• शबे क़द्र का महत्व और उसकी बरकतें।

    इमाम मोहम्मद बाक़िर फ़रमाते हैंः शबे क़द्र वह रात है जो हर साल रमज़ानु मुबारक की आख़री तारीखों में आती है जिसमें न केवल क़ुरआन नाज़िल हुआ है बल्कि अल्लाह तआला ने इस रात के लिए फ़रमायाः इस भाग्य की रात में हर वह घटना और काम जो साल भर में होना होगा जैसे अच्छाई, बुराई और गुनाह या वह संतान जिसको पैदा होना है या वह मौत जो आएगी या वह रिज़्क़ व आहार जो मिलेगा सबके सब भाग्य में लिख दिए जाते हैं।

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  • बच्चों के सामने वाइफ की बुराई।

    बच्चे के सामने मां-बाप में से किसी एक का अपमान वास्तव में उसकी भावनाओं के केंद्र और आत्मविश्वास के मजबूत स्तंभ को तहस-नहस करने के समान है। इसी तरह जब मां-बाप में से कोई एक बच्चे के सामने दूसरे की आलोचना करता है उसकी बुराई करता है तो वास्तव में वह बच्चे के अंदर अपमान और मां-बाप की बात न मानने की भावना को मजबूत करता है। इसलिए कुछ समय के बाद उस घर में ना तो बाप का सम्मान रहेगा और ना ही मां किसी सम्मान के लायक समझी जाएगी।

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  • बचपन का मोटापा बन सकता है उम्र भर के डिप्रेशन का कारण।

    एक रिपोर्ट में IASO ने अपनी ताजा प्रेस रिलीज में खास तौर पर मां-बाप को चेतावनी दी है कि वह अपने बच्चों में मोटापे की अनदेखी न करें क्योंकि बाद की उम्र में यही चीज उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

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  • रमज़ान को रमज़ान क्यों कहा जाता है?

    रसूले इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम ने फ़रमायाः रमजान गुनाहों को जला देने वाला महीना है अल्लाह तआला इस महीने में अपने बंदों के गुनाहों को जला देता है और उन्हें माफ़ कर देता है इसीलिए इस महीने का नाम रमज़ान रखा गया है। इस्लामी महीनों में केवल रमज़ान वह महीना है जिसका नाम क़ुरआने करीम में आया है।

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  • अगर नहीं चाहते कि बुढ़ापे में पछताना पड़े, तो अपनाइये यह उपाय।

    मां बाप की तकलीफ पर रो सकते हैं उनके इलाज पर अपना सब कुछ लुटा सकते हैं उनके लिए किसी से लड़ मर सकते हैं लेकिन इंसान की बेबसी का तमाशा देखिए की चाह कर भी उनके पास बैठ कर दो घड़ी बात नहीं कर सकते। उनके लिए मां बाप के शब्द उनके लिए अजनबी हो चुके होते हैं।

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  • गर्मी का मौसम और ठंडे पानी का इस्तेमाल।

    गर्मियों में ठंडा पानी पीना लगभग सभी बहुत पसंद होता है, चिलचिलाती धूप में पसीने से भीगे हुए जब आप घर आते हैं तो दिल करता है ठंडा ठंडा पानी पीने का

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  • इंटरनेट का इस्तेमाल जरूरी है मगर कैसे किया जाए?

    इंटरनेट की बदौलत आज पूरी दुनिया सिमट कर इंसान की जेब में आ चुकी है इसमें कोई शक नहीं कि इंसान की जिंदगी के विकास में इंटरनेट की बड़ी भूमिका है

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  • जैतून के तेल के 14 आश्चर्यजनक फायदे।

    जैतून का तेल डॉक्टरी हिसाब से बहुत लाभदायक है जिसकी अधिकतर ख़ूबियाँ आपने विभिन्न लेखों में पढ़ी होंगी मगर क्या आपको मालूम है कि इस से बहुत कुछ ऐसा भी किया जा सकता है जिसकी आपने कभी कल्पना भी न की हो

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  • पत्नी का सम्मान।

    अगर आप अपनी बीवी का ऐहतेराम करेंगे तो वह भी आपका ऐहतेराम करेगी और इस तरह आप लोगों के बीच मोहब्बत और प्रेम में और बढ़ोतरी होगी जिसके कारण लोगों के बीच आप दोनों का भी सम्मान किया जाएगा

