• अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली अ. की वसीयत।

    अपने पड़ोसियों के बारे में अल्लाह से डरते रहना..... क्योंकि उनके बारे में पैग़म्बर स0 ने बराबर हिदायत की है और आप इस हद तक उनके लिए सिफ़ारिश फऱमाते रहे कि हम लोगों को ये गुमान होने लगा कि आप उन्हें भी विरासत दिलाएँगे

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  • शबे क़द्र का महत्व और उसकी बरकतें।

    इमाम मोहम्मद बाक़िर फ़रमाते हैंः शबे क़द्र वह रात है जो हर साल रमज़ानु मुबारक की आख़री तारीखों में आती है जिसमें न केवल क़ुरआन नाज़िल हुआ है बल्कि अल्लाह तआला ने इस रात के लिए फ़रमायाः इस भाग्य की रात में हर वह घटना और काम जो साल भर में होना होगा जैसे अच्छाई, बुराई और गुनाह या वह संतान जिसको पैदा होना है या वह मौत जो आएगी या वह रिज़्क़ व आहार जो मिलेगा सबके सब भाग्य में लिख दिए जाते हैं।

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  • इमाम हसन अ.ह की महानता रसूले इस्लाम स.अ की ज़बानी।

    रसूले इस्लाम स.अ. इमाम हसन अलैहिस्सलाम को अपने कांधे पर सवार किए हुए कहीं ले जा रहे थे किसी ने कहा अरे बेटा तुम्हारी सवारी कितनी अच्छी है? रसूले इस्लाम स.अ. ने फ़रमाया यह क्यों नहीं कहते कि सवार कितना अच्छा है?

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  • बच्चों के सामने वाइफ की बुराई।

    बच्चे के सामने मां-बाप में से किसी एक का अपमान वास्तव में उसकी भावनाओं के केंद्र और आत्मविश्वास के मजबूत स्तंभ को तहस-नहस करने के समान है। इसी तरह जब मां-बाप में से कोई एक बच्चे के सामने दूसरे की आलोचना करता है उसकी बुराई करता है तो वास्तव में वह बच्चे के अंदर अपमान और मां-बाप की बात न मानने की भावना को मजबूत करता है। इसलिए कुछ समय के बाद उस घर में ना तो बाप का सम्मान रहेगा और ना ही मां किसी सम्मान के लायक समझी जाएगी।

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  • बचपन का मोटापा बन सकता है उम्र भर के डिप्रेशन का कारण।

    एक रिपोर्ट में IASO ने अपनी ताजा प्रेस रिलीज में खास तौर पर मां-बाप को चेतावनी दी है कि वह अपने बच्चों में मोटापे की अनदेखी न करें क्योंकि बाद की उम्र में यही चीज उनके लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

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  • उम्मुल मोमिनीन हज़रत ख़दीजा (स)

    दस रमजानुल मुबारक उम्मुल मोमिनीन हज़रत ख़दीजा सलामुल्लाह अलैहा के निधन का दिन है। उन्होंने दुनिया को जन्नत में औरतों की सरदार हजरत फातिमा (स) जैसी बेटी का उपहार दिया

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  • अगर नहीं चाहते कि बुढ़ापे में पछताना पड़े, तो अपनाइये यह उपाय।

    मां बाप की तकलीफ पर रो सकते हैं उनके इलाज पर अपना सब कुछ लुटा सकते हैं उनके लिए किसी से लड़ मर सकते हैं लेकिन इंसान की बेबसी का तमाशा देखिए की चाह कर भी उनके पास बैठ कर दो घड़ी बात नहीं कर सकते। उनके लिए मां बाप के शब्द उनके लिए अजनबी हो चुके होते हैं।

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  • गर्मी का मौसम और ठंडे पानी का इस्तेमाल।

    गर्मियों में ठंडा पानी पीना लगभग सभी बहुत पसंद होता है, चिलचिलाती धूप में पसीने से भीगे हुए जब आप घर आते हैं तो दिल करता है ठंडा ठंडा पानी पीने का

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  • आले सऊद का फैमिली बैकग्राउंड।

    मर्दखाई की संतानों में से एक बेटे का नाम अल-मकारन था अल-मकारन के यहां पहला बेटा पैदा हुआ जिसका नाम मोहम्मद रखा गया था मोहम्मद के बाद अल-मकारन के यहां उसके दूसरे बेटे ने जन्म लिया जिसका नाम सऊद रखा गया।

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  • बच्चों के लड़ाई झगड़े को कैसे कंट्रोल करें?

