• इमाम हसन असकरी अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह

    इमाम हसन असकरी अ.स. के दौर में अनेक इलाक़ों और कई शहरों में शिया फैल चुके थे और कई इलाक़ों में अच्छी ख़ासी तादाद में थे जैसे कूफ़ा, बग़दाद, नेशापुर, क़ुम, मदाएन, ख़ुरासान, यमन और सामर्रा शियों के बुनियादी मरकज़ में से थे, शिया इलाक़ों के इस तरह तेज़ी से फैलने और कई इलाक़ों में शियों के अच्छी ख़ासी तादाद में होने को देखते हुए ज़रूरी था कि उनके बीच आपस में एक दूसरे से संपर्क बना रहे ताकि उनकी दीनी और सियासी रहनुमाई हो सके और उन सभी को एक साथ मंज़िल तक पहुंचाया जा सके

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  • इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के सोग में डूबा पूरा ईरान

    आज गुरूवार 29 सफ़र को ईरान में पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पौत्र इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत की बरसी मनाई जा रही है।

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  • पैग़म्बर स.अ. की ज़िंदगी के आख़िरी दिनों में क्या हुआ...

    मेरे भाई और मेरे सबसे क़रीबी को बुलाओ, उन्होंने अबू बक्र को बुला दिया वह जब आए तो पैग़म्बर स.अ. ने फिर कहा मेरे भाई और मेरे सबसे क़रीबी को बुलाओ, उन्होंने इस बार उमर को बुला दिया उन्हें देख कर फिर पैग़म्बर स.अ. ने अपनी बात दोहराई, तभी वहां मौजूद उम्मे सलमा ने कहा कि अली अ.स. को बुला रहे हैं, आख़िरकार इमाम अली अ.स. को बुलाया गया इमाम अली अ.स. तशरीफ़ लाए उसके बाद पैग़म्बर स.अ. और इमाम अली अ.स. ने कुछ देर एक दूसरे के कान में कुछ बातें कीं, जब इमाम अली अ.स. से इस बारे में पूछा गया तो आपने कहा मुझे इल्म के हज़ार दरवाज़े तालीम दिए हैं और इनमें से हर दरवाज़े से हज़ार दरवाज़े खुल गए, और मुझसे कुछ बातें कहीं हैं जिनपर मैं अमल करूंगा।

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  • अकेला सरदार

    इमाम हसन अ.स. ने माविया की चालबाज़ी और साज़िशों को देखा तो उसे कई ख़त लिख कर उसे इताअत करने और साज़िशों से दूर रहने को कहा और मुसलमानों के ख़ून बहाने से रोका, लेकिन माविया इमाम अ.स. के हर ख़त के जवाब में केवल यही बात लिखता कि वह हुकूमत के मामलात में इमाम अ.स. से ज़्यादा समझदार और तजुर्बेकार है और उम्र में भी बड़ा है।

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  • पैग़म्बरे इस्लाम के स्वर्गवास और इमाम हसन की शहादत के दिन शोक में डूबा पूरा ईरान

    इस्लामी गणतंत्र ईरान आज शोक में डूबा हुआ है। राजधानी तेहरान सहित सभी शहरों और गांवों में शोक सभाओं का सिलसिला मंगलवार की रात से ही शुरू हो गया है जो अब तक जारी है।

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  • इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस पर इस्लामी जगत में हर्षोल्लास

    पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस के अवसर पर शनिवार को ईरान व इराक़ समेत इस्लामी जगत के अधिकांश देशों में सभाएं आयोजित हुईं।

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  • यज़ीद के दरबार में इमाम सज्जाद अ. का भाषण।

    यज़ीद की हुकूमत लरज़ने लगी, यज़ीद हालात को देख कर बुरी तरह घबरा गया इसीलिए उसने तुरंत अज़ान देने का हुक्म दिया, अज़ान देने वाले ने अज़ान शुरू की इमाम अ.स. ने भी अज़ान को दोहराना शुरू किया, जैसे ही उसने अशहदो अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह कहा इमाम अ.स. ने यज़ीद की ओर देखते हुए कहा ऐ यज़ीद यह मोहम्मद स.अ. का नाम जो अज़ान देने वाले ने अभी लिया और उनकी रिसालत की गवाही दी मुझे यह बता कि यह तेरे जद हैं या मेरे... अगर तू यह कहे कि यह मेरे जद हैं तो तू झूठा है, और अगर इनको मेरा जद मानता है तो यह बता कि किस जुर्म में उनके ख़ानदान को क़त्ल कर दिया।

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  • शियों के नाम इमाम जाफ़र सादिक़ अ. की वसीयतें।

    हठधर्मी से बचो, क्योंकि यह अमल को नष्ट कर देता है, और झगड़ालू व्यवहार के कारण जीवन बर्बाद मत करो क्योंकि अल्लाह से दूर कर देता है, पहले के लोगों के जीवन को देखो वह किस प्रकार चुपचाप जीवन बिताने का प्रयास करते थे