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  • इस्लामी शासन की विशेष रूपरेखा।

    निसंदेह शासन के उत्तरदायित्वों व कर्तव्यों की सही पहचान तभी हो सकती है जब हम शासन के फ़लसफ़े को समझ लें और किसी भी संगठन में हर सदस्य कि नियुक्ति या हर विभाग का निर्माण एक विशेष आवश्यकता और उद्देश्य के लिए होता है क्यों कि अगर निचले स्तर पर सदस्य या विभाग न हों तो उस संगठन में रिक्तता और बाधा उत्पन्न हो जाएगी

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  • नबियों की हुकूमतों के मुख्य उद्देश्य?

    अम्बिया अलैहिमुस्सलाम और विशेष रूप से पैग़म्बरे इस्लाम सल्लललाहो अलैहे व आलिही वसल्लम का दृष्टिकोण, यह है कि शासन का कर्तव्य, भौतिक हितों और आवश्यकताओं को पूरा करने के अतिरिक्त आध्यात्मिक हितों को पूरा करना भी है यहाँ तक कि आध्यात्मिक हितों का पूरा करना भौतिक हितों से श्रेष्ठ और उन पर प्राथमिकता रखता है

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  • अरफ़ा, दुआ, इबादत और अल्लाह के नज़दीक होने का दिन।

    दुआ इबादत की रूह है। जो इबादत दुआ के साथ होती है वह प्रेम और परिज्ञान को उपहार स्वरूप लाती है। दुआ ऐसी आत्मिक स्थिति है कि जो इंसान और उसके जन्मदाता के बीच मोहब्बत एवं लगाव पैदा करती है। दुआ से जीवन के प्रति सकारात्मक सोच पैदा होती है। पैग़म्बरे इस्लाम (स) फ़रमाते हैं, सर्वश्रेष्ठ इंसान वह है कि जो इबादत और दुआ से लगाव रखता हो।

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  • वहाबियत का संक्षिप्त परिचय।

    वहाबी विचारधारा का प्रचार पूरी तरह से 698 हिजरी में सीरिया में इब्ने तैमिया के माध्यम से अक़ीदों और धार्मिक विश्वास में भारी विचलन और इस्लामी समुदायों के कुफ्र व शिर्क की अभिपुष्टि के आधार पर शुरू हुआ जिसे अहले सुन्नत और शिया उलमा के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। इब्ने

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  • वहाबियत एक नासूर

    पाक मज़ारों के विध्वंस के पीछे जो उद्देश्य हैं उनमें दो लक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण हैं: 1. इस्लाम के इतिहास से जुड़ी सभी निशानियों को मिटा देना और इस्लाम को एक मिथक धर्म बनाकर पेश करना 2. वह हस्तियां जिनके यह मज़ार हैं और अन्य ऐतिहासिक स्थल जिनके नाम से नामित हैं, लोगों के दिल और दिमाग से उनकी याद को मिटाना ताकि वह दुनिया के सामने उदाहरण न बन सकें। लेकिन उन्हें नहीं पता कि अल्लाह के नूर को मिटाना सम्भव नहीं है।

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  • वहाबी टोले के बारे में पैग़म्बर (स.) की भविष्यवाणी

    हज़रत पैग़म्बरे इस्लाम स. ने फ़रमाया: ऐ अल्लाह हमारे देश शाम (सीरिया) को हमारे लिए मुबारक बना, हमारे लिए यमन को मुबारक बना, सहाबा ने पूछा और हमारे नज्द (सऊदी) को? हज़रत ने फिर यही दोहराया: ऐ अल्लाह हमारे देश शाम (सीरिया) को हमारे लिए मुबारक बना, हमारे लिए यमन को मुबारक बना। सहाबा ने फिर नज्द के बारे में सवाल किया? अब्दुल्लाह इब्ने उमर कहते हैं मुझे लगता है कि तीसरी बार हज़रत ने फ़रमाया: वहाँ भूकंप और विद्रोह होगा और वहीं से शैतान के सींग प्रकट होंगे।

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  • जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. विलायत के आसमान का एक तारा।

