• पैग़म्बरे इस्लाम के परपौत्र इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस

    विभूतियों से भरे शाबान महीने की पांचवीं तारीख़ को स्वर्ग की अप्सराओं ने पूरे मदीने को अपने परों से घेर लिया था क्योंकि हज़रत शहरबानो की गोद में नवजात था और वह नवजात कोई आम बच्चा नहीं बल्कि पैग़म्बरे इस्लाम के वंश से था जिसे आगे चल कर जनता के मार्गदर्शन की ईश्वरीय ज़िम्मेदारी संभालनी थी।

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  • हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस

    सन चार हिजरी क़मरी में तीन शाबान के दिन पूरी सृष्टि के सबसे महान परिवार में एक बच्चे के जन्म की ख़बर ने पैग़म्बरे इस्लाम के हृदय को हर्ष और आध्यात्मिक उत्साह से भर दिया।

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  • विलायत के आसमान पर हिदायत का तारा

    बुद्धिमान वह हैं जो आसमान के तारों की सहायता से अपने रास्ते ढ़ूढ़ँते हैं और मंज़िल तक पहुँच जाते हैं। यह तारा जो आसमान में चमकता है, यह क्या होता है? क्या यह इतना ही छोटा सा एक दिया होता है जो टिमटमाता रहता है? जी नहीं! तारे की ख़ुद अपनी एक दुनिया है।

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  • इमाम मूसा काज़िम (अ) की शहादत की बर्सी पर ईरान समेत दुनिया भर में सोग

    इराक़ और ईरान समेत दुनिया भर के शिया मुसलमान अपने सातवें इमाम हज़रत इमाम मूसा काज़िम (अ) की शहादत की बर्सी पर सोग मना रहे हैं।

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  • हज़रत अली के शुभ जन्म दिवस पर ईरान समेत दुनिया भर में जश्न + फ़ोटो

    बुधवार 13 रजब बराबर, 20 मार्च 2019 को शिया मुसमलानों के पहले इमाम और पैग़म्बरे इस्लाम (स) के उत्तराधिकारी हज़रत अली (अ) का शुभ जन्म दिवस है। वहीं भारत सहित अन्य देशों में 21 मार्च को हज़रत अली का शुभ जन्म दिवस मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर ईरान समेत दुनिया भर के मुसलमान, विशेष रूप से शिया मुसलमान जश्न मना रहे हैं और महफ़िलों एवं सम्मेलनों का आयोजन कर रहे हैं। पैग़म्बरे इस्लाम के चचा हज़रत अबू तालिब के बेटे हज़रत अली (अ) का जन्म पवित्र शहर मक्का में स्थित इस्लाम के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल काबे में हुआ था। पैग़म्बरे इस्लाम (स) ने बचपने से ही हज़रत अली (अ) की परवरिश की। पुरुषों में हज़रत अली ने सबसे पहले इस्लाम स्वीकार किया और हर क़दम पर पैग़म्बरे इस्लाम का साथ दिया। हज़रत अली (अ) जीवन भर ज्ञान और इस्लाम के प्रचार-प्रसार के साथ ही इस्लाम के दुश्मनों के साथ होने वाले युद्धों में पैग़म्बरे इस्लाम (स) साथ दिया और दुश्मनों को पराजित किया। इस वर्ष संयोग से हज़रत अली अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस और नौरोज़ की ईद एक साथ आई है। इसलिए पूरे ईरान में ख़ुशियां दो बराबर हो गईं हैं, ईरान का हर छोटा बड़ा शहर हो या गांव सब दुल्हन की तरह सजे हुए हैं। ईरान के दो मुख्य पवित्र शहर मशहद और क़ुम तो श्रद्धालुओं से भरा हुआ है। हर ओर से केवल एक ही आवाज़ आ रही है “या अली”, लोग एक दूसरे को मुबारकबाद पेश कर रहे हैं। याद रहे कि ईरान में हज़रत अली (अ) के शुभ जन्म दिवस को पिता दिवस और पुरुष दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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  • हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा की शहादत

    बसंत या बहार का मौसम प्रकृति के खिल उठने की वजह से मोर के पंख की तरह सुंदर व मनमोहक लगता और सभी को अपने सौंदर्य को देखने के लिए आमंत्रित करता है।

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  • हज़रत ज़ैनब के रौज़े की नई दीवारों की डिज़ाइनिंग प्रतियोगिता, आप भी ले सकते हैं भाग, जीतने वाले के लिए सुनहरा अवसर...

