• आयतुल्लाह ख़ामेनई के बयानात की रौशनी में

    सहीफ़ए सज्जादिया में रमज़ानुल मुबारक।

    सहीफ़ए सज्जादिया की दुआ 44 में रमज़ानुल मुबारक के बारे में इमाम सज्जाद अ. नें कुछ बातें की हैं आज उन्हीं को आपके सामने बयान करना चाहता हूँ हालांकि यहाँ अपने प्रिय जवानों से यह भी कहना चाहता हूं कि कि सहीफ़ए कि सहीफ़ए सज्जादिया को पढ़ें, इसका अनुवाद पढ़ें, यह हैं तो दुआएं लेकिन इनमें ज्ञान विज्ञान का एक समन्दर है। सहीफ़ए सज्जादिया की सभी दुआओं में और इस दुआ में भी ऐसा लगता है कि एक इन्सान ख़ुदा के सामने बैठा लॉजिकल तरीक़े से कुछ बातें कर रहा है, बस अन्तर यह है कि उसकी शक्ल दुआ है।

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  • हज़रत ख़दीजा पर ख़ुदा का सलाम

    हज़रत ख़दीजा अ. अपनी क़ौम के बीच एक अलग स्थान रखती थीं जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। आपके स्वभाव में नम्रता थी और आपके अख़लाक़ व नैतिकता में भी कोई कमी नहीं थी इसी वजह से मक्के की औरतें आपसे जलती थीं और आपसे ईर्ष्या करती थीं।

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  • रमज़ानुल मुबारक-१

    रमज़ानुल मुबारक का महीना, अल्लाह के बनाए हुए महीनों में सबसे सर्वश्रेष्ठ महीना है। क़ुरआने करीम इसी महीने में उतरा है। इस्लामी हदीसों में आया है कि आसमान और जन्नत के दरवाज़े इस महीने में खोल दिये जाते हैं जबकि जहन्नम के दरवाज़े बंद हो जाते हैं।

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  • रमज़ान के खाने में किन चीज़ों का प्रयोग करें।

    रमज़ान के मुबारक महीने में हमारा भोजन पहले के मुक़ाबले ज़्यादा चेंज नहीं होना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि ख़ाना सादा हो. इसी तरह इफ़तार का सिस्टम इस तरह सेट किया जाना चाहिए कि नैचुरल वज़्न पर कोई ज्यादा असर न पड़े।

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  • रोज़े के जिस्मानी फ़ायदे, साइंस की निगाह में

    अगर रोज़ा सही तरीक़े से रखा जाए और सेहत के नियमों का पालन किया जाए तो यह हमारे लिए आख़ेरत के साथ ही दुनिया मे भी बहुत फ़ायदा पहुंचा सकता है। रोज़ा हमारे जिस्म से ज़हरीली और हानिकारक चीज़ों और टाक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है, ब्लड सुगर को कम करता है, यह हमारी खाने पीने की आदतों मे सुधार करता है और हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाता है तथा हमारे जिस्म की बीमारियों से लड़ने की ताक़त मे बढ़ोत्तरी करता है।

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  • इमाम ख़ुमैनी एक बेमिसाल हस्ती का नाम।

    कभी-कभी लोग इमाम ख़ुमैनी से कहते थे कि औरत क्यों घर में रहे तो वह जवाब देते थे कि घर के कामों को महत्वहीन न समझो, अगर कोई एक आदमी का प्रशिक्षण कर सके तो उसने समाज के लिये बहुत बड़ा काम किया है। मुहब्बत व प्यार औरत में बहुत ज़्यादा होता है और परिवार का माहौल और आधार प्यार पर ही होता है।

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  • सऊदी अरब के शियों पर हो रहे अत्याचार की एक रिपोर्ट।

    सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत जिसका नाम दम्माम है तेल की दौलत से मालामाल है इसी क्षेत्र में सऊदी अरब की सबसे बड़ी शिया आबादी रखती है। क़तीफ़ जो कि दम्माम प्रांत का सबसे बड़ा शिया क्षेत्र है, सऊदी अरब के तेल भंडार सबसे ज़्यादा क़तीफ में हैं .... यहीं से तेल पाइपलाइन रियाद भी जाती है। दूसरा क्षेत्र अलएहसा है यहां की कुल आबादी में शिया 70% हैं ..... दम्माम शहर में शियों की संख्या बहुत ज़्यादा है।

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  • हज़रत ख़दीजा स.अ. पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. की वफ़ादार बीवी।

    पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम की पैग़म्बरी के ऐलान के दस साल बाद पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. की बीवी हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाहे अलैहा ने देहांत किया।

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  • इराक़ में दाइश के भयानक आतंकी अपराध।

    मशहूर सुन्नी आलिम मुफ़्ती अमीनी ने कहा है कि दाइश के इस गुट का अहलेसुन्नत वल- जमाअत से कोई वास्ता नहीं है। जब भी फ़ौज कहेगी हम अमामा उतार कर फ़ौजी वर्दी पहन कर इन मुल्क व क़ौम के दुश्मनों से जेहाद करेंगे।

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  • एक से अधिक शादियां इस्लाम की निगाह में।

