानत करें जैसी असहाबे सब्त पर लानत की थी। ख़ुदा का नूर मुझ में है फिर अली की नस्ल में इमाम मेहदी तक।ऐ लोगो ! बहुत जल्दी ऐसे इमाम पैदा होंगे जो तुम को जहन्नम की तरफ़ बुलाएँगे। लेकिन क़यामत के दिन उनकी कोई मदद नहीं की जाएगी, अल्लाह और मैं दोनो उनसे नफ़रत करते हैं, वह और उनके साथी जहन्नम के सबसे नीचे वाले भाग में होंगे। जल्दी ही यह लोग ख़िलाफ़त को छीन कर उसे अपना बना लेंगे, उस समय ऐ गिरोहे इंसान और जिन्नात तुम पर मुसीबत आएगी, और तुम पर आग बरसाई जाएगी और तुम्हारी पुकार सुनने वाला कोई नहीं होगा। 2. ग़दीर का दिन “ ईद ” का दिनएक चीज़ जिससे ग़दीर की हदीस मशहूर और हमेशा बाक़ी रही वह है ग़दीर का दिन ईद का दिन, और इस दिन को जिसको पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ.) ने ईद का दिन बनाया। जिसमें जश्न मनाया जाता है। रात इबादत में बिताई जाती है। मोमेनीन ख़ुम्स और ज़कात निकालते हैं। ग़रीब लोगों की मदद करते हैं। अपने लिए और अपने घर वालों के लिए नयी-नयी चीज़ें ख़रीदते हैं, और नऐ-नऐ कपड़े पहनते हैं।इसलिए जब मोमिनों की एक बड़ी संख्या उस दिन जश्न और ख़ुशियाँ मनाएगी तो यह बात यक़ीनी है कि इंसान उस घटना के कारणों और उसके रावियों को ढ़ूंढ़ता है या वह घटना जिसकी विशेषता ऐसी हो वह रावियों और शायरों (कवियों) के बारे में पता देता है और यह चीज़ कारण होती है कि उसके लिए


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सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश
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