    सीरिया में पवित्र स्थलों की पुनर्निर्माण समिति के इंजीनियरिंग विभाग ने दमिश्क़ स्थित हज़रत ज़ैनब (स) के पवित्र रौज़े की दीवारों की डिज़ाइनिंग की प्रतियोगिता का एलान किया है।

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  • हज़रत फ़ातिमा मासूमा (अ) की वफ़ात, पवित्र शहर क़ुम और पूरा ईरान शोकाकुल

    हज़रत फ़ातिमा मासूमा सलामुल्लाह अलैहा हज़रत इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित सुपुत्री थीं।

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  • इमाम हसन असकरी अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह

    इमाम हसन असकरी अ.स. के दौर में अनेक इलाक़ों और कई शहरों में शिया फैल चुके थे और कई इलाक़ों में अच्छी ख़ासी तादाद में थे जैसे कूफ़ा, बग़दाद, नेशापुर, क़ुम, मदाएन, ख़ुरासान, यमन और सामर्रा शियों के बुनियादी मरकज़ में से थे, शिया इलाक़ों के इस तरह तेज़ी से फैलने और कई इलाक़ों में शियों के अच्छी ख़ासी तादाद में होने को देखते हुए ज़रूरी था कि उनके बीच आपस में एक दूसरे से संपर्क बना रहे ताकि उनकी दीनी और सियासी रहनुमाई हो सके और उन सभी को एक साथ मंज़िल तक पहुंचाया जा सके

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  • इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के सोग में डूबा पूरा ईरान

    आज गुरूवार 29 सफ़र को ईरान में पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पौत्र इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत की बरसी मनाई जा रही है।

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  • पैग़म्बर स.अ. की ज़िंदगी के आख़िरी दिनों में क्या हुआ...

    मेरे भाई और मेरे सबसे क़रीबी को बुलाओ, उन्होंने अबू बक्र को बुला दिया वह जब आए तो पैग़म्बर स.अ. ने फिर कहा मेरे भाई और मेरे सबसे क़रीबी को बुलाओ, उन्होंने इस बार उमर को बुला दिया उन्हें देख कर फिर पैग़म्बर स.अ. ने अपनी बात दोहराई, तभी वहां मौजूद उम्मे सलमा ने कहा कि अली अ.स. को बुला रहे हैं, आख़िरकार इमाम अली अ.स. को बुलाया गया इमाम अली अ.स. तशरीफ़ लाए उसके बाद पैग़म्बर स.अ. और इमाम अली अ.स. ने कुछ देर एक दूसरे के कान में कुछ बातें कीं, जब इमाम अली अ.स. से इस बारे में पूछा गया तो आपने कहा मुझे इल्म के हज़ार दरवाज़े तालीम दिए हैं और इनमें से हर दरवाज़े से हज़ार दरवाज़े खुल गए, और मुझसे कुछ बातें कहीं हैं जिनपर मैं अमल करूंगा।

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  • अकेला सरदार

    इमाम हसन अ.स. ने माविया की चालबाज़ी और साज़िशों को देखा तो उसे कई ख़त लिख कर उसे इताअत करने और साज़िशों से दूर रहने को कहा और मुसलमानों के ख़ून बहाने से रोका, लेकिन माविया इमाम अ.स. के हर ख़त के जवाब में केवल यही बात लिखता कि वह हुकूमत के मामलात में इमाम अ.स. से ज़्यादा समझदार और तजुर्बेकार है और उम्र में भी बड़ा है।

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  • पैग़म्बरे इस्लाम के स्वर्गवास और इमाम हसन की शहादत के दिन शोक में डूबा पूरा ईरान

    इस्लामी गणतंत्र ईरान आज शोक में डूबा हुआ है। राजधानी तेहरान सहित सभी शहरों और गांवों में शोक सभाओं का सिलसिला मंगलवार की रात से ही शुरू हो गया है जो अब तक जारी है।

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  • इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस पर इस्लामी जगत में हर्षोल्लास

    पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस के अवसर पर शनिवार को ईरान व इराक़ समेत इस्लामी जगत के अधिकांश देशों में सभाएं आयोजित हुईं।

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  • यज़ीद के दरबार में इमाम सज्जाद अ. का भाषण।

    यज़ीद की हुकूमत लरज़ने लगी, यज़ीद हालात को देख कर बुरी तरह घबरा गया इसीलिए उसने तुरंत अज़ान देने का हुक्म दिया, अज़ान देने वाले ने अज़ान शुरू की इमाम अ.स. ने भी अज़ान को दोहराना शुरू किया, जैसे ही उसने अशहदो अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह कहा इमाम अ.स. ने यज़ीद की ओर देखते हुए कहा ऐ यज़ीद यह मोहम्मद स.अ. का नाम जो अज़ान देने वाले ने अभी लिया और उनकी रिसालत की गवाही दी मुझे यह बता कि यह तेरे जद हैं या मेरे... अगर तू यह कहे कि यह मेरे जद हैं तो तू झूठा है, और अगर इनको मेरा जद मानता है तो यह बता कि किस जुर्म में उनके ख़ानदान को क़त्ल कर दिया।