    आज के ज़माने का सबसे गर्म विषय एक से ज़्यादा शादियाँ करने का मसला है। जिसे मुद्दा बना कर पच्छिमी दुनिया ने औरतों को इस्लाम के ख़िलाफ़ ख़ूब इस्तेमाल किया है और मुसलमान औरतों को भी यह विश्वास दिलाने की कोशिश की है कि एक से ज़्यादा शादियों का क़ानून औरतों के साथ नाइंसाफ़ी है और यह उनके ख़िलाफ़ किया जाने वाला इस्लामी ज़ुल्म है और यह उनका अपमान एवं तौहीन है ऐसा लगता है कि इस्लाम में औरत अपने शौहर की पूरी मुहब्बत की भी हक़दार नहीं हो सकती है और उसे शौहर की आमदनी की तरह उसकी मुहब्बत को भी बांटना पड़ेगा और आख़िर में जितना हिस्सा अपनी क़िस्मत में लिखा होगा उसी पर सब्र करना पड़ेगा।

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  • आयतुल्लाहिल उज़्मा गुलपाएगानी र.ह

    मरहूम आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मोहम्मद रेज़ा गुलपाएगानी, आयतुल्लाह हायरी के अच्छे शागिर्दों और चहेतों में से थे उनका जन्म 1316 हिजरी में गोगद गुलपाएगान नामक गांव में एक इल्मी घराने में हुई, तीन साल की उम्र में मां व बाप के इस दुनिया से कूच कर जाने से दुनिया की कठिनाईयों से बचपन में ही परिचित हो गए।

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  • नहजुल बलाग़ा, हज़रत अली अ. का चमत्कार। (1)

    हज़रत अली अलैहिस्सलाम एसी महान हस्ती थे जिसके बारे में पैग़म्बरे इस्लाम ने फरमाया हैः अगर सारे पेड़ कलम बन जायें और सारे समंदर सियाही बन जायें और सारे जिन्नात हिसाब करने वाले एवं सारे इंसान लिखने वाले बन जायें तब भी अली इब्ने अबी तालिब की विशेषताओं को नहीं लिख सकते।

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  • लै-लतुर रग़ाइब, (لیلۃ الرغائب)किसे कहते है

    रजब महीने की पहली शबे जुमा (जुमेरात की रात) को लैलतुर रग़ाइब कहा जाता है यानी आर्ज़ूओं और कामनाओं की रात ... इस महान रात के कुछ ख़ास आमाल हैं, हमारी अगर कोई इच्छा है तो उसको पूरा करवाने के लिए अल्लाह की बारगाह से संपर्क किया जाना चाहिए।

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  • हज़रत ज़ैनब स.अ. का जन्म दिन।

    पांच जमादिउल अव्वल पांच हिजरी क़मरी को मदीना शहर में पैग़म्बरे इस्लाम की नवासी हज़रत ज़ैनब का जन्म हुआ। उस समय पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. मदीने से बाहर गये हुए थे। इसी कारण हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने उस बच्ची का नाम रखने में सब्र से काम लिया ताकि पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. मदीना वापस आ जायें।

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  • तौहीद क्या है?

    तौहीद का मतलब अल्लाह को एक मानना है। दर्शन और तर्क शास्त्र में इस के कई मतलब हैं लेकिन सब का अंत में मतलब यही होता है कि अल्लाह को एक माना जाए। इस संदर्भ में बहुस ती विस्तृत चर्चाओं का बयान हुआ है लेकिन यहाँ पर सब का बयान उचित नहीं होगा।

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  • अल्लाह के एक होने का सबूत

    पिछले लेख में इस सृष्टि के रचनाकार अल्लाह का वुजूद साबित हुआ वह दूरदर्शी अल्लाह जो इस दुनिया को जन्म देने वाला और उस बाकी रखने वाला और पिछले पाठों में हम ने भौतिकवचार धारा की बी समीक्षा की और विभिन्न तरह के विचारों की समीक्षा करने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि बिना अल्लाह के दुनिया की रचना आर्तिकक विचार है और इस का कोई औचित्य नहीं है।

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  • क़ानून के बारे में पश्चिमी मुल्कों के भौतिक दृष्टिकोण 2

    अब इस बातचीत को जारी रखने में यह सवाल पैदा होता आता है कि इस्लामी दृष्टिकोण से आज़ादी का आधार क्या है और उसकी सीमाएं और एरिया क्या है क़ानून के लिए पहले बयान की गई विशेषता से यह मालूम होता है कि इंसानी समाज में ज़िंदगी के टार्गेट और मक़सद और भौतिक व वास्तविक व मअनवी हितों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए क़ानून का मौजूद होना वाजिब हैं

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  • क़ानून के बारे में पश्चिमी मुल्कों के भौतिक दृष्टिकोण

    जैसा कि हमने पिछले आर्टिकिल्स में बयान किया है कि इस्लाम के दृष्टिकोण से समाज को क़ानून की ज़रूरत होती है वह भी ऐसा क़ानून जो इंसान के दुनिया और क़यामत की सुख, शांति, आनन्द का प्रतिभू हो और क़ानून को लागू करने वाले को भी क़ानून को उसके प्रमाणकों द्वारा समानता देने में पूरी तरह से अवगत, दयालू, सदाचारी, न्यायी और ताक़तवर होना चाहिए जैसा कि प्रबंधन की ज़रूरत भी यही हैं