    हमें यह बात भी मालूम होनी चाहिए कि बच्चों की आदत हमेशा नहीं रहेगी बल्कि उम्र के साथ-साथ खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगी अगर मां-बाप उनके बचपन की एक्टिविटीज को एक सच्चाई के तौर पर मान लें तो फिर किसी हद तक उन्हें इत्मीनान हो जाएगा

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  • इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम की शहादत।

    अब्बासी खलीफा हारुन ने जो कि नहीं चाहता था कि जनता इमाम मूसा काज़िम अली सलाम से इल्म और शिक्षाओं से फायदा उठा सकें 25 रजब 183 हिजरी कमरी को एक साजिश रच कर आपको कैदखाने में जहर देकर शहीद कर दिया शहादत के समय आपकी उम्र केवल 25 साल थी।

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  • हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस।

    अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम मक्के में मस्जिदुल हराम के अंदर जुमे के दिन 13 रजब को पैदा हुए आपके अलावा न कोई और काबे में पैदा हुआ है न ही कोई उसके बाद उस स्थान और महानता को हासिल कर सकेगा

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  • रजब का चाँद के दिखाई देते ही ईरान और भारत सहित विश्व भर में खुशी का माहौल।

    इस्लामी कैलेंडर में से इबादत के महीने रजब के चाँद के दिखाई देते ही ईरान और भारत सहित विश्व भर में खुशी का माहौल दिखाई देने लगा है

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  • हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की वसीयत और शहादत।

    आपकी वसीयत के अनुसार आपका जनाज़ा रात को उठाया गया, हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने ग़ुस्ल और कफ़न का इंतेज़ाम किया केवल बनी हाशिम और सलमान फ़ारसी, मिक़दाद और अम्मार जैसे ईमानदार और वफादार साथियों के साथ नमाज़े जनाज़ा पढ़कर ख़ामोशी के साथ दफन कर दिया

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  • हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. की कुछ हदीसें।

    हज़रत फ़ातिमा ज़हरा स. फ़रमाती हैं: "औरतों के लिए अच्छाई और सलाह इसमें है कि न तो वह नामहरम मर्दों को देखें और न नामहरम मर्द उनको देख सकें।"

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  • हज़रत फ़ातेमा ज़हरा स. बेहतरीन आदर्श

    हम एक नज़र उनकी ज़िन्दगी के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर डालते हैं और देखते हैं कि उनका चरित्र क्या था और क्योंकि ख़ुदा नें उनको हमारे लिये आईडियल बनाया है इसलिये हम उनसे कुछ सीख कर अपने जीवन में लागू करें।

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  • हज़रत ज़ैनब स.अ की ज़िंदगी पर एक निगाह।

    हज़रत ज़ैनब (अ) ने बचपन के दिनों में अपने बाबा हज़रत अली (अ) से पूछा: बाबा जान! क्या आप हमें प्यार करते हैं? अमीरूल मोमेनीन हज़रत अली (अ) ने फ़रमाया: मैं तुमसे प्यार क्यों न करूँ, तुम तो मेरे दिल का तुकड़ा हो।

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  • हज़रत मासूमा स. का एक संक्षिप्त परिचय।

    हज़रत मासूमा स. (अ) शियों के सातवें इमाम मूसा काज़िम (अ) की बेटी हैं, उसकी माँ हज़रत नजमा ख़ातून हैं, हज़रत मासूमा स. (अ) पहली ज़ीकाद 173 हिजरी में मदीना मुनव्वरा में पैदा हुईं।

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  • हज़रत इमाम हसन अस्करी अ. की संक्षिप्त जीवनी।

    हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ) आठ रबीउस्सानी 232 हिजरी को जुमे के दिन मदीना में पैदा हुए आप इमामत और विलायत की ग्यारहवीं कड़ी हैं हज़रत इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम का सामना भी आपने पूर्वजों (अहलेबैत) की तरह समय के ज़ालिम, अत्याचारी और मक्कार अब्बासी ख़लीफ़ा से था, आपकी मिसाल उस दौर में ऐसी ही थी जिस तरह ज़ुल्म और अत्याचार के काले अंधेरे में एक दिये की होती है।

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  • इमाम हुसैन अ. के कितने भाई कर्बला में शहीद हुए।

    कर्बला में जिन नेक और अच्छे इंसानों ने सह़ी और कामयाब रास्ते को अपनाया और अपने ज़माने के इमाम के नेतृत्व में बुरे लोगों के मुक़ाबले, अपनी ख़ुशी के साथ जंग की और शहीद हुए उनमें से कुछ वीर ह़ज़रत अली (अ.स) के बेटे भी थे जो अमीरूल मोमिनीन अ. की तरफ़ से इमाम ह़ुसैन अलैहिस्सलाम के भाई थे, इतिहास की किताबों में उनकी संख्या 18 बताई गई है।

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  • ईदे मुबाहेला:

    इस्लाम व अहलेबैत की जीत का दिन।

    नजरान क्षेत्र के ईसाईयों के धार्मिक नेता एक चटान के ऊपर जाते हैं। बुढ़ापे के कारण उनके जबड़े और सफ़ेद दाढ़ी के बालों में कंपन है। वह कांपती हुई आवाज़ में कहते हैं कि मेरे विचार में मुबाहिला करना उचित नहीं होगा। यह पांच नूरानी चेहरे जिन्हें मैं देख रहा हूं अगर दुआ कर देंगे तो धरती में धंसे पहाड़ उखड़ जाएंगे। अगर मुबाहिला हुआ तो हमारी तबाही निश्चित है और यह भी आशंका है कि अल्लाह के अज़ाब समूचे दुनिया के ईसाई समुदाय को अपनी चपेट में ले ले।

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  • सबसे बड़ी ईद,ईदे ग़दीर।

    ग़दीर मक्के से 64 किलोमीटर दूरी पर स्थित अलजोहफ़ा घाटी से तीन से चार किलोमीटर दूर एक जगह थी जहां तालाब था। इसके आस पास पेड़ थे। क़ाफ़िले वाले इसकी छाव में अपने सफ़र की थकान उतारते और साफ़ और मीठे पानी से अपनी प्यास बुझाते थे। समय बीतने के साथ यह छोटा सा तालाब एक अथाह झील में तब्दील हो गया कि जहां से हजरत अली अलैहिस्सलाम को पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम का जानशीन (उत्तराधिकारी) बनाए जाने की घटना का मैसेज पूरी दुनिया में फैल गया।

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  • अरफ़ा, दुआ, इबादत और अल्लाह के नज़दीक होने का दिन।

    दुआ इबादत की रूह है। जो इबादत दुआ के साथ होती है वह प्रेम और परिज्ञान को उपहार स्वरूप लाती है। दुआ ऐसी आत्मिक स्थिति है कि जो इंसान और उसके जन्मदाता के बीच मोहब्बत एवं लगाव पैदा करती है। दुआ से जीवन के प्रति सकारात्मक सोच पैदा होती है। पैग़म्बरे इस्लाम (स) फ़रमाते हैं, सर्वश्रेष्ठ इंसान वह है कि जो इबादत और दुआ से लगाव रखता हो।

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  • अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली अ. और हज़रत ज़हरा की शादी।

    एक सफल वैवाहिक जीवन के लिए ज़रूरी है कि घर की जिम्मेदारियां और काम बाट लिए जाएँ। कछ काम पति के जिम्मे हों और कुछ पत्नी के जिम्मे। ताकि सारा बोझ एक के कंधों पर न पड़े। अलबत्ता इसका मतलब यह नहीं है कि वह उन जिम्मेदारियों में एक दूसरे का साथ न दें और एक दूसरे का सहयोग न करें बल्कि ज़रूरी है कि जहां पति पत्नी के कामों में उसका हाथ बंटा सकता है, उसका हाथ बटाए और अगर पत्नी पति के कामों में उसकी मदद कर सकती है तो ज़रूर करे.........................