    यह तारा आसमान वालों के लिये चमकता है। यह तारा हमारे लिये हिदायत का तारा है। हमनें हिदायत के इस तारे से क्या पाया है? हमारे लिये ज़रूरी है कि इस चमकते तारे की रौशनी में ख़ुदा और ख़ुदा के रास्ते की खोज करें। वह रास्ता जिसे सीधा रास्ता कहते हैं, जिस रास्ते पर ख़ुद बीबी ज़हरा स. चली हैं। आपका जन्म भी एक ख़ास चीज़ से हुआ है। ख़ुदा यह बात जानता था कि यह महान औरत दुनिया में हर एम्तेहान और परीक्षा में सफल होगी इसलिये इसके जन्म का इंतेज़ाम भी ख़ास तरीक़े से किया।

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  • इस्लाम के लबादे में आले सऊद की इस्लाम दुश्मनी।

    सभी मुसलमानों पर ज़रूरी है कि वह इस लेख को ज़्यादा से ज़्यादा आम करें ताकि मुसलमानों को इस्लाम के लबादे में छिपे आस्तीन के सांप आले सऊद की इस्लाम दुश्मनी का पता चल जाए और इस तरह अनभिज्ञता और सादगी में उनका समर्थन करके उनके पापों और अपराधों में शरीक होने से बच जाए।

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  • ईरान को बदनाम करने का उद्देश्य सऊदी अरब के अपराधों से ध्यान हटाना है।

    बहुत ही अफ़सोस है कि आजकल भारत और कश्मीर के विभिन्न अखबारों में सुप्रीम लीडर, इमाम खुमैनी (रह) और इस्लामी क्रांति ईरान के बारे में एक ख़ास साजिश और उद्देश्य के तहत ऐसी खबरें छापी जा रही हैं जिनके पीछे निश्चित ज़ायोनी, वहाबियत और तकफीरी गिरोह का हाथ है।

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  • आयतुल्लाह ख़ामेनई के बयानात की रौशनी में

    सहीफ़ए सज्जादिया में रमज़ानुल मुबारक।

    सहीफ़ए सज्जादिया की दुआ 44 में रमज़ानुल मुबारक के बारे में इमाम सज्जाद अ. नें कुछ बातें की हैं आज उन्हीं को आपके सामने बयान करना चाहता हूँ हालांकि यहाँ अपने प्रिय जवानों से यह भी कहना चाहता हूं कि कि सहीफ़ए कि सहीफ़ए सज्जादिया को पढ़ें, इसका अनुवाद पढ़ें, यह हैं तो दुआएं लेकिन इनमें ज्ञान विज्ञान का एक समन्दर है। सहीफ़ए सज्जादिया की सभी दुआओं में और इस दुआ में भी ऐसा लगता है कि एक इन्सान ख़ुदा के सामने बैठा लॉजिकल तरीक़े से कुछ बातें कर रहा है, बस अन्तर यह है कि उसकी शक्ल दुआ है।

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  • हज़रत ख़दीजा पर ख़ुदा का सलाम

    हज़रत ख़दीजा अ. अपनी क़ौम के बीच एक अलग स्थान रखती थीं जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। आपके स्वभाव में नम्रता थी और आपके अख़लाक़ व नैतिकता में भी कोई कमी नहीं थी इसी वजह से मक्के की औरतें आपसे जलती थीं और आपसे ईर्ष्या करती थीं।

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  • रमज़ानुल मुबारक-१

    रमज़ानुल मुबारक का महीना, अल्लाह के बनाए हुए महीनों में सबसे सर्वश्रेष्ठ महीना है। क़ुरआने करीम इसी महीने में उतरा है। इस्लामी हदीसों में आया है कि आसमान और जन्नत के दरवाज़े इस महीने में खोल दिये जाते हैं जबकि जहन्नम के दरवाज़े बंद हो जाते हैं।

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  • रमज़ान के खाने में किन चीज़ों का प्रयोग करें।

    रमज़ान के मुबारक महीने में हमारा भोजन पहले के मुक़ाबले ज़्यादा चेंज नहीं होना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि ख़ाना सादा हो. इसी तरह इफ़तार का सिस्टम इस तरह सेट किया जाना चाहिए कि नैचुरल वज़्न पर कोई ज्यादा असर न पड़े।

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  • रोज़े के जिस्मानी फ़ायदे, साइंस की निगाह में