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  • हसद

    हसद का मतलब होता है किसी दूसरे इंसान में पाई जाने वाली अच्छाई और उसे हासिल नेमतों की समाप्ति की इच्छा रखना। हासिद इंसान यह नहीं चाहता कि किसी दूसरे इंसान को भी नेमत या ख़ुशहाली मिले। यह भावना धीरे धीरे हासिद इंसान में अक्षमता व अभाव की सोच का कारण बनती है और फिर वह हीन भावना में ग्रस्त हो जाता है।

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  • ग़ीबत

    ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना है, ग़ीबत एक ऐसी बुराई है जो इंसान के मन मस्तिष्क को नुक़सान पहुंचाती है और सामाजिक संबंधों के लिए भी ज़हर होती है। पीठ पीछे बुराई करने की इस्लामी शिक्षाओं में बहुत ज़्यादा आलोचना की गयी है।

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  • आत्महत्या

    आत्महत्या भी इस ज़माने के समाजी समस्याओं में सबसे ऊपर है, आज हिन्दुस्तान ही में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लोग आत्महत्या कर रहे हैं, और जान जैसी क़ीमती चीज़ ख़ुद अपने हाथों नष्ट कर रहे हैं।

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  • ‘अरब सबकान्टीनेंट की भौगोलिक,समाजिक और कल्चरल स्थिति

    अरब सबकान्टीनेंट पच्छिमी एशिया के उत्तर मे स्थित है, इसका आकार उत्तर पच्छिम से दक्खिन पच्छिम तक चौकोर है और इसका एरिया लगभग बाईस लाख वर्ग किलोमीटर है। इस सबकान्टीनेंट के लगभग पैंतालीस पर्सेंट हिस्से पर सऊदी अरब स्थित है और इसका शेष भाग दुनिया की मौजूदा राजनीतिक गुटबन्दी के हिसाब से 6 मुल्कों अर्थात यमन, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, बहरैन, और कोयत मे बंटा हुआ है।

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  • दीन क्या है?

    दीन अर्बी शब्द है जिस का मतलब आज्ञापालन परोतोषिक आदि बताया गया है लेकिन दीन या दीन की परिभाषा होती है इस सृष्टि के रचयता और उसके आदेशों पर विश्वास व उस के प्रति आस्था रखना इस आधार पर जो लोग किसी रचयता के वुजूद में विश्वास नहीं रखते और इस सृष्टि के वुजूद को संयोग का नतीजा मानते हैं

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  • ईदुल अज़्हा

    आज ईदुल अज़्हा का मुबारक दिन है आज विश्व के सारे मुसलमान खुशी मना रहे हैं। ज़िल हिज्जा महीने की दसवीं तारीख का सूरज निकलने के साथ ही विश्व के साथ सारे मुसलमान ईदे क़ुर्बान की नमाज़ पढ़ने के लिए चल पड़े हैं। ईदुल अज़्हा या बकरईद महान ईश्वर की उपासना करने वाले व्यक्तियों की प्रसन्नता और बहुत बड़ी ईश्वरीय परीक्षा का दिन है

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  • हज आत्मा की ताज़गी और अनन्य ईश्वर के क़रीब होने का मौसम है।

    हज की महा धर्मसभा में हाजी सफ़ेद चकोर के समान काबे की परिक्रमा करते हैं और ईश्वरीय आदेश के पालन का वचन देने वाले अपनी श्रद्धा व स्नेह का प्रदर्शन करते

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  • इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की पांच नसीहतें।

    ऐ सुफ़यान ! जो इंसान झूठ बोलने की आदत रखता है उसमें मानवता नाम की कोई चीज नहीं और जो ताक़त वाला है उसका कोई दोस्त नहीं और जो हासिद (जलने वाला) है उसे आराम और चैन नहीं मिल सकता है और जो आदमी बुरे चरित्र का है वह कभी सज्जनता और बुज़ुर्गी व शराफ़त नहीं रख सकता।

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  • इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की पांच नसीहतें।

    हमेशा सच बोलो और अमानत अदा करने में कोताही न करो चाहे वह अमानत मोमिन की हो या गुनहगार की। बेशक यह दो चीज़ें रिज़्क़ (Aliment) की कुंजियां हैं:

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  • एहसान

    एहसान इंसानी समाज में बहुत कॉमन लफ़्ज़ है। एर ग़ैर मुस्लिम भी एहसान को अच्छी तरह जानता है। बस फ़र्क़ यह है कि जो एहसान का लफ़्ज़ हमारे समाज में इस्तेमाल होता है वह क़ुरआन वाला एहसान नहीं है क्यों कि एहसान अरबी ज़बान का लफ़्ज़ है जो लफ़्ज़े "अहसन" से बना है और अहसन के मायने अच्छा, ख़ूब, बेहतरीन होते हैं।

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सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश
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