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  • एक सात साल का बच्चा इमाम कैसे हो सकता है?

    बग़दाद के अस्सी उलमा और बुज़ुर्गों ने जब हज के मौसम में इमाम मोहम्मद तक़ी अ. से मुलाक़ात की तो आपने उनके हर सवाल का जवाब दिया और उनके लिए साबित हो गया कि आप वास्तव में इमाम हैं और मामून ने आपकी कमसिनी के बावजूद जब आपको अपना दामाद बनाया तो अब्बासियों की ओर से आलोचना हुई कि तुमने उन्हें अपना दामाद क्यों बनाया है? तो मामून ने कहा: मैं उनके इल्म और गुणों को देखते हुए उन्हें अपना दामाद बनाया है और फिर बड़े बड़े उलमा......

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  • इमाम अली रज़ा अ. का संक्षिप्त जीवन परिचय।

    इमाम अली रेज़ा अ. मदीने में सन 148 हिजरी में पैदा हुए और सन 203 हिजरी में मामून अब्बासी के हाथों शहीद हुए। आपके वालिद इमाम मूसा काज़िम अ. शियों के सातवें इमाम हैं, आपकी माँ का नाम ताहिरा था और जब उन्होंने इमाम रेज़ा अ. को जन्म दिया था तो इमाम मूसा काज़िम अ. ने उन्हें ताहिरा का नाम दिया।

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  • हज़रत फ़ातेमा ज़हरा स. का संक्षिप्त जीवन परिचय।

    जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. की श्रेष्ठता दिल और आत्मा को इस तरह अपनी तरफ़ खींचती है कि इन्सान की ज़बान बंद हो जाती है। जो भी उनकी श्रेष्ठता और ख़ुदा और उसके रसूल की नज़र में उनके मरतबे को देखता है वह देखता ही रह जाता है कि यह बीबी कितनी महान बीबी थीं। उन्हें समझने के लिये इन्सान के पास दूरदर्शिता और बसीरत होनी चाहिये। शायद हम जैसे इन्सान न समझ पाएं, हाँ उन्हें जानने के लिये उन आयतों और हदीसों से मदद ली जा सकती है जिनमें उनकी श्रेष्ठता बयान की गई है।

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  • जनाबे फ़ातिमा ज़हरा स. विलायत के आसमान का एक तारा।

    यह तारा आसमान वालों के लिये चमकता है। यह तारा हमारे लिये हिदायत का तारा है। हमनें हिदायत के इस तारे से क्या पाया है? हमारे लिये ज़रूरी है कि इस चमकते तारे की रौशनी में ख़ुदा और ख़ुदा के रास्ते की खोज करें। वह रास्ता जिसे सीधा रास्ता कहते हैं, जिस रास्ते पर ख़ुद बीबी ज़हरा स. चली हैं। आपका जन्म भी एक ख़ास चीज़ से हुआ है। ख़ुदा यह बात जानता था कि यह महान औरत दुनिया में हर एम्तेहान और परीक्षा में सफल होगी इसलिये इसके जन्म का इंतेज़ाम भी ख़ास तरीक़े से किया।

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  • आख़री नबी हज़रत मुहम्मद स. का संक्षिप्त जीवन परिचय।

    पैग़म्बरो में सबसे सर्वश्रेष्ठ और सबसे महान आख़री नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.अ हैं जिनकी ज़िन्दगी और कैरेक्टर को अल्लाह नें क़यामत तक के इन्सानों के लिये मॉडल बनाया है।

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  • हज़रत इमाम हसन असकरी अ.स. का संक्षिप्त जीवन परिचय।

    8 रबीउल अव्वल को हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम का शहादत दिवस है। उन्होंने अपनी 28 साल की ज़िन्दगी में दुश्मनों की ओर से बहुत से दुख उठाए और अब्बासी शासक ‘मोतमद’ के किराए के टट्टुओं के हाथों इराक़ के सामर्रा इलाक़े में ज़हर से आठ दिन तक दर्द सहने के बाद शहीद हो गए

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پیام امام خامنه ای به مسلمانان جهان به مناسبت حج 2016
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