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  • 8 शव्वाल, जन्नतुल बक़ी और वहाबियत के अत्याचार।

    फिर मदीने में पैग़म्बर की पवित्र क़ब्र को तोप का निशाना बनाया लेकिन मुसलमानों के आक्रोश को देख कर वह ऐसा नही कर पाए।

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  • अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अ. की वसीयत।

    अपने पड़ोसियों के बारे में अल्लाह से डरते रहना..... क्योंकि उनके बारे में पैग़म्बर स0 ने बराबर हिदायत की है और आप इस हद तक उनके लिए सिफ़ारिश फऱमाते रहे कि हम लोगों को ये गुमान होने लगा कि आप उन्हें भी विरासत दिलाएँगे

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  • इमाम हसन अ.ह की महानता रसूले इस्लाम स.अ की ज़बानी।

    रसूले इस्लाम स.अ. इमाम हसन अलैहिस्सलाम को अपने कांधे पर सवार किए हुए कहीं ले जा रहे थे किसी ने कहा अरे बेटा तुम्हारी सवारी कितनी अच्छी है? रसूले इस्लाम स.अ. ने फ़रमाया यह क्यों नहीं कहते कि सवार कितना अच्छा है?

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  • उम्मुल मोमिनीन हज़रत ख़दीजा (स)

    दस रमजानुल मुबारक उम्मुल मोमिनीन हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाह अलैहा के निधन का दिन है। उन्होंने दुनिया को जन्नत में औरतों की सरदार हजरत फातिमा (स) जैसी बेटी का उपहार दिया

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  • इमामे ज़माना (अ) की ग़ैबत में हमारी जिम्मेदारियां।

    मेरे ज़ुहूर में जल्दी के लिए बहुत ज्यादा दुआ करो क्योंकि तुम्हारे मुश्किलों का हल इसी में है इसके अलावा दुआ ए फर्ज पढ़ने की भी बहुत ज़्यादै ताकीद की गई है जो अक्सर दुआओं की किताबों में दर्ज है।

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  • इमाम महदी अलैहिस्सलाम।

    मोहम्मद इब्ने हसन जो इमाम महदी के नाम से प्रसिद्ध हैं शियों के बारहवें इमाम हैं। शिया स्रोतों के अनुसार इमामे ज़माना को जन्म को ख़ुफ़िया रखा गया और इमाम हसन अस्करी के कुछ खास सहाबियों के अलावा किसी को आपका दीदार नसीब नहीं हुआ

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  • इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम की शहादत।

    अब्बासी खलीफा हारुन ने जो कि नहीं चाहता था कि जनता इमाम मूसा काज़िम अली सलाम से इल्म और शिक्षाओं से फायदा उठा सकें 25 रजब 183 हिजरी कमरी को एक साजिश रच कर आपको कैदखाने में जहर देकर शहीद कर दिया शहादत के समय आपकी उम्र केवल 25 साल थी।

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  • हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस।

    अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम मक्के में मस्जिदुल हराम के अंदर जुमे के दिन 13 रजब को पैदा हुए आपके अलावा न कोई और काबे में पैदा हुआ है न ही कोई उसके बाद उस स्थान और महानता को हासिल कर सकेगा

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  • रजब का चाँद के दिखाई देते ही ईरान और भारत सहित विश्व भर में खुशी का माहौल।

    इस्लामी कैलेंडर में से इबादत के महीने रजब के चाँद के दिखाई देते ही ईरान और भारत सहित विश्व भर में खुशी का माहौल दिखाई देने लगा है

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  • हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की वसीयत और शहादत।

    आपकी वसीयत के अनुसार आपका जनाज़ा रात को उठाया गया, हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने ग़ुस्ल और कफ़न का इंतेज़ाम किया केवल बनी हाशिम और सलमान फ़ारसी, मिक़दाद और अम्मार जैसे ईमानदार और वफादार साथियों के साथ नमाज़े जनाज़ा पढ़कर ख़ामोशी के साथ दफन कर दिया

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  • हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की कुछ हदीसें।

    हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. फ़रमाती हैं: "औरतों के लिए अच्छाई और सलाह इसमें है कि न तो वह नामहरम मर्दों को देखें और न नामहरम मर्द उनको देख सकें।"

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  • हज़रत फ़ातेमा ज़हरा स. बेहतरीन आदर्श

    हम एक नज़र उनकी ज़िन्दगी के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर डालते हैं और देखते हैं कि उनका चरित्र क्या था और क्योंकि ख़ुदा नें उनको हमारे लिये आईडियल बनाया है इसलिये हम उनसे कुछ सीख कर अपने जीवन में लागू करें।

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  • हज़रत ज़ैनब स.अ की ज़िंदगी पर एक निगाह।

    हज़रत ज़ैनब (अ) ने बचपन के दिनों में अपने बाबा हज़रत अली (अ) से पूछा: बाबा जान! क्या आप हमें प्यार करते हैं? अमीरूल मोमेनीन हज़रत अली (अ) ने फ़रमाया: मैं तुमसे प्यार क्यों न करूँ, तुम तो मेरे दिल का तुकड़ा हो।