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  • शियों के नाम इमाम जाफ़र सादिक़ अ. की वसीयतें।

    हठधर्मी से बचो, क्योंकि यह अमल को नष्ट कर देता है, और झगड़ालू व्यवहार के कारण जीवन बर्बाद मत करो क्योंकि अल्लाह से दूर कर देता है, पहले के लोगों के जीवन को देखो वह किस प्रकार चुपचाप जीवन बिताने का प्रयास करते थे

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  • 8 शव्वाल, जन्नतुल बक़ी और वहाबियत के अत्याचार।

    फिर मदीने में पैग़म्बर की पवित्र क़ब्र को तोप का निशाना बनाया लेकिन मुसलमानों के आक्रोश को देख कर वह ऐसा नही कर पाए।

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  • अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अ. की वसीयत।

    अपने पड़ोसियों के बारे में अल्लाह से डरते रहना..... क्योंकि उनके बारे में पैग़म्बर स0 ने बराबर हिदायत की है और आप इस हद तक उनके लिए सिफ़ारिश फऱमाते रहे कि हम लोगों को ये गुमान होने लगा कि आप उन्हें भी विरासत दिलाएँगे

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  • इमाम हसन अ.ह की महानता रसूले इस्लाम स.अ की ज़बानी।

    रसूले इस्लाम स.अ. इमाम हसन अलैहिस्सलाम को अपने कांधे पर सवार किए हुए कहीं ले जा रहे थे किसी ने कहा अरे बेटा तुम्हारी सवारी कितनी अच्छी है? रसूले इस्लाम स.अ. ने फ़रमाया यह क्यों नहीं कहते कि सवार कितना अच्छा है?

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  • उम्मुल मोमिनीन हज़रत ख़दीजा (स)

    दस रमजानुल मुबारक उम्मुल मोमिनीन हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाह अलैहा के निधन का दिन है। उन्होंने दुनिया को जन्नत में औरतों की सरदार हजरत फातिमा (स) जैसी बेटी का उपहार दिया

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  • इमामे ज़माना (अ) की ग़ैबत में हमारी जिम्मेदारियां।

    मेरे ज़ुहूर में जल्दी के लिए बहुत ज्यादा दुआ करो क्योंकि तुम्हारे मुश्किलों का हल इसी में है इसके अलावा दुआ ए फर्ज पढ़ने की भी बहुत ज़्यादै ताकीद की गई है जो अक्सर दुआओं की किताबों में दर्ज है।

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  • इमाम महदी अलैहिस्सलाम।

    मोहम्मद इब्ने हसन जो इमाम महदी के नाम से प्रसिद्ध हैं शियों के बारहवें इमाम हैं। शिया स्रोतों के अनुसार इमामे ज़माना को जन्म को ख़ुफ़िया रखा गया और इमाम हसन अस्करी के कुछ खास सहाबियों के अलावा किसी को आपका दीदार नसीब नहीं हुआ

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  • इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम की शहादत।

    अब्बासी खलीफा हारुन ने जो कि नहीं चाहता था कि जनता इमाम मूसा काज़िम अली सलाम से इल्म और शिक्षाओं से फायदा उठा सकें 25 रजब 183 हिजरी कमरी को एक साजिश रच कर आपको कैदखाने में जहर देकर शहीद कर दिया शहादत के समय आपकी उम्र केवल 25 साल थी।

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  • हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस।

    अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम मक्के में मस्जिदुल हराम के अंदर जुमे के दिन 13 रजब को पैदा हुए आपके अलावा न कोई और काबे में पैदा हुआ है न ही कोई उसके बाद उस स्थान और महानता को हासिल कर सकेगा

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  • रजब का चाँद के दिखाई देते ही ईरान और भारत सहित विश्व भर में खुशी का माहौल।

    इस्लामी कैलेंडर में से इबादत के महीने रजब के चाँद के दिखाई देते ही ईरान और भारत सहित विश्व भर में खुशी का माहौल दिखाई देने लगा है

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  • हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की वसीयत और शहादत।

    आपकी वसीयत के अनुसार आपका जनाज़ा रात को उठाया गया, हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने ग़ुस्ल और कफ़न का इंतेज़ाम किया केवल बनी हाशिम और सलमान फ़ारसी, मिक़दाद और अम्मार जैसे ईमानदार और वफादार साथियों के साथ नमाज़े जनाज़ा पढ़कर ख़ामोशी के साथ दफन कर दिया

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सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश
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