    अगर रोज़ा सही तरीक़े से रखा जाए और सेहत के नियमों का पालन किया जाए तो यह हमारे लिए आख़ेरत के साथ ही दुनिया मे भी बहुत फ़ायदा पहुंचा सकता है। रोज़ा हमारे जिस्म से ज़हरीली और हानिकारक चीज़ों और टाक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है, ब्लड सुगर को कम करता है, यह हमारी खाने पीने की आदतों मे सुधार करता है और हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाता है तथा हमारे जिस्म की बीमारियों से लड़ने की ताक़त मे बढ़ोत्तरी करता है।

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  • इमाम ख़ुमैनी एक बेमिसाल हस्ती का नाम।

    कभी-कभी लोग इमाम ख़ुमैनी से कहते थे कि औरत क्यों घर में रहे तो वह जवाब देते थे कि घर के कामों को महत्वहीन न समझो, अगर कोई एक आदमी का प्रशिक्षण कर सके तो उसने समाज के लिये बहुत बड़ा काम किया है। मुहब्बत व प्यार औरत में बहुत ज़्यादा होता है और परिवार का माहौल और आधार प्यार पर ही होता है।

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  • सऊदी अरब के शियों पर हो रहे अत्याचार की एक रिपोर्ट।

    सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत जिसका नाम दम्माम है तेल की दौलत से मालामाल है इसी क्षेत्र में सऊदी अरब की सबसे बड़ी शिया आबादी रखती है। क़तीफ़ जो कि दम्माम प्रांत का सबसे बड़ा शिया क्षेत्र है, सऊदी अरब के तेल भंडार सबसे ज़्यादा क़तीफ में हैं .... यहीं से तेल पाइपलाइन रियाद भी जाती है। दूसरा क्षेत्र अलएहसा है यहां की कुल आबादी में शिया 70% हैं ..... दम्माम शहर में शियों की संख्या बहुत ज़्यादा है।

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  • हज़रत ख़दीजा स.अ. पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. की वफ़ादार बीवी।

    पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम की पैग़म्बरी के ऐलान के दस साल बाद पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. की बीवी हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाहे अलैहा ने देहांत किया।

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  • इराक़ में दाइश के भयानक आतंकी अपराध।

    मशहूर सुन्नी आलिम मुफ़्ती अमीनी ने कहा है कि दाइश के इस गुट का अहलेसुन्नत वल- जमाअत से कोई वास्ता नहीं है। जब भी फ़ौज कहेगी हम अमामा उतार कर फ़ौजी वर्दी पहन कर इन मुल्क व क़ौम के दुश्मनों से जेहाद करेंगे।

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  • एक से अधिक शादियां इस्लाम की निगाह में।

    आज के ज़माने का सबसे गर्म विषय एक से ज़्यादा शादियाँ करने का मसला है। जिसे मुद्दा बना कर पच्छिमी दुनिया ने औरतों को इस्लाम के ख़िलाफ़ ख़ूब इस्तेमाल किया है और मुसलमान औरतों को भी यह विश्वास दिलाने की कोशिश की है कि एक से ज़्यादा शादियों का क़ानून औरतों के साथ नाइंसाफ़ी है और यह उनके ख़िलाफ़ किया जाने वाला इस्लामी ज़ुल्म है और यह उनका अपमान एवं तौहीन है ऐसा लगता है कि इस्लाम में औरत अपने शौहर की पूरी मुहब्बत की भी हक़दार नहीं हो सकती है और उसे शौहर की आमदनी की तरह उसकी मुहब्बत को भी बांटना पड़ेगा और आख़िर में जितना हिस्सा अपनी क़िस्मत में लिखा होगा उसी पर सब्र करना पड़ेगा।

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  • आयतुल्लाहिल उज़्मा गुलपाएगानी र.ह

    मरहूम आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मोहम्मद रेज़ा गुलपाएगानी, आयतुल्लाह हायरी के अच्छे शागिर्दों और चहेतों में से थे उनका जन्म 1316 हिजरी में गोगद गुलपाएगान नामक गांव में एक इल्मी घराने में हुई, तीन साल की उम्र में मां व बाप के इस दुनिया से कूच कर जाने से दुनिया की कठिनाईयों से बचपन में ही परिचित हो गए।

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پیام امام خامنه ای به مسلمانان جهان به مناسبت حج 2016
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