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  • हज़रत मासूमा स. का एक संक्षिप्त परिचय।

    हज़रत मासूमा स. (अ) शियों के सातवें इमाम मूसा काज़िम (अ) की बेटी हैं, उसकी माँ हज़रत नजमा ख़ातून हैं, हज़रत मासूमा स. (अ) पहली ज़ीकाद 173 हिजरी में मदीना मुनव्वरा में पैदा हुईं।

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  • हज़रत इमाम हसन अस्करी अ. की संक्षिप्त जीवनी।

    हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ) आठ रबीउस्सानी 232 हिजरी को जुमे के दिन मदीना में पैदा हुए आप इमामत और विलायत की ग्यारहवीं कड़ी हैं हज़रत इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम का सामना भी आपने पूर्वजों (अहलेबैत) की तरह समय के ज़ालिम, अत्याचारी और मक्कार अब्बासी ख़लीफ़ा से था, आपकी मिसाल उस दौर में ऐसी ही थी जिस तरह ज़ुल्म और अत्याचार के काले अंधेरे में एक दिये की होती है।

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  • इमाम हुसैन अ. के कितने भाई कर्बला में शहीद हुए।

    कर्बला में जिन नेक और अच्छे इंसानों ने सह़ी और कामयाब रास्ते को अपनाया और अपने ज़माने के इमाम के नेतृत्व में बुरे लोगों के मुक़ाबले, अपनी ख़ुशी के साथ जंग की और शहीद हुए उनमें से कुछ वीर ह़ज़रत अली (अ.स) के बेटे भी थे जो अमीरूल मोमिनीन अ. की तरफ़ से इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम के भाई थे, इतिहास की किताबों में उनकी संख्या 18 बताई गई है।

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  • ईदे मुबाहेला:

    इस्लाम व अहलेबैत की जीत का दिन।

    नजरान क्षेत्र के ईसाईयों के धार्मिक नेता एक चटान के ऊपर जाते हैं। बुढ़ापे के कारण उनके जबड़े और सफ़ेद दाढ़ी के बालों में कंपन है। वह कांपती हुई आवाज़ में कहते हैं कि मेरे विचार में मुबाहिला करना उचित नहीं होगा। यह पांच नूरानी चेहरे जिन्हें मैं देख रहा हूं अगर दुआ कर देंगे तो धरती में धंसे पहाड़ उखड़ जाएंगे। अगर मुबाहिला हुआ तो हमारी तबाही निश्चित है और यह भी आशंका है कि अल्लाह के अज़ाब समूचे दुनिया के ईसाई समुदाय को अपनी चपेट में ले ले।

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  • अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अ. और हज़रत ज़हरा की शादी।

    एक सफल वैवाहिक जीवन के लिए ज़रूरी है कि घर की जिम्मेदारियां और काम बाट लिए जाएँ। कछ काम पति के जिम्मे हों और कुछ पत्नी के जिम्मे। ताकि सारा बोझ एक के कंधों पर न पड़े। अलबत्ता इसका मतलब यह नहीं है कि वह उन जिम्मेदारियों में एक दूसरे का साथ न दें और एक दूसरे का सहयोग न करें बल्कि ज़रूरी है कि जहां पति पत्नी के कामों में उसका हाथ बंटा सकता है, उसका हाथ बटाए और अगर पत्नी पति के कामों में उसकी मदद कर सकती है तो ज़रूर करे.........................

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  • एक सात साल का बच्चा इमाम कैसे हो सकता है?

    बग़दाद के अस्सी उलमा और बुज़ुर्गों ने जब हज के मौसम में इमाम मोहम्मद तक़ी अ. से मुलाक़ात की तो आपने उनके हर सवाल का जवाब दिया और उनके लिए साबित हो गया कि आप वास्तव में इमाम हैं और मामून ने आपकी कमसिनी के बावजूद जब आपको अपना दामाद बनाया तो अब्बासियों की ओर से आलोचना हुई कि तुमने उन्हें अपना दामाद क्यों बनाया है? तो मामून ने कहा: मैं उनके इल्म और गुणों को देखते हुए उन्हें अपना दामाद बनाया है और फिर बड़े बड़े उलमा......

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  • इमाम अली रज़ा अ. का संक्षिप्त जीवन परिचय।

    इमाम अली रेज़ा अ. मदीने में सन 148 हिजरी में पैदा हुए और सन 203 हिजरी में मामून अब्बासी के हाथों शहीद हुए। आपके वालिद इमाम मूसा काज़िम अ. शियों के सातवें इमाम हैं, आपकी माँ का नाम ताहिरा था और जब उन्होंने इमाम रेज़ा अ. को जन्म दिया था तो इमाम मूसा काज़िम अ. ने उन्हें ताहिरा का नाम दिया।

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सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश
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