• इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम की शहादत।

    अब्बासी खलीफा हारुन ने जो कि नहीं चाहता था कि जनता इमाम मूसा काज़िम अली सलाम से इल्म और शिक्षाओं से फायदा उठा सकें 25 रजब 183 हिजरी कमरी को एक साजिश रच कर आपको कैदखाने में जहर देकर शहीद कर दिया शहादत के समय आपकी उम्र केवल 25 साल थी।

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  • हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस।

    अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम मक्के में मस्जिदुल हराम के अंदर जुमे के दिन 13 रजब को पैदा हुए आपके अलावा न कोई और काबे में पैदा हुआ है न ही कोई उसके बाद उस स्थान और महानता को हासिल कर सकेगा

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  • रजब का चाँद के दिखाई देते ही ईरान और भारत सहित विश्व भर में खुशी का माहौल।

    इस्लामी कैलेंडर में से इबादत के महीने रजब के चाँद के दिखाई देते ही ईरान और भारत सहित विश्व भर में खुशी का माहौल दिखाई देने लगा है

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  • हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की वसीयत और शहादत।

    आपकी वसीयत के अनुसार आपका जनाज़ा रात को उठाया गया, हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने ग़ुस्ल और कफ़न का इंतेज़ाम किया केवल बनी हाशिम और सलमान फ़ारसी, मिक़दाद और अम्मार जैसे ईमानदार और वफादार साथियों के साथ नमाज़े जनाज़ा पढ़कर ख़ामोशी के साथ दफन कर दिया

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  • हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की कुछ हदीसें।

    हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. फ़रमाती हैं: "औरतों के लिए अच्छाई और सलाह इसमें है कि न तो वह नामहरम मर्दों को देखें और न नामहरम मर्द उनको देख सकें।"

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  • हज़रत फ़ातेमा ज़हरा स. बेहतरीन आदर्श

    हम एक नज़र उनकी ज़िन्दगी के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर डालते हैं और देखते हैं कि उनका चरित्र क्या था और क्योंकि ख़ुदा नें उनको हमारे लिये आईडियल बनाया है इसलिये हम उनसे कुछ सीख कर अपने जीवन में लागू करें।

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  • हज़रत ज़ैनब स.अ की ज़िंदगी पर एक निगाह।

    हज़रत ज़ैनब (अ) ने बचपन के दिनों में अपने बाबा हज़रत अली (अ) से पूछा: बाबा जान! क्या आप हमें प्यार करते हैं? अमीरूल मोमेनीन हज़रत अली (अ) ने फ़रमाया: मैं तुमसे प्यार क्यों न करूँ, तुम तो मेरे दिल का तुकड़ा हो।

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  • हज़रत मासूमा स. का एक संक्षिप्त परिचय।

    हज़रत मासूमा स. (अ) शियों के सातवें इमाम मूसा काज़िम (अ) की बेटी हैं, उसकी माँ हज़रत नजमा ख़ातून हैं, हज़रत मासूमा स. (अ) पहली ज़ीकाद 173 हिजरी में मदीना मुनव्वरा में पैदा हुईं।

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  • इमाम हुसैन अ. के कितने भाई कर्बला में शहीद हुए।

    कर्बला में जिन नेक और अच्छे इंसानों ने सह़ी और कामयाब रास्ते को अपनाया और अपने ज़माने के इमाम के नेतृत्व में बुरे लोगों के मुक़ाबले, अपनी ख़ुशी के साथ जंग की और शहीद हुए उनमें से कुछ वीर ह़ज़रत अली (अ.स) के बेटे भी थे जो अमीरूल मोमिनीन अ. की तरफ़ से इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम के भाई थे, इतिहास की किताबों में उनकी संख्या 18 बताई गई है।

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  • ईदे मुबाहेला:

    इस्लाम व अहलेबैत की जीत का दिन।

    नजरान क्षेत्र के ईसाईयों के धार्मिक नेता एक चटान के ऊपर जाते हैं। बुढ़ापे के कारण उनके जबड़े और सफ़ेद दाढ़ी के बालों में कंपन है। वह कांपती हुई आवाज़ में कहते हैं कि मेरे विचार में मुबाहिला करना उचित नहीं होगा। यह पांच नूरानी चेहरे जिन्हें मैं देख रहा हूं अगर दुआ कर देंगे तो धरती में धंसे पहाड़ उखड़ जाएंगे। अगर मुबाहिला हुआ तो हमारी तबाही निश्चित है और यह भी आशंका है कि अल्लाह के अज़ाब समूचे दुनिया के ईसाई समुदाय को अपनी चपेट में ले ले।

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  • अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अ. और हज़रत ज़हरा की शादी।

    एक सफल वैवाहिक जीवन के लिए ज़रूरी है कि घर की जिम्मेदारियां और काम बाट लिए जाएँ। कछ काम पति के जिम्मे हों और कुछ पत्नी के जिम्मे। ताकि सारा बोझ एक के कंधों पर न पड़े। अलबत्ता इसका मतलब यह नहीं है कि वह उन जिम्मेदारियों में एक दूसरे का साथ न दें और एक दूसरे का सहयोग न करें बल्कि ज़रूरी है कि जहां पति पत्नी के कामों में उसका हाथ बंटा सकता है, उसका हाथ बटाए और अगर पत्नी पति के कामों में उसकी मदद कर सकती है तो ज़रूर करे.........................

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  • एक सात साल का बच्चा इमाम कैसे हो सकता है?

    बग़दाद के अस्सी उलमा और बुज़ुर्गों ने जब हज के मौसम में इमाम मोहम्मद तक़ी अ. से मुलाक़ात की तो आपने उनके हर सवाल का जवाब दिया और उनके लिए साबित हो गया कि आप वास्तव में इमाम हैं और मामून ने आपकी कमसिनी के बावजूद जब आपको अपना दामाद बनाया तो अब्बासियों की ओर से आलोचना हुई कि तुमने उन्हें अपना दामाद क्यों बनाया है? तो मामून ने कहा: मैं उनके इल्म और गुणों को देखते हुए उन्हें अपना दामाद बनाया है और फिर बड़े बड़े उलमा......

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  • इमाम अली रज़ा अ. का संक्षिप्त जीवन परिचय।

    इमाम अली रेज़ा अ. मदीने में सन 148 हिजरी में पैदा हुए और सन 203 हिजरी में मामून अब्बासी के हाथों शहीद हुए। आपके वालिद इमाम मूसा काज़िम अ. शियों के सातवें इमाम हैं, आपकी माँ का नाम ताहिरा था और जब उन्होंने इमाम रेज़ा अ. को जन्म दिया था तो इमाम मूसा काज़िम अ. ने उन्हें ताहिरा का नाम दिया।

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  • 21 रमज़ान, हज़रत अली की शहादत की बरसी पर 40 लाख ज़ायरीन नजफ़ पहुंचे।

    इराक़ और संसार के विभिन्न देशों से चालीस लाख श्रद्धालू हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत की बरसी पर पवित्र नगर नजफ़ पहुंचे।

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  • पूरी दुनिया में इमाम महदी अ. का जन्मदिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

    ईरान सहित दुनिया के दर्जनों देश में रविवार को पूरी मानवता के मोक्षदाता हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का जन्म दिवस पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

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  • इमाम मूसा काज़िम अ. की शहादत की याद मनाने लाखों ज़ायरीन काज़मैन पहुँचे।

    इमाम हज़रत मूसा काज़िम (अ.स) के शहादत दिवस के अवसर पर लाखों की संख्या में इराक़ पहुंचे श्रद्धालु।

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  • हज़रत फ़ातेमा ज़हरा स. का संक्षिप्त जीवन परिचय।

    जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. की श्रेष्ठता दिल और आत्मा को इस तरह अपनी तरफ़ खींचती है कि इन्सान की ज़बान बंद हो जाती है। जो भी उनकी श्रेष्ठता और ख़ुदा और उसके रसूल की नज़र में उनके मरतबे को देखता है वह देखता ही रह जाता है कि यह बीबी कितनी महान बीबी थीं। उन्हें समझने के लिये इन्सान के पास दूरदर्शिता और बसीरत होनी चाहिये। शायद हम जैसे इन्सान न समझ पाएं, हाँ उन्हें जानने के लिये उन आयतों और हदीसों से मदद ली जा सकती है जिनमें उनकी श्रेष्ठता बयान की गई है।

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  • जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. विलायत के आसमान का एक तारा।

    यह तारा आसमान वालों के लिये चमकता है। यह तारा हमारे लिये हिदायत का तारा है। हमनें हिदायत के इस तारे से क्या पाया है? हमारे लिये ज़रूरी है कि इस चमकते तारे की रौशनी में ख़ुदा और ख़ुदा के रास्ते की खोज करें। वह रास्ता जिसे सीधा रास्ता कहते हैं, जिस रास्ते पर ख़ुद बीबी ज़हरा स. चली हैं। आपका जन्म भी एक ख़ास चीज़ से हुआ है। ख़ुदा यह बात जानता था कि यह महान औरत दुनिया में हर एम्तेहान और परीक्षा में सफल होगी इसलिये इसके जन्म का इंतेज़ाम भी ख़ास तरीक़े से किया।

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  • आख़री नबी हज़रत मुहम्मद स. का संक्षिप्त जीवन परिचय।

    पैग़म्बरो में सबसे सर्वश्रेष्ठ और सबसे महान आख़री नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.अ हैं जिनकी ज़िन्दगी और कैरेक्टर को अल्लाह नें क़यामत तक के इन्सानों के लिये मॉडल बनाया है।

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  • एकता सप्ताह 12 रबीउल अव्वल से 17 रबीउल अव्वल।

    सुन्नी मुसलमान 12 रबीउल अव्वल जबकि शीया मुसलमान 17 रबीउल अव्वल को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम का जन्म दिवस मनाते हैं। वर्षों पहले ईरान की इस्लाम क्रांति के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने इस्लामी जगत में एकता का नारा लगाया और उन्होंने इस बात का प्रयोग मुसलमानों तथा विभिन्न संप्रदायों को एक दूसरे से निकट लाने के लिए किया और इन दोनों तारीख़ों के मध्य अंतर को मुसलमानों के मध्य “हफ्तये वहदत” अर्थात एकता सप्ताह के रूप में मनाये जाने की घोषणा की। यह सप्ताह इस्लामी जगत में विशेषकर इस समय एकता व एकजुटता की आवश्यकता को बयान करने का बेहतरीन अवसर है क्योंकि इस समय दुनिया विशेषकर इस्लामी जगत को संकटों व समस्याओं का सामना है और एकता व एकजुटता से बहुत सी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। यद्यपि विभिन्न संप्रदायों के मुसलमानों के मध्य कुछ धार्मिक आदेशों में मतभेद है परंतु बहुत से मामलों में उनके मध्य समानता है जैसे ईश्वर एक है ,क़ुरआन एक है, पैग़म्बर एक है और क़िबला एक है। इसी प्रकार महत्वपूर्ण धार्मिक उपासनाओं को अंजाम देने में उनके मध्य समानता है जैसे नमाज़ पढ़ने, रोज़ा रखने, हज करने और ज़कात देने आदि

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  • हज़रत इमाम हसन असकरी अ.स. का संक्षिप्त जीवन परिचय।

    8 रबीउल अव्वल को हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम का शहादत दिवस है। उन्होंने अपनी 28 साल की ज़िन्दगी में दुश्मनों की ओर से बहुत से दुख उठाए और अब्बासी शासक ‘मोतमद’ के किराए के टट्टुओं के हाथों इराक़ के सामर्रा इलाक़े में ज़हर से आठ दिन तक दर्द सहने के बाद शहीद हो गए

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  • 28 सफ़र, दोहरा ग़म

    पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. की वफ़ात

    इलाही पैग़म्बरों ने दीन के पौधे की सिंचाई की क्योंकि उन्हें इंसानी समाजों में भलाई फैलाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। उनका उद्देश्य समाज में तौहीद को फैलाना, अद्ल व न्याय की स्थापना और अंधविश्वास व जेहालत से लोगों को दूर कर कमाल (परिपूर्णतः) की ओर मार्गदर्शन करना था। इलाही पैग़म्बरों की ज़ंजीर की आख़री कड़ी पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम हैं। कृपा व मेहरबानी के प्रतीक पैग़म्बरे इस्लाम ने उस इमारत को पूरा किया जिसकी आधारशिला पहले वाले इलाही पैग़म्बरों ने रखी थी।

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  • इमाम हुसैन अ.स. का चेहलुम

    आशूर के दिन जब करबला के मैदान में रसूले इस्लाम स.अ. के नवासे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को भूखा और प्यासा शहीद कर दिया गया और उसके बाद उनके परिवार और रिश्तेदारों के ख़ैमों को आग के हवाले कर दिया गय तो दुश्मन यह सोच रहा था कि अब तो सब कुछ ख़त्म हो चुका है।

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  • इमाम हुसैन अ. अहलेसुन्नत की निगाह में

    इमाम हुसैन अ. रसूले इस्लाम स.अ. की ज़बानी

    हर बाप की इच्छा और तमन्ना होती है कि उसका बेटा ऐसा हो कि उसके व्यक्तित्व का उत्तराधिकारी, उसके संदेश का रक्षक और उसके मिशन को आगे बढ़ाने वाला हो। चूंकि इमाम हुसैन अ. ने अपने आंदोलन और अभूतपूर्व बलिदान द्वारा पैगम्बरे इस्लाम स.अ. के संदेश और मिशन को अमर बना दिया है इसलिए पैगम्बर स.अ. आपके बारे में फ़रमाते हैं, मैं हुसैन से हूँ, यानी मेरी रिसालत, मेरे संदेश व मिशन, हुसैन के कारण बाक़ी बचेगा।

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  • हजरते मासूमा स.अ. का जन्मदिवस।

    हज़रते फ़ातेमा मासूमा स.अ. इस्लामी इतिहास की एक महत्वपूर्ण हस्ती का नाम है। आप शियों के सातवें इमाम, हज़रत इमाम मूसा काज़िम अ.स. की बेटी और आठवें इमाम, हज़रत इमाम रेज़ा अ.स. की बहन हैं आप बहुत छोटी थीं तभी आपके बाबा इमाम मूसा काज़िम अ.स. को शहीद कर दिया गया और आपकी शिक्षा और प्रशिक्षण आपके भाई इमाम रेज़ा अ.स. ने किया

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  • अत्याचारी बादशाहों के दौर में इमाम सादिक़ अ. नें आंदोलन क्यों नहीं किया।

    इमाम सादिक़ अ. के ज़माने के बादशाहों के विरुद्ध होने वाले अक्सर आंदोलनों में इमाम सादिक़ अ. की मर्ज़ी शामिल नहीं थी। और आप आंदोलन के अगुवाओं की ओर की जाने वाली अपील को जो आपकी मदद और सहयोग का वादा करते थे, स्वीकार नहीं करते थे। और अहलेबैत अलैहिस्सलाम की शिक्षाओं को प्रचलित करने को प्राथमिकता देते थे।

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  • हज़रत अली की शहादत की याद में दुनिया एक बार फिर ग़मगीन।

    ईरान समेत दुनिया भर में शिया मुसलमानों के पहले इमाम और विश्व में न्याय एवं वीरता के प्रतीक हज़रत अली (अ) की शहादत का सोग मनाया जा रहा है।

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پیام امام خامنه ای به مسلمانان جهان به مناسبت حج